अखिलेश यादव का सीएम योगी पर हमला, कहा- 'मुख्यमंत्री बता दें डीएनए का मतलब क्या है'
यूपी विधानसभा के सत्र के दौरान विपक्ष लगातार हंगामा कर रहा है. वहीं, सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार तकरार सामने आ रही है. इस बीच सपा मुखिया अखिलेश यादव ने सीएम योगी को घेरा है.
लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा है. मौजूदा विधानसभा सत्र के दौरान उन्होंने सीएम के बयान को लेकर हमला किया है. सपा मुखिया ने कहा कि सदन में मुख्यमंत्री को इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिये. अखिलेश यादव ने कहा कि, वे कहते हैं, इनके (विरोधियों) डीएनए में विभाजन है. अखिलेश यही नहीं रुके, उन्होंने कहा कि, अगर वे डीएनए का फुल फार्म बता दें, तो हम जान जाएंगे.
वहीं, सीएम योगी पर हमला जारी रखते हुये अखिलेश ने कहा कि, कम से कम वे साफ कर दें कि डीएनए है क्या? आपको बता दें कि, उत्तर प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है. वहीं, विपक्ष किसान, महंगाई समेत तमाम मुद्दों पर सरकार पर हमलावर है. सत्र के दौरान विपक्ष लगातार हंगामा कर रहा है, जिसके चलते सदन बाधित हो रहा है.
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किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरा
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने शनिवार को कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के रहने वाले नही हैं, वह दूसरे प्रदेश से आये हैं लेकिन फिर भी यहां की जनता ने उन्हें स्वीकार किया है और प्रदेश की जनता को उन्हें धन्यवाद देना चाहिये.
अखिलेश ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि ‘अन्नदाता की खुशहाली दलालों को रास नहीं आ रही है, इतना बड़ा धोखा और इतना बड़ा झूठ, कोई सदन में बोल सकता है, मैं उनसे जानना चाहता हूं कि उनकी सरकार ने कितने किसानों को धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलवा पायी है .’’
कितना एमएसपी दिया गया..
उन्होंने कहा, ‘‘मैं उनसे जानना चाहता हूं कि क्या उनकी सरकार गोरखपुर, महराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, संतकबीर नगर, बस्ती, गोंडा और फैजाबाद जिलों में किसानों को क्या धान की एमएसपी दिला पायी है, किसी जिले में किसानों को दिला पाये हैं. पूरे यूपी में किस किस किसान को कितना एमएसपी दिया गया है, हम जानना चाहते हैं कि धान की क्या कीमत दी है आपने.'
गौरतलब है कि शुक्रवार को विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था, ‘‘अन्नदाता किसान को धोखा देकर 'दलाली' करने वाले लोग आज जरूर इस बात को लेकर चिंतित हैं कि पैसा सीधे उनके (किसानों) खातों में क्यों जा रहा है. आज तो पर्ची भी किसानों के स्मार्ट फोन पर प्राप्त हो रही है. घोषित 'दलाली' का जो जरिया था वह भी समाप्त हो गया है.'
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