किसानों के मुद्दे पर विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष में जमकर तकरार, हंगामे के बीच कई बार स्थगित हुआ सदन

यूपी विधानसभा में विपक्ष ने दूसरे दिन भी हंगामा किया. नये कृषि कानून पर विपक्ष ने सरकार को घेरा. वहीं, जबरदस्त हंगामे के चलते सदन को भी कई बार स्थगित करना पड़ा.

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लखनऊ: विधानसभा सत्र के दूसरे दिन भी दोनों सदन में जबरदस्त हंगामा हुआ. विधानसभा का सदन शुरू होते ही नेता विरोधी दल समाजवादी पार्टी के राम गोविंद चौधरी ने किसानों का मुद्दा उठाया. उन्होंने सदन में कहा कि, जो किसान इस आंदोलन में शहीद हुए हैं, उन्हें सरकार शहीद का दर्जा दे. वहीं, इस पर संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा ये लोग किसानों के दुश्मन हैं. दोनों के बीच तीखी नोक झोंक हुई. जिसके बाद सदन की कार्यवाही को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया.

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करीब 1 घंटे 12 मिनट बाद जब दोबारा सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो, नेता प्रतिपक्ष ने फिर किसानों के मामले पर चर्चा की मांग की. बसपा विधानमंडल दल के नेता लालजी वर्मा ने भी किसानों के मुद्दे पर चर्चा की मांग की. हालांकि निधन के निर्देश के साथ विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई. सीएम योगी ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, प्रदेश के पूर्व राज्यपाल मोती लाल बोरा समेत अन्य दिवंगत पूर्व सदस्यों, कोरोना काल में जान गंवाने वाले कोरोना वारियर्स और उत्तराखंड त्रासदी में मारे जाने वालों को श्रद्धांजलि दी. अन्य दलों के नेताओं ने भी शोक प्रस्ताव पढ़ा.

किसानों के मुद्दे पर विपक्ष हमलावर

इसके बाद एक बार फिर से रामगोविंद चौधरी ने तीनों कृषि कानून वापस लेने का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकार कानून बनाये कि, सरकारी एजेंसी हो या निजी उससे कम पर खरीद की गई तो कार्रवाई होगी. उन्होंने कहा मुख्यमंत्री प्रदेश में धान की खरीद की जांच करा लें, सब पता चल जाएगा. रामगोविंद चौधरी के बाद बसपा नेता दल लालजी वर्मा ने किसानों के साथ ही पेट्रोल, डीजल, बिजली की महंगाई का मुद्दा उठाया.

सीएम ने दिया जवाब

इसके बाद खुद सीएम योगी ने सदन में विपक्षियों को जवाब देना शुरु किया. सीएम योगी ने कहा की विपक्ष को किसानों से लेना देना नहीं है. सिर्फ राजनीतिक चश्मे से देखते हैं. 2014 तक यही होता रहा है. 2018 में प्रदेश सरकार ने गन्ना मूल्य में वृद्धि की. जब सब चीनी मिलें बंद हुई तो प्रदेश 119 का संचालन कर रहा था. अन्नदाता किसानों को धोखा देकर दलाली करने वाले इसलिए चिंतित क्योंकि पैसा सीधे उनके खातों में जा रहा. इसमे सद्भावना नहीं दुर्भावना है.

सपा-कांग्रेस ने किया सदन से किया वॉकआउट

सीएम के भाषण के दौरान ही सपा और कांग्रस ने सदन से वॉकआउट कर दिया. वॉकआउट के बाद रामगोविंद चौधरी ने कहा कि, 200 से अधिक किसान शहीद हो चुके हैं. अन्नदाता हैं किसान जो सबका पेट भरता है. हम उनके मुद्दे पर चर्चा चाहते थे लेकिन ऐसा नहीं होने दिया गया. हमारी मांग की कृषि कानून वापस हो, किसानों पर दर्ज सभी FIR वापस हो. अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा किसानों के साथ लाठी खाने और जेल जाने को भी तैयार है. कांग्रेस विधायक मसूद अख्तर ने कहा कि, किसानों के मुद्दे को लेकर हमने सदन में बात रखी थी. गन्ना किसानों को लेकर लोगों ने आवाज उठाई है, खाद और बिजली के दाम में बढ़ोतरी हुई है. सरकार की कथनी और करनी में बहुत बड़ा अंतर है. हम लोगों ने इस बात की मांग की, कि सदन की कार्यवाही को रोककर चर्चा कराई जाए. उन्होंने कहा कि, सरकार किसानों और बेरोजगारों के प्रति असंवेदनशील है, इसलिए कांग्रेस ने वॉकआउट किया.

प्रोटेम स्पीकर पर विवाद

विधानसभा के साथ ही विधान परिषद में भी हंगामा देखने को मिला. परिषद में सपा और कांग्रेस ने प्रोटेम स्पीकर के खिलाफ मोर्चा खोला. जिसके चलते यहां भी सदन कुछ समय के लिए स्थगित करना पड़ा. सपा एमएलसी सुनील सिंह साजन ने कहा विधानपरिषद में सपा का बहुमत है. 1956 के नियम 143 के अंतर्गत नोटिस दी थी कि, प्रोटेम स्पीकर का काम शपथ दिलाने के साथ खत्म हुआ. प्रोटेम स्पीकर सदन नहीं चला सकते. हम चाहते हैं कि चुनाव कराया जाए. कांग्रेस एमएलसी दीपक सिंह ने कहा कि हमारे यहां कई बार प्रोटेम स्पीकर बनाये गए लेकिन सभी दलों की सहमति से. कभी किसी को आपत्ति नहीं रही, लेकिन भाजपा अपने हिसाब से सब थोपना चाहती.

हालांकि, प्रोटेम स्पीकर मामले पर समाजवादी पार्टी की याचिका खारिज कर दी गयी. गवर्नर द्वारा नियुक्त किये जाने का हवाला दिया गया. सपा का कहना है कि सरकार नियमों के तहत नहीं चल रही है. समाजवादी पार्टी अन्य विकल्पों पर विचार कर रही है.

विधानसभा का सत्र अब 22 फरवरी को चलेगा. इस दिन योगी सरकार अपना बजट पेश करेगी. ये योगी सरकार के वर्तमान कार्यकाल के आखिरी बजट होगा. विपक्ष बजट के मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है.

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