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दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने पीएम मोदी की डिग्री के बारे में जानकारी देने से इनकार क्यों किया?
क्योंकि डीयू ने जानकारी को गोपनीय रखा।
क्योंकि डीयू ने छात्रों की जानकारी सार्वजनिक करने पर रोक लगा दी थी।
क्योंकि डीयू ने तीसरे पक्ष से संबंधित जानकारी साझा न करने के नियमों का हवाला दिया।
क्योंकि डीयू को जानकारी देने के लिए सरकार से आदेश नहीं मिला था।
मुख्य सूचना आयोग (सीआईसी) ने डीयू को क्या आदेश दिया?
पीएम मोदी की डिग्री के रिकॉर्ड को नष्ट करने का आदेश दिया।
पीएम मोदी की डिग्री के बारे में जानकारी सार्वजनिक करने पर रोक लगाई।
डीयू को पीएम मोदी की डिग्री के रिकॉर्ड का निरीक्षण करने की अनुमति दी।
डीयू को पीएम मोदी की डिग्री के बारे में कोई जानकारी न देने का आदेश दिया।
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सीआईसी ने शैक्षिक योग्यताओं के बारे में क्या कहा?
किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति की शैक्षिक योग्यता को गुप्त रखा जाना चाहिए।
सार्वजनिक व्यक्तियों की शैक्षिक योग्यता को गोपनीय रखना चाहिए।
किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति, खासकर प्रधानमंत्री की शैक्षिक योग्यताएं पारदर्शी होनी चाहिए।
शैक्षिक योग्यताएं सार्वजनिक करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
हाई कोर्ट में यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व किसने किया?
मुख्य सूचना आयुक्त ने।
प्रधानमंत्री ने।
भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और उनकी कानूनी टीम ने।
दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति ने।
सॉलिसिटर जनरल ने डेटा जारी करने के खिलाफ क्या तर्क दिया?
उन्होंने कहा कि डेटा जारी करना अनावश्यक है।
उन्होंने कहा कि डेटा जारी करने से एक खतरनाक मिसाल कायम होगी, जिससे सरकारी अधिकारी प्रभावित होंगे।
उन्होंने कहा कि डेटा जारी करने से डीयू की प्रतिष्ठा को नुकसान होगा।
उन्होंने कोई तर्क नहीं दिया।
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