नेटफ्लिक्स की अपकमिंग फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ रिलीज से पहले ही भारी विवादों में घिर गई है. फिल्म के टाइटल को लेकर देशभर में विरोध देखने को मिल रहा है. विरोध करने वालों का आरोप है कि यह नाम जातिसूचक है और एक विशेष समुदाय की छवि को जानबूझकर अपमानित करता है. अब यह मामला सियासत और अदालत तक पहुंच गया है.

फिल्म के टाइटल पर बढ़ते विरोध के बीच बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी कड़ा रुख अपनाया है. मायावती ने शुक्रवार (6 फरवरी) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर फिल्म के टाइटल की कड़े शब्दों में निंदा की और केंद्र सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की.

मायावती ने अपने पोस्ट में लिखा, "यह बड़े दुख व चिन्ता की बात है कि पिछले कुछ समय से अकेले यूपी में ही नहीं बल्कि अब तो फिल्मों में भी ’पंडित’ को घुसपैठिया बताकर पूरे देश में जो इनका अपमान व अनादर किया जा रहा है तथा जिससे समूचे ब्राह्मण समाज में इस समय जबरदस्त रोष व्याप्त है, इसकी हमारी पार्टी भी कड़े शब्दों में निन्दा करती है. ऐसी इस जातिसूचक फिल्म पर केन्द्र सरकार को तुरन्त प्रतिबन्ध लगाना चाहिये, बीएसपी की यह मांग."

Continues below advertisement

Continues below advertisement

 

 

 

फिल्म के टाइटल को लेकर सोशल मीडिया पर भी जमकर बहस चल रही है. कई यूजर्स इसे धार्मिक और जातिगत भावनाओं पर हमला बता रहे हैं. उनका कहना है कि ‘पंडित’ जैसे शब्द को भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी से जोड़ना पूरे समुदाय को बदनाम करने जैसा है. वहीं कुछ लोग अभिव्यक्ति की आजादी की बात कर रहे हैं, लेकिन कुल मिलाकर विरोध करने वालों की आवाज ज्यादा तेज दिखाई दे रही है.

दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा मामला

इस विवाद ने अब कानूनी रूप भी ले लिया है. अधिवक्ता विनीत जिंदल ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर की है. याचिका में फिल्म की रिलीज पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है.

याचिका में कहा गया है कि ‘घूसखोर पंडित’ टाइटल ब्राह्मण समुदाय की गरिमा, प्रतिष्ठा और भावनाओं को ठेस पहुंचाता है और इसे जानबूझकर अपमानजनक तरीके से चुना गया है.

विनीत जिंदल का कहना है कि नेटफ्लिक्स ने इस फिल्म का प्रचार शुरू कर दिया है और ‘पंडित’ शब्द को सीधे तौर पर भ्रष्टाचार से जोड़कर दिखाया जा रहा है. उनके मुताबिक, इससे ब्राह्मण समाज की छवि को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचेगा और सामाजिक सद्भाव बिगड़ सकता है.

याचिका में यह भी कहा गया है कि फिल्म से सामूहिक मानहानि, हेट स्पीच और सांप्रदायिक तनाव पैदा होने का खतरा है. इसी आधार पर संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत कोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप और अंतरिम रोक की मांग की गई है.

नेटफ्लिक्स की चुप्पी

अब तक इस पूरे विवाद पर न तो नेटफ्लिक्स और न ही फिल्म के निर्माताओं की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है. ऐसे में सबकी निगाहें कोर्ट और केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं.