भाजपा और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का विरोध करने वाली 15 पार्टियों को पटना में इकट्ठा हुए मुश्किल से एक सप्ताह ही हुआ था कि इनमें से शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) दो जुलाई को टूट गयी. शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने संकटमोचक माने जाने वाले प्रफुल्ल पटेल और पूर्व मंत्री छगन भुजबल जैसे दिग्गजों के साथ मिलकर बीजेपी से हाथ मिला लिया.