पंजाब निकाय चुनाव: कृषि कानूनों पर विरोध के बीच बीजेपी को बड़ा झटका, कांग्रेस ने एकतरफा जीत दर्ज की

नए कृषि कानून पारित होने के बाद पंजाब में हुए नगर निकाय चुनावों में जहां कांग्रेस ने शानदार जीत हासिल की है वहीं, बीजेपी और अकाली दल के करारा झटका लगा है. इस चुनाव को अगले साल राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव के सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा है. चुनाव परिणामों ने राज्य में बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

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नई दिल्ली: केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसानों के आंदोलन के बीच पंजाब में हुए नगर निकाय चुनावों में कांग्रेस ने भारी जीत दर्ज की है. कांग्रेस ने 2165 वार्ड में से 1399 में और 8 नगर निगम में से 6 में जीत हासिल की है, जबकि मोहाली नगर निगम का परिणाम वीरवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया है.

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भाजपा को आशा थी कि वह शहरी क्षेत्रों अच्छा प्रदर्शन करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. अकाली दल से अलग होने के बाद भाजपा ने पठानकोट, सुजानपुर, बटाला और अबोहर जैसे गढ़ खो दिए और केवल 49 वार्ड में ही जीत दर्ज कर सकी. 329 वार्डों से जीतने वाले निर्दलीय, कांग्रेस के बाद दूसरे स्थान पर रहे.

कांग्रेस ने नगरपालिका परिषदों में 1815 वार्ड में से 1128 और 350 नगर निगम सीटों में से 271 पर जीत हासिल की. अकाली दल क्रमशः 252 और 33 पर, भाजपा 29 और 20 पर और आप 53 और 9 सीटों पर जीत हासिल करने में सफल रहे. बीएसपी (के) और सीपीआई ने 13 और 12 वार्ड में जीत दर्ज की. बता दें कि 8 नगर निगम और 109 नगर परिषदों और नगर पंचायतों के लिए 14 फरवरी को हुए मतदान हुए थे. नए कृषि कानून पारित किए जाने के बाद राज्य में यह पहला चुनाव था.

ध्वस्त हुआ अकाली दल का गढ़ इन चुनावों को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा है. चुनाव परिणाण आने के बाद पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुनील कुमार जाखड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने साबित किया है कि वह एकमात्र कैप्टन हैं, जो अशांत पानी में राज्य के जहाज को चला सकते हैं.

कांग्रेस के लिए सबसे खुशी की बात यह है कि उसने 53 सालों में पहली बार बठिंडा नगर निगम में जीत हासिल की है. बठिंडा में पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का पैतृक गांव है. यह क्षेत्र अकाली दल का गढ़ माना जाता है, लेकिन इस बार कांग्रेस ने अकाली दल के अरमानों पर पानी फेर दिया है.

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