बीजेपी के चुनावी एजेंडे में कई दशकों से यूनिफॉर्म सिविल कोड शामिल है. बीते साल राज्यसभा में बीजेपी सांसद
मुस्लिम समुदाय यूसीसी को धार्मिक मामलों में दखल के तौर पर देखते हैं. दरअसल, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के तहत शरीयत के आधार पर मुस्लिमों के लिए
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (27 जून) को यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का जिक्र किया. पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि एक घर में दो कानून नहीं चल सकते हैं. ऐसी दोहरी व्यवस्था से देश कैसे चल पाएगा. उन्होने कहा कि इस मुद्द पर मुस्लिमों को गुमराह किया जा रहा है. पीएम मोदी के इस बयान पर सियासी घमासान छिड़ गया है
अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि दिसंबर 2012 में नरेंद्र कुमार तिवारी व अन्य के मामले में फैसला दिया था
झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस डॉ एसएन पाठक की कोर्ट ने सेवा नियमितीकरण को लेकर दायर लगभग सौ से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई की. प्रार्थियों का पक्ष सुनने के बाद अदालत ने सुनवाई के लिए चार बिंदु
सके बाद से ही बीजेपी शासित कई राज्यों में यूसीसी को लागू करने को लेकर जोर-आजमाइश तेज हो गई
निहालच्या वडिलांनी सांगितले की, जेव्हाही तो गाणं गायचा, तेव्हा गाण्याचे शब्द विसरायचा, पण इंडियन आयडॉल 12 मध्ये दिसल्यानंतर तो पूर्णपणे बदलला आहे. निहालचे महिला चाहते त्याच्यासाठी वेडे होतात. जेव्हा ते निहालला गाण्यासह नाचताना पाहतात.
यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर सबसे बड़ा कदम 9 दिसंबर 2022 को उठाया गया
यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर सबसे बड़ा कदम 9 दिसंबर 2022 को उठाया गया. राज्यसभा में प्राइवेट मेंबर बिल के तौर पर 'यूनिफॉर्म सिविल कोड इन इंडिया 2020' बिल को पेश किया गया. बीजेपी सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने ये बिल
यूसीसी का विरोध करने वाले मुस्लिम धर्मगुरुओं का मानना है कि यूसीसी की वजह से मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का वजूद
मुस्लिम धर्मगुरुओं को यूनिफॉर्म सिविल कोड के जरिए मुसलमानों पर हिंदू रीति-रिवाज थोपने की कोशिश किए जाने का शक है. इनका मानना है कि यूसीसी लागू होने के बाद हर मजहब पर हिंदू रीति-रिवाजों को थोपने की कोशिश की जाएगी