ट्रैक्टर परेड हिंसा की जांच तेज, फॉरेंसिंक की टीम ने आईटीओ से जुटाए सबूत

कल यानी शनिवार को एफएसएल की टीम लाल किले पहुंची थी. यहां उन्होंने खून के सैंपल, उंगलियों और पैरों के निशान लिए थे. रविवार को फॉरेंसिक टीम आईटीओ पहुंची और सबूत इकट्ठा किए.

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नई दिल्ली: 26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर परेड में हुई हिंसा की जांच तेज हो गई है. फॉरेंसिंक की टीम ने रविवार को सबूत जुटाए. फॉरेंसिक टीम ने आईटी और उसके आस-पास के जगहों से सबूट जुटाए. यहां ट्रैक्टर पलटने से एक आंदोलन कारी की मौत हुई थी.

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बता दें कि गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा के दौरान 394 सुरक्षाकर्मी घायल हो गए थे और आईटीओ के पास एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई थी. फोरेंसिक प्रयोगशाला का एक दल शनिवार को लाल किला और शुक्रवार को गाजीपुर प्रदर्शन स्थल गया था. पुलिस ने गुरुवार को किसान नेताओं के विरुद्ध ‘लुकआउट’ नोटिस जारी किया और हिंसा के पीछे की साजिश की जांच करने की घोषणा की.

शनिवार को लाल किले से उंगलियों के निशान, तोड़फोड़ के सबूत, पैरों के निशान और खून के सैंपल, इन सबको एफएसएल ने जमा किए. इन सबूतों के ज़रिए उन लोगों को पहचान की जाएगी, जो 26 जनवरी के दिन लाल किला हिंसा में शामिल थे. दिल्ली पुलिस अब इन सबूतों के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू करेगी. एफएसएल ने जो कुछ भी यहां जमा किया है, वो अदालत में आरोपियों के खिलाफ बेहद अहम सबूत साबित बन सकते हैं.

मोबाइल फॉरेंसिक टीम कई मौकों का जहां हिंसा हुई वहां का दौरा कर चुकी हैं, जिनमें गाजीपुर, नांगलोई, एनएच-10, नजफगढ़-नांगलोई रोड और लालकिला शामिल हैं. वहां से टायर मार्क के सैंपल उठाए गए. सरकारी संपत्ति और लालकिले में की गयी टूट-फुट की फोटोग्राफी करना, फिंगर प्रिंग इक्क्ठा करना आदि का काम हुआ. जिन-जिन रूट पर उपद्रवी गए वहां ट्रैफिक पुलिस, दिल्ली पुलिस, नेशनल हाईवे अथॉरिटी, पीडब्लूडी, एमसीडी, आरडब्ल्यूए और प्राइवेट लोग उनसे सीसीटीव कैमरे की फीड इक्क्ठा की जा रही है.

इन तमाम फुटेज से आरोपियों के चेहरे निकालने के लिए यानी उनकी पहचान के लिए नेशनल फॉरेंसिक लैब, गुजरात से 2 टीम दिल्ली पहुंच चुकी है. इनका काम वीडियो एनालिसिस करना है. ये टीम उन वीडियो में से फ़ोटो बनाएगी, फिर दिल्ली पुलिस उन्हें फेस रिकॉगनिशन में डाल कर देखेगी कि कही ये कोई क्रिमिनल (या फिर खालिस्तानी ग्रुप से जुड़ा व्यक्ति) तो नहीं था. अगर क्रिमिनल निकला तो उसका अलग से ट्रीटमेंट होगा. यानी कड़ी धारा लगाई जाएगी और जो किसान शामिल हुए उन पर भी कार्रवाई होगी.

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