मॉडल बिल्डर-बायर एग्रीमेंट बनाने पर अगले हफ्ते सुनवाई करेगा SC, मकान खरीदारों को ठगी से बचाने के लिए की गई है मांग

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मकान के लिए एडवांस देते समय बिल्डर एक लंबा-चौड़ा एग्रीमेंट खरीदार के सामने रख देते हैं. कई पन्नों के इस एग्रीमेंट को पढ़ना और समझ पाना खरीदार के लिए संभव नहीं होता.

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मकान खरीदारों और बिल्डरों के लिए पूरे देश में एक मॉडल बिल्डर-बायर एग्रीमेंट लागू करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 1 हफ्ता टल गई है. कोर्ट ने सोमवार को कहा कि 20 राज्यों ने अपने यहां ऐसे एग्रीमेंट बनाए हैं. यह देखना होगा कि क्या केंद्र अपनी तरफ से कोई मॉडल बना सकता है.

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इस मसले पर कोर्ट में बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय के अलावा कर्नाटक के रहने वाले जिम थॉमसन, नागार्जुना रेड्डी, तरुण गेरा समेत कुल 125 लोगों ने याचिका दखिल की है. कर्नाटक के याचिकाकर्ता अलग-अलग बिल्डरों से परेशान हैं. जबकि अश्विनी उपाध्याय ने पूरे देश की समस्या याचिका में उठाई है. सभी याचिकाओं में मांग की गई है कि कोर्ट केंद्र को मॉडल बिल्डर-बायर एग्रीमेंट बनाने को कहे.

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मकान के लिए एडवांस देते समय बिल्डर एक लंबा-चौड़ा एग्रीमेंट खरीदार के सामने रख देते हैं. कई पन्नों के इस एग्रीमेंट को पढ़ना और समझ पाना खरीदार के लिए संभव नहीं होता. वह मजबूरन उस पर दस्तखत कर देता है. एग्रीमेंट की शर्तें पूरी तरह बिल्डर की तरफ झुकी होती हैं. बाद में मकान पाने में देरी या दूसरी दिक्कतों पर खरीदार कानूनी कार्रवाई भी नहीं कर पाता.

याचिकाओं में बताया गया है कि इस समय होने वाले ज़्यादातर एग्रीमेंट में खरीदार को किश्त न चुकाने पर 18 प्रतिशत की दर से ब्याज देना पड़ता है. पर बिल्डर फ्लैट देने में देरी करे तो वह बस 5 रुपए प्रति वर्ग गज की दर से मुआवजा देता है. मकान खरीदारों से और कई तरह से गैर-जरूरी पैसे ले लिए जाते हैं. 2016 में केंद्र ने मकान निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए रेरा एक्ट बनाया. उस एक्ट में दिए गए अधिकारों की रक्षा के लिए उसे मॉडल बिल्डर-बायर एग्रीमेंट भी बनाना चाहिए.

आज चीफ जस्टिस एस के बोबड़े, जस्टिस ए एस बोपन्ना और वी रामसुब्रमण्यम की बेंच के सामने मामला लगा. जजों ने याचिकाओं में लिखी गई बातों का हवाला देते हुए कहा कि कई राज्यों ने अपने यहां पहले से मॉडल एग्रीमेंट बना रखे हैं. इस पर एक याचिकाकर्ता के लिए पेश वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि अलग राज्यों में अलग नियम से खरीदारों का नुकसान है. कई बार बिल्डर एक राज्य के प्रोजेक्ट के लिए पैसे दूसरे राज्य के प्रोजेक्ट में लगा देते हैं. दो राज्यों के नियमों में अंतर से मामला कानूनी तौर पर उलझ जाता है.

वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने भी कहा कि यही उचित होगा कि केंद्र एक प्रारूप तैयार करे, जिसे राज्य अपने यहां लागू कर लें. कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को आज राज्यों की तरफ से बने मॉडल एग्रीमेंट का अध्ययन करने के लिए कहा. इसका समय देते हुए सुनवाई 1 सप्ताह के लिए टाल दी गई है.

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