क्या भारत भी खत्म कर दे मौत की सजा का प्रावधान ?

दुनिया के 142 देशों ने किसी भी तरीके से मौत की सजा का प्रावधान खत्म कर दिया है. मानवाधिकार संगठनों की हमेशा से यह मांग रही है कि भारत को भी इन 142 मुल्कों में शुमार होकर दुनिया के समक्ष अपना मानवीय चेहरा पेश करना चाहिये.

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नयी दिल्ली: आजाद भारत में पहली महिला शबनम को होने वाली फांसी को लेकर मानवाधिकार संगठनों ने फिर से यह बहस छेड़ दी है कि भारत को मौत की सजा का प्रावधान खत्म कर देना चाहिये. उनका तर्क है कि कई बार बेगुनाह भी इसका शिकार होते हैं. वैसे दुनिया के 195 देशों में से सिर्फ 53 मुल्क ऐसे हैं,जहां किसी जघन्य अपराध के लिए मौत की सजा दी जाती है जिसमें भारत भी शामिल है.

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दुनिया के 142 देशों ने किसी भी तरीके से मौत की सजा का प्रावधान खत्म कर दिया है. मानवाधिकार संगठनों की हमेशा से यह मांग रही है कि भारत को भी इन 142 मुल्कों में शुमार होकर दुनिया के समक्ष अपना मानवीय चेहरा पेश करना चाहिये.हाल में जिन देशों ने अपने यहां मौत की सजा का प्रावधान खत्म किया, उनमें मडागास्कर, बेनिन, गिनीया और बुर्किना फासो शामिल हैं.

चीन के बाद ईरान दुनिया में दूसरा ऐसा सबसे बड़ा देश है जहां पर फांसी की सजा दी जाती है. मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक ईरान में 2019 में 251 लोगों को मौत की सजा दी गई थी.चीन और उत्तर कोरिया अपने यहां दी जाने वाली मौत की सजा का न कोई रिकार्ड रखते हैं और न ही दुनिया को इस बारे में बताते हैं लेकिन एमनेस्टी का अनुमान है कि चीन में हर साल हजारों लोगों को मौत की सजा दी जाती है.

दुनिया के 53 देशों में भारत अकेला ऐसा मुल्क है जहां अब तक सबसे कम लोगों को फांसी के फंदे पर लटकाया गया. पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की बात की जाये, तो वहां की दंड संहिता में बलात्कार और नशीले पदार्थों की तस्करी समेत ऐसे 27 जुर्म शामिल हैं जिसके लिए मौत की सजा दी जाती है. साल 2018 में वहां 633 लोगों को फांसी की सजा दी गई और माना जाता है कि हर साल वहां अमूमन पांच सौ से ज्यादा लोगों को मौत के घाट उतारा जाता है.

एमनेस्टी के रिकॉर्ड के मुताबिक 2019 में दुनिया के 20 देशों में कुल 657 लोगों को मौत की सजा दी गई जो 2018 के मुकाबले पांच फीसदी कम थी.पिछले एक दशक में यह सबसे कम आंकड़ा था. वहीं अगर फांसी की सजा सुनाए जाने के आंकड़ों पर गौर करें,तो 2019 में 53 देशों में यह संख्या 2307 थी,जबकि 2018 में यह 2531 थी.चीन और उत्तर कोरिया को छोड़ दिया जाए तो दुनिया भर में जितने लोगों को मौत की सजा दी जाती है,उसका 90 फीसदी हिस्सा सिर्फ चार मुल्कों ईरान,इराक,पाकिस्तान और सऊदी अरब का होता है. पूरे यूरोप में अकेला बेलारुस ऐसा देश है जिसने मौत की सजा के प्रावधान को खत्म नहीं किया है.

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