Blog: वो बात जिसने दी विराट को दोहरे शतक और बड़ी जीत से भी ज्यादा खुशी

भारत की टीम ने पुणे टेस्ट में पारी और 137 रनों से बड़ी जीत हासिल की. इस जीत के लिए विराट कोहली को मैन ऑफ द मैच चुना गया. उन्होंने इस टेस्ट मैच की पहली पारी में शानदार दोहरा शतक लगाया था. टेस्ट क्रिकेट में विराट कोहली करीब दस महीने से शतक लगाने से चूक रहे थे. पुणे में उन्होंने ये सिलसिला तोड़ा और दोहरा शतक लगाया. विराट के पास टेस्ट करियर का पहला तिहरा शतक लगाने का मौका भी था लेकिन उन्होंने टीम के हित में अपने ‘माइलस्टोन’ को नजरअंदाज कर दिया. उन्होंने अपने गेंदबाजों को दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाजों को दो बार आउट करने के लिए तीन दिन से ज्यादा का समय दिया. 600 से ज्यादा रनों का स्कोर ही बता रहा था भारतीय टीम को पुणे में दोबारा बल्लेबाजी करने के लिए मैदान में शायद ही उतरना पड़े. हुआ भी यही अपनी कप्तानी में सिर्फ 7वीं बार फॉलोऑन देने वाले विराट कोहली ने जीत हासिल की. आपको बता दें कि विराट कोहली की कप्तानी में 14 ऐसे मौके आए हैं जब उनके पास विरोधी टीम को फॉलोऑन देने का मौका था लेकिन उन्होंने सिर्फ सात बार फॉलोऑन देने का फैसला किया है. जिसमें से पांच मैचों में उन्होंने जीत हासिल की है. यानि इस टेस्ट मैच में विराट कोहली ने जो जो फैसला किया वो सब सही साबित हुआ. बावजूद इसके विराट कोहली की खुशी की वजह उनका दोहरा शतक या पारी से मिली बड़ी जीत नहीं है. वो तो किसी तीसरी वजह से ही खुश हैं.


गेंदबाजों की कामयाबी है बहुत बड़ी बात


भारतीय टीम के गेंदबाजों ने लगातार दूसरे टेस्ट मैच में विरोधी टीम के बल्लेबाजों को दो बार ऑलआउट किया. भारतीय गेंदबाजों के सामने दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज पहली पारी में तो 105.4 ओवर तक क्रीज पर डट पाए लेकिन दूसरी पारी में 67.2 ओवर में ही उनकी पूरी टीम धराशायी हो गई. ये भारतीय गेंदबाजों का खौफ ही है जो अफ्रीकी बल्लेबाजों के सर चढ़कर बोला. पुणे टेस्ट में उमेश यादव और आर अश्विन ने 6-6 विकेट लिए. रवींद्र जडेजा के खाते में 4 विकेट आए. मोहम्मद शमी ने 3 और ईशांत शर्मा ने 1 विकेट लिया. इस सीरीज में अब तक आर अश्विन ने 14 और रवींद्र जडेजा ने 10 विकेट चटकाए हैं. अब बात विराट की खुशी की, इस सीरीज में टीम इंडिया के दो फ्रंटलाइन गेंदबाज नहीं खेल रहे थे. जसप्रीत बुमराह और भुवनेश्वर कुमार दोनों इस सीरीज में टीम इंडिया का हिस्सा नहीं थे. इन दोनों गेंदबाजों की गैरमौजूदगी में भारतीय फैंस को इस बात का डर था कि कहीं दक्षिण अफ्रीकी टीम बाजी ना पलट दे. लेकिन इन दोनों गेंदबाजों के ना रहते हुए भी भारतीय गेंदबाजों की मौजूदा यूनिट ने उनकी कमी नहीं खलने दी. मोहम्मद शमी, ईशांत शर्मा और उमेश यादव ने अपनी अपनी उपयोगिता साबित की. पुणे टेस्ट के लिए विराट कोहली ने हनुमा विहारी को प्लेइंग 11 से बाहर बिठाकर उमेश यादव को मौका दिया. उमेश यादव ने 6 विकेट लेकर कप्तान के फैसले को सही साबित किया. विराट दरअसल अपने गेंदबाजों की उपलब्धि से सबसे ज्यादा खुश होंगे. क्योंकि उन्हें ‘बॉलिंग कैप्टेन’ कहा जाता है. बॉलिंग कैप्टेन यानि वो कप्तान जो अपने गेंदबाजों की ज्यादा फिक्र करता है.


कंधे से कंधा मिलाकर खेले स्पिनर और तेज गेंदबाज


दक्षिण अफ्रीका के खिलाड़ियों के लिए मुसीबत ये है कि वो तैयारी किसी और गेंदबाज को लेकर करते हैं और विकेट कोई और गेंदबाज ले लेता है. पहले टेस्ट मैच में ये बात देखने को मिली. पहली पारी में अश्विन ने सात विकेट लिए थे. दूसरी पारी में अफ्रीकी बल्लेबाज उनके खिलाफ सतर्क थे तो मोहम्मद शमी ने पांच विकेट झटक लिए. दरअसल, भारत में टेस्ट सीरीज को लेकर विदेशी बल्लेबाज स्पिन आक्रमण से ज्यादा सतर्क रहते हैं लेकिन इस सीरीज में तेज गेंदबाजों ने भी कंधे से कंधा मिलाकर गेंदबाजी की है. अब तक 16 विकेट तेज गेंदबाजों की झोली में आए हैं. ये आंकड़े निश्चित तौर पर विराट कोहली को मन ही मन खुशी दे रहे होंगे क्योंकि उन्हें तीसरे टेस्ट मैच में भी जीत की महक अभी से आने लगी है.

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