समाज के लिये मिसाल बनी अयोध्या की अनोखी शादी, रुढ़िवादी बंधन तोड़कर हुआ एक विवाह

समाज में रहने के लिये तमाम ऐसे नियम हैं, जो इस ताने बाने को चलाने के लिये बनाये गये हैं. इस बीच अयोध्या के नंदीग्राम में भरतकुंड की शादी का जिक्र हर किसी की जुबां पर है.

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अयोध्या: अयोध्या में रुढ़िवादिता को दरकिनार कर एर अनोखा विवाह हुआ है. नंदीग्राम में हुई यह शादी अपने आप में एक मिसाल बन गई है. यहां एक युवक ने किन्नर को अपना जीवन साथी चुनकर एक नई लकीर खींच दी है. इन दोनों की मानें तो वे एक दूसरे को बेहद चाहते हैं और एक दूसरे के बिना वे नहीं रह सकते.

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एक दूसरे से करते हैं बेइंतहा प्यार

सुर्ख जोड़े में दुल्हन अंजली सिंह थर्ड जेंडर यानि किन्नर हैं और उनके दूल्हे का नाम शिव कुमार वर्मा है और इन दोनों ने अब एक साथ जीने-मरने की कसमें खाई हैं. यह दोनों ही उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जनपद के रहने वाले हैं, लेकिन पिछले डेढ़ वर्षों से एक दूसरे से प्यार करते हैं और प्यार की इंतहा यह कि कई महीनों से एक दूसरे के साथ भी रह रहे हैं. एक दूसरे की हकीकत से परिचित भी है, लेकिन यही तो प्यार है और प्यार के सहारे विश्वास की डोर में बंधकर इन्होंने जीवन भर एक दूसरे के साथ हंसी खुशी के साथ रहने और कभी एक दूसरे का साथ ना छोड़ने की शपथ लेकर एक दूसरे को जयमाल पहनाया और वैदिक रीति रिवाज से मंत्रोचार के बीच विधिवत शादी की. दोनों कहते हैं कि, वह एक दूसरे के बिना नहीं रह सकते, इसीलिए कोई बच्चा गोद ले लेंगे और जीवन भर सुखमय जीवन व्यतीत करेंगे.

भरतकुंड का विशेष महत्व 

अपनी शादी के लिए इन्होंने अपने गृह स्थान से लगभग 100 किलोमीटर दूर अयोध्या के भरतकुंड स्थित जिस स्थान का चयन किया, वह स्थान अयोध्या के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखता है. यह वही स्थान है, जहां राम लक्ष्मण और सीता के वन जाने के बाद भरत ने राजगद्दी त्याग कर श्री राम की खड़ाऊ रखकर 14 वर्ष तक अयोध्या का राज्य चलाया था. लंका विजय के बाद श्री राम के अयोध्या वापस आने की खबर भी हनुमान जी के जरिए भरत को यहीं मिली थी और इसी के बाद अयोध्या वासी श्री राम माता सीता और लक्ष्मण के स्वागत में जुट गए थे.

साथ रहने का लिया फैसला 

अंजली सिंह ( किन्नर दुल्हन) ने बताया कि, हम लोग एक साथ रहना चाहते थे. हम इनके बिना नहीं जी सकते और यह हमारे बिना नहीं जी सकते और हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं. हम लोग हिंदू हैं, इसलिए हिंदू धर्म से हमने भरतकुंड नंदीग्राम में शादी की है.

वहीं, शिव कुमार वर्मा ( दूल्हा ) का कहना है कि, हम लोग डेढ़ साल से साथ रह रहे थे, हम को भली-भांति पता था कि, यह किन्नर है, फिर भी हम लोगों को लगा कि, हम इनके बिना नहीं रह सकते और यह हमारे बिना नहीं रह सकते. हमें लगा कि हम एक साथ रहेंगे तो जीवन सुख में होगा. हम लोगों ने निर्णय लिया कि अगर हम शादी करेंगे और बच्चा गोद ले लेते हैं तो जीवन सफल बनाएंगे.

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