Farmer's Protest Live Updates: तेज बारिश से गाजीपुर बॉर्डर पर भरा पानी, प्रदर्शनकारी किसान साफ करते दिखे
किसान आंदोलन का आज 39वां दिन है. प्रदर्शनकारी किसान देश की राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर जमे हुए हैं. अब अहम सवाल ये है कि क्या नए साल में 4 जनवरी को सरकार के साथ होने वाली अगले दौर की बातचीत के बाद आंदोलन खत्म हो जाएगा. किसान संगठनों ने बहरहाल 4 जनवरी तक आंदोलन तेज न करने का ऐलान किया है.
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केंद्र सरकार द्वारा लागू तीन कृषि कानूनों पर गतिरोध दूर करने को लेकर सरकार और किसान नेताओं के बीच बुधवार को हुई 7वें दौर की औपचारिक वार्ता सकारात्मक रही. जिसमें किसानों की दो मांगों पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी. अब नए साल में चार जनवरी को अगले दौर की वार्ता होगी, जिसमें बाकी दो मसलों तीनों कानूनों को रद्द करने की प्रक्रिया और फसलों के एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की गारंटी के मुद्दों पर चर्चा होगी.
राजस्थान हरियाणा की सीमा पर पुलिस ने किसानों पर पानी की बौछार की
ट्रैक्टर ट्रॉली में सवार होकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली जा रहे किसानों ने गुरुवार को राजस्थान सीमा पर शाहजहांपुर में पुलिस बैरिकैड तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया जिस पर हरियाणा पुलिस ने पानी की बौछारें व आंसू गैस के गोले दागकर उन्हें रोकने का प्रयास किया. पुलिस ने बताया कि करीब 25 ट्रैक्टर ट्रॉली पर सवार किसानों ने जहां हरियाणा पुलिस के बैकिकैड तोड़ दिए वहीं, अन्य किसान शाहजहांपुर-रेवाड़ी सीमा पर रुके रहे. केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ यहां धरना दे रहे किसानों ने कई दिनों से मार्ग भी अवरुद्ध कर रखा है. मौके पर धरना दे रहे किसान नेताओं ने यह स्पष्ट किया कि जो प्रदर्शनकारी बल पूर्वक हरियाणा में प्रवेश किये हैं उनके इस कदम को लेकर वे सहमत नहीं हैं.
किसान महापंचायत के अध्यक्ष रामपाल जाट ने बताया कि आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था लेकिन कुछ किसान बल पूर्वक हरियाणा में प्रवेश कर गए और इसकी उन्हें उम्मीद नहीं थी. हरियाणा पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि किसानों के एक समूह ने पुलिस के बैरिकेड को तोड़कर दिल्ली की तरफ बढ़ने का प्रयास किया. इनमें से अधिकतर युवा किसान थे.
पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया और उन पर पानी की बौछारें की तथा आंसू गैस के गोले छोड़े. पुलिस ने बताया कि किसानों के नेताओं ने भी उनसे दिल्ली नहीं जाने का आग्रह किया. किसानों के समूह ने ट्रैक्टर ट्रॉली के माध्यम से अवरोधकों को तोड़ दिया और उनमें से कुछ राज्य के क्षेत्र में प्रवेश कर गये हालांकि कुछ ही दूरी पर उन्हें रोक दिया गया.
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आज सुबह हुई बारिश से बुराड़ी के निरंकारी समागम ग्राउंड में जलभराव हो गया. यहां कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का विरोध प्रदर्शन चल रहा है. एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "बारिश से लंगर, टेंट में पानी चला गया और कपड़े भीग गए. लेकिन फिर भी किसानों के हौसले बुलंद हैं."
आम आदमी पार्टी (आप) के नवनियुक्त पंजाब सह-प्रभारी राघव चड्ढा ने पंजाब के मोगा में किसान आंदोलन में जान गंवाने वाले माखन खान और गुरबचन सिंह के घर जाकर इन परिवारों को आर्थिक सहायता दी. गुरबचन सिंह 3 दशकों से किसान यूनियन के सदस्य थे. पिछले दो महीने से वह एक कंपनी के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे. 30 नवंबर, 2020 को उनकी दुखद मृत्यु हो गई थी. माखन खान की मृत्यु 14 दिसंबर 2020 को सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन के दौरान हुई जहां वो 26 नवंबर से लगातार कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे.
गाजीपुर में उत्तरप्रदेश-दिल्ली सीमा पर नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे 75 साल के एक किसान ने शनिवार सुबह को कथित रूप से फांसी लगा ली. पुलिस ने बताया कि उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में बिलासपुर निवासी किसान सरदार कश्मीर सिंह ने सचल शौचालय में रस्सी से फांसी लगा ली. पुलिस ने बताया कि उनके पास से एक सुसाइड नोट मिला है जो गुरमुखी में लिखा गया है.
दिल्ली में सिंघु बॉर्डर के बाद अब टिकरी बॉर्डर पर भी आईटी सेल शुरू हो गया है. जमींदारा छात्र सभा नाम के संगठन ने इसका जिम्मा संभाला है. किसानों की आवाज और आंदोलन के रंग को दुनिया के सामने रखने की कोशिश है.
कल किसान की बैठक हुई और फैसला लिया गया कि बात नहीं बनेगी तो आंदोलन तेज करेंगे. किसान नेता दर्शन पाल ने कहा है कि 4 जनवरी को सरकार से बातचीत है. 5 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है. अगर हमारे पक्ष में बात नहीं बनी तो 6 जनवरी को कुंडली, मानेसर और पलवल हाईव पर ट्रैक्टर मार्च होगा. इसके 2-3 दिन के भीतर शाहजहांपुर मोर्चे को आगे लाएंगे. इसके बाद एक पखवाड़े तक देशभर में अलग-अलग कार्यक्रम के तहत प्रदर्शन करेंगे. 18 जनवरी को महिला किसान दिवस के रूप में मनाएंगे. 23 जनवरी को सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिन के मौके पर सभी राज्यों में राजभवनों पर मार्च करेंगे, 26 जनवरी को किसान ट्रैक्टर मार्च करेंगे.
किसानों के आंदोलन का आज 39वां दिन है. कड़ाके की ठंड में कृषि कानून रद्द करने की मांग को लेकर सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर डटे हुए हैं किसान. किसान किसान संगठनों ने रुख में सख्ती के संकेत दिए हैं कि 4 जनवरी की बैठक में हल नहीं निकला तो आंदोलन तेज करेंगे, हरियाणा के मॉल, पेट्रोल पंप बंद कराएंगे और 26 जनवरी को दिल्ली में निकालेंगे ट्रैक्टर मार्च करेंगे. 4 जनवरी को सरकार और किसान के बीच प्रस्तावित बैठक है.
कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने एक ट्वीट में कहा, "जैसे ही दिल्ली बॉर्डर पर किसानों के आंदोलन ने 38वें दिन में प्रवेश किया, एक और किसान ने अपनी जान गंवा दी. मैं किसानों के संकल्प को सलाम करता हूं. सरकार को कृषि कानूनों को लंबित रखते हुए पुनर्विचार के लिए सहमत होना चाहिए. किसी भी नए कानून में किसान समुदाय की जरूरतों और इच्छाओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए."
नए कृषि कानून के विरोध में चल रहे आंदोलन के दौरान शुक्रवार को गाजीपुर बॉर्डर पर उत्तर प्रदेश के बागपत जिला स्थित भागवनपुर नांगल गांव के एक किसान की मौत हो गई. किसान के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव भेज दिया गया है. दिवंगत गलतान सिंह करीब 57 साल के थे.
किसानों की सात सदस्यीय कमेटी आज दिल्ली प्रेस क्लब में मीडिया से बातचीत करेगी. किसानों ने कहा, अगली रणनीति का खुलासा किया जाएगा. पिछली बैठक में केंद्रीय मंत्रियों के साथ सेल्फी लेने वाले सिख नौजवान का विरोध हुआ. नेताओं ने कहा ऐसे लोग संघर्ष का हिस्सा नहीं. सरकार को एक किसान सेल्फी वाला नहीं मिलता. पिछली मीटिंग के दौरान एक ट्रांसपोर्ट भाई ने सेल्फी उतारी तो सरकार ने उसे ही वायरल कर दिया. यह हालत है सरकार की.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसानों ने कहा है कि बीजेपी और जेजेपी के विधायकों, सांसदों का गांव-गांव विरोध होगा और तक तक होगा जब तक हरियाणा में इन दोनों की सरकार गिर नहीं जाती.
किसानों का कहना है कि सरकार किसानों को हल्के में ले रही है. युवा किसान संयम खो रहा है. सरकार इस धरने को शाहीन बाग बनाने की कोशिश कर रही है. पहली और दूसरी मांग हमारी कृषि कानून और MSP गारंटी कानूनन बनाना है. तीसरी और चौथी मांग मानकर सरकार गुमराह कर रही है. सरकार बड़ी कामयाबी का दावा कर रही है लेकिन अभी पूछ निकली है हाथी बाकी है.
किसानों ने कहा कि अगर 4 जनवरी की बातचीत में परिणाम संतोषजनक ना निकला तो 6 जनवरी को मार्च होगा. वही मार्च जो 30 दिसंबर को रद्द हुआ था. राजस्थान के शाहजहांपुर बॉर्डर से किसान अगले हफ़्ते आगे बढ़ेंगे. 6 जनवरी से 20 जनवरी के बीच पूरे देश में किसान जन जागृति अभियान चलाएंगे. 23 जनवरी को नेता सुभाषचंद्र बोस की जयंती को किसान विशेष चेतना दिवस का आयोजन होगा. BJP नेताओं के खिलाफ देशभर में पार्टी छोड़ो अभियान चलाएंगे. पंजाब और हरियाणा के टोल आगे भी फ्री रहेंगे.
किसानों ने शुक्रवार शाम को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनका सबसे बड़ा मुद्दा कृषि कानून और MSP की कानूनन गारंटी है. उन्होंने कहा, सरकार तीसरी और चौथी मांग मानकर बर्फ पिघलने का बड़ा दावा कर रही है लेकिन सच्चाई यह है कि केंद्र सरकार ने MSP पर सैद्धांतिक कमिटमेंट देने से भी इनकार किया.
दिल्ली में नए साल के मौके पर भीषण शीत लहर के कहर और तापमान के 1.1 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचने के बाद भी दिल्ली से लगी सीमाओं पर किसानों का प्रदर्शन जारी है. हाड़ कंपाने वाली ठंड में पंजाब, हरियाणा सहित कई राज्यों के किसान दिल्ली से लगी सीमाओं पर पिछले एक महीने से केन्द्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. दिल्ली से लगी सीमाओं पर सुरक्षा कड़ी है जहां सिंघु, गाजीपुर और टिकरी बॉर्डर पर सैकड़ों सुरक्षा कर्मी तैनात हैं.
सिंघु बॉर्डर पर आज दोपहर 2 बजे किसानों की बैठक होगी. इस बैठक में सरकार से अगले दौर की बातचीत और आंदोलन को लेकर रणनीति पर चर्चा होगी. इसके बाद शाम पांच बजे किसान संगठनों के नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं.
कृषि कानूनों के खिलाफ सिंघु बॉर्डर पर किसानों का विरोध प्रदर्शन आज 37वें दिन भी जारी है. किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के सुखविंदर सिंह सभरा ने कहा, "तीन कृषि कानून रद्द होने चाहिए, अगर 4 जनवरी को इसका कोई हल नहीं निकलता तो आने वाले दिनों में संघर्ष तेज होगा."
कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के आंदोलन से खासकर पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के सीमावर्ती क्षेत्रों में आपूर्ति व्यवस्था बाधित होने से दिसंबर तिमाही में 70,000 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होगा। उद्योग मंडल पीएचडी चैंबर ऑफ कामर्स ने ये जानकारी दी.
किसान नेताओं ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानूनी गारंटी और नए कृषि कानूनों को रद्द करने का कोई विकल्प नहीं है. मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा के हजारों किसान राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं पर एक महीने से ज्यादा समय से प्रदर्शन कर रहे हैं. उनकी मांग है कि तीनों नए कृषि कानूनों को रद्द किया जाए.
संयुक्त किसान मोर्चा ने बिहार की राजधानी पटना में किसानों पर लाठीचार्ज को प्रदेश सरकार की असंवेदनशीलता बताई है. मोर्चा ने एक बयान में कहा कि पटना में प्रदर्शन कर रहे किसानों पर हए लाठीचार्ज की वह कड़े शब्दों में निंदा करता है. केंद्र सरकार द्वारा लागू नए कृषि कानूनों के विरोध में मंगलवार को पटना में प्रदर्शन कर रहे किसानों को रोकने के दौरान हुई झड़प में पुलिस ने लाठियां भांजी थी.