क्या होता है गोधूलि काल? जानें इसके महत्व के बारे में
सूर्यास्त होने से पहले जब गायों की घर वापसी हो रही होती है. उनके चलने से आकाश में धूल उठती है, वह समय मुहूर्तकारों ने गोधूलि काल कहा है.
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यह समय मांगलिक कार्याें के लिए श्रेष्ठ माना गया है. विवाहादि कार्य इस समय किया जाना श्रेष्ठ बताया गया है. गोधूलि काल लग्न के दोषों को दूर करता है. अष्टम भाव अर्थात् पाप भाव में गोचर कर रहे ग्रहों के कारण होने वाले अनिष्टों से मुक्त रखता है. साथ ही पात और जामित्रादि दोषों का नाश करता है.
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नो वा योगो न मृतिभवनं नैव जामित्र दोषो। गोधूलिः सा मुनिभिरुदिता सर्वकार्येषु शस्ता।।
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गोधूलि बेला संध्या काल के पूर्व की स्थिति है. इस समय आकाश में सूर्य की किरणें सुनहरी छटा बिखेर रही होती हैं. धूप की उपस्थिति बनी रहती है. इसे अपराह्न के तुरंत बाद की अवस्था भी कह सकते हैं.
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