सचिन पायलट के समर्थकों ने बुलाई महापंचायत, नहीं पहुंचे सीएम अशोक गहलोत

राहुल के दौरे के एक हफ्ते के भीतर सचिन गुट के एक विधायक वेद प्रकाश सोलंकी ने अपने विधानसभा क्षेत्र चाकसू के कोटखावदा में किसान महा पंचायत का आयोजन शुक्रवार को कर डाला. इस महा पंचायत में आस पास के ज़िलों के किसान बड़ी संख्या में जुटे.

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जयपुर: राजस्थान कांग्रेस में गुटबाज़ी थमने का नाम ही नहीं ले रही. राहुल गांधी के हाल के दो दिन के राजस्थान दौरे से पहले ये माना जा रहा था कि सुलह सफ़ाई के ज़रिए राजस्थान कांग्रेस के दो ख़ेमे अशोक गहलोत और सचिन पायलट को एक कर लिया जाएगा, लेकिन राहुल के दौरे से इन ख़ेमों की खाई घटने की बजाय बढ़ती दिख रही है. सचिन पायलट समर्थक राहुल गांधी के दौरे के वक्त सचिन को सार्वजनिक तौर पर दर किनार किए जाने से ख़ासे ख़फ़ा दिख रहे हैं. राहुल के श्री गंगानगर, हनुमानगढ़,अजमेर और नागौर के सार्वजनिक कार्यक्रमों में सचिन को पर्याप्त सम्मान नहीं मिला, तो सचिन ख़ेमा उखड़ गया. भीतरी गुटबाज़ी बढ़ी तो पायलट गुट ने किसान महा पंचायत के ज़रिए शक्ति प्रदर्शन का रास्ता पकड़ लिया.

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राहुल के दौरे के एक हफ्ते के भीतर सचिन गुट के एक विधायक वेद प्रकाश सोलंकी ने अपने विधानसभा क्षेत्र चाकसू के कोटखावदा में किसान महा पंचायत का आयोजन शुक्रवार को कर डाला. इस महा पंचायत में आस पास के ज़िलों के किसान बड़ी संख्या में जुटे. लेकिन ख़ास बात ये रही कि आमंत्रण के बावजूद राज्य के सीएम अशोक गहलोत और पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा इस कार्यक्रम में नहीं आए. मंच पर सिर्फ़ और सिर्फ़ सचिन समर्थक चेहरे नज़र आए.

गहलोत गुट का एक भी नेता इस कार्यक्रम में नहीं दिखा, जो इस बात का साफ़ संकेत माना जा सकता है कि खेमेबाज़ी चरम पर है. सभास्थल पर पायलट के बड़े-बड़े कटआउट लगे नज़र आए. मंच पर भी जो पोस्टर लगा, उसमें कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं की तस्वीर है. हालांकि, राहुल गांधी और पायलट की फोटो बड़ी है. जबकि गहलोत और डोटासरा की फोटो बीच में लगाई गई है.

माना जा सकता है कि पायलट अपने समर्थक विधायकों के इलाकों में केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ किसान महापंचायत कर रहे हैं. जो काफ़ी हद तक शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है. बगावत और फिर सुलह के बाद पायलट लगातार महापंचायत करके किसान आंदोलन में अपना स्पेस बनाने की रणनीति पर चल रहे हैं. कहा तो ये भी जा रहा है कि सचिन पायलट आगे भी किसान महापंचायतें जारी रखने वाले हैं, ताकि प्रदेश की राजनीति में फिर से अपनी जगह बना सकें.

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