भारतीय थलसेना को अपाचे AH-64E लड़ाकू हेलीकॉप्टर की पहली खेप मिली है। इससे पहले ये हेलीकॉप्टर केवल भारतीय वायुसेना के पास थे।
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भारतीय थलसेना को अब अपाचे AH-64E लड़ाकू हेलीकॉप्टर की पहली खेप मिल चुकी है, जिसे राजस्थान के जोधपुर एयरबेस पर तैनात किया गया है. इससे पहले ये हेलीकॉप्टर केवल भारतीय वायुसेना के पास थे. अब थलसेना को इन शक्तिशाली हेलीकॉप्टरों की तैनाती से पश्चिमी सीमाओं पर तेजतर्रार प्रतिक्रिया करने की क्षमता हासिल हुई है.
इन हेलीकॉप्टरों की तैनाती भारत की सामरिक रणनीति को बदलने की क्षमता रखती है. यह फैसला इस बात को रेखांकित करता है कि भारतीय सेना अब मल्टी-डोमेन ऑपरेशनों की ओर बढ़ रही है, जहां थलसेना और वायुसेना के बीच तालमेल बेहद महत्वपूर्ण है.
भारतीय थलसेना को अब अपाचे AH-64E लड़ाकू हेलीकॉप्टर की पहली खेप मिल चुकी है, जिसे राजस्थान के जोधपुर एयरबेस पर तैनात किया गया है. इससे पहले ये हेलीकॉप्टर केवल भारतीय वायुसेना के पास थे. अब थलसेना को इन शक्तिशाली हेलीकॉप्टरों की तैनाती से पश्चिमी सीमाओं पर तेजतर्रार प्रतिक्रिया करने की क्षमता हासिल हुई है.
इन हेलीकॉप्टरों की तैनाती भारत की सामरिक रणनीति को बदलने की क्षमता रखती है. यह फैसला इस बात को रेखांकित करता है कि भारतीय सेना अब मल्टी-डोमेन ऑपरेशनों की ओर बढ़ रही है, जहां थलसेना और वायुसेना के बीच तालमेल बेहद महत्वपूर्ण है.
Frequently Asked Questions
भारतीय थलसेना को कौन से नए लड़ाकू हेलीकॉप्टर मिले हैं?
नए अपाचे हेलीकॉप्टरों को कहाँ तैनात किया गया है?
नए अपाचे AH-64E लड़ाकू हेलीकॉप्टरों को राजस्थान के जोधपुर एयरबेस पर तैनात किया गया है।
थलसेना को अपाचे हेलीकॉप्टरों की तैनाती से क्या लाभ हुआ है?
थलसेना को इन शक्तिशाली हेलीकॉप्टरों की तैनाती से पश्चिमी सीमाओं पर तेजतर्रार प्रतिक्रिया करने की क्षमता हासिल हुई है।
अपाचे हेलीकॉप्टरों की तैनाती से भारतीय सेना की किस रणनीति में बदलाव आया है?
इन हेलीकॉप्टरों की तैनाती से भारत की सामरिक रणनीति में बदलाव आया है। यह भारतीय सेना के मल्टी-डोमेन ऑपरेशनों की ओर बढ़ने का संकेत देता है।













