एयरपोर्ट जैसा दिखता है बेंगलुरु में बना भारत का पहला सेंट्रल एसी रेलवे टर्मिनल, जानें खासियत

4,200 वर्गमीटर में 314 करोड़ रुपए की लागत से बेंगलुरु में बना सर एम विश्वेश्वरैया रेलवे टर्मिनल की भव्यता आकर्षित करती है. रेल मंत्री पीयूष गोयल ने उद्घाटन के लिए तैयार इस रेलवे टर्मिनल की फोटो ट्विटर पर साझा की है. यह भारत का पहला केंद्रीयकृत वातानुकुलित रेलवे टर्मिनल होगा.

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बेंगलुरु में भारत के पहले केंद्रीयकृत वातानुकुलित रेलवे टर्मिनल का उद्घाटन के लिए तैयार है. केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने इसकी कुछ तस्वीरें साझा की हैं, जो काफी आकर्षक लग रहे हैं. भारत रत्न सर एम विश्वेश्वरैया के नाम पर बेंगलुरु शहर के बैयप्पनहल्ली क्षेत्र में स्थित यह रेलवे टर्मिनल अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है और हवाई अड्डे जैसी झलक पेश करती है.

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दक्षिण पश्चिम रेलवे ने पहले सूचित किया था कि यह टर्मिनल फरवरी के अंत तक तैयार हो जाएगा. इससे पहले टर्मिनल की तस्वीरों को प्रकाशित करते हुए रेल मंत्री ने ट्विटर पर कहा कि बेंगलुरु, कर्नाटक में आगामी सर एम विश्वेश्वरैया टर्मिनल की एक झलक देखें, जो अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है.

देश का पहला केंद्रीकृत एसी रेलवे टर्मिनल एक नजर में इस स्टेशन भवन का निर्माण 4,200 वर्गमीटर में 314 करोड़ रुपए की लागत से किया गया है. दो सब-वे के साथ एक फुट ओवरब्रिज सभी प्लेटफार्मों को एक-दूसरे से जोड़ेगा. टर्मिनल में आठ स्टेबल लाइन और तीन पिट लाइन के अलावा सात प्लेटफॉर्म हैं. हर दिन टर्मिनल से 50 ट्रेनों का संचालन किया जा सकता है. एस्केलेटर और लिफ्ट यात्रियों के आवागमन को सुविधाजनक बनाने के लिए सात प्लेटफार्मों को जोड़ेंगे.

हवाईअड्डे की तर्ज पर किया गया डिजाइन सर एम विश्वेश्वरैया टर्मिनल को बेंगलुरु हवाई अड्डे की तर्ज पर डिजाइन किया गया है. इसमें एक ऊपरी श्रेणी का प्रतीक्षालय, एक डिजिटल यात्री सूचना प्रणाली के साथ एक वीआईपी लाउंज और भव्य फूडकोर्ट बनाया गया है. इसमें 4 लाख लीटर क्षमता का अपना जल पुनर्चक्रण संयंत्र भी होगा. विशाल पार्किंग क्षेत्र में 250 कार, 900 दोपहिया, 50 ऑटोरिक्शा, पांच बीएमटीसी बसें और 20 टैक्सी पार्क किया जा सकता है.

वर्तमान में 164 जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेनें और 109 जोड़ी यात्री ट्रेनें केएसआर बेंगलुरु सिटी और यशवंतपुर टर्मिनलों से संचालित की जा रही हैं. इस नए टर्मिनल की मंजूरी 2015-16 में दी गई थी. उम्मीद की जा रही है कि यह दक्षिण-पश्चिम रेलवे को बेंगलुरु से और अधिक ट्रेनों के संचालन में मदद करेगी.

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