डैमेज कंट्रोल करने बसवार गांव पहुंची 'सरकार', निषादों को दिया मदद का भरोसा, जानें- अंदर की बात

सिद्धार्थनाथ सिंह और रीता बहुगुणा जोशी रविवार को प्रयागराज के बसवार गांव पहुंचे और चौपाल लगाई. इस दौरान बीजेपी नेताओं ने विपक्षी पार्टियों पर भी जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि सरकार निषादों के साथ है.

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प्रयागराज: संगम नगरी प्रयागराज का बसवार गांव इन दिनों सियासत का अखाड़ा बना हुआ है. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के चौपाल लगाने और पीड़ित निषादों को 10 लाख रुपये की आर्थिक मदद मुहैया कराने के बाद अब योगी सरकार खुद निषादों के बीच पहुंची है. योगी के कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह और सांसद रीता बहुगुणा जोशी की मौजूदगी में पुलिस और प्रशासन के बड़े अफसरों ने रविवार को बसवार गांव जाकर चौपाल लगाई.

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मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश मंत्री, सांसद और अफसरों ने पीड़ितों की समस्याएं सुनीं और उन्हें हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया. 4 फरवरी को पुलिस की तरफ से की गई पिटाई और तोड़फोड़ के मामले की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए गए. जांच पूरी करने के लिए 10 दिनों की मियाद तय की गई. मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने एडीजी से उत्पीड़न करने वाले पुलिस कर्मियों की पहचान कर उन्हें लाइन हाजिर करने और दूसरी तरह की कार्रवाइयां करने के भी आदेश दिए. उन्होंने हाइवे से गांव तक की करीब पांच किलोमीटर की सड़क की मरम्मत कराकर उसे ठीक कराए जाने के आदेश दिए. उन्होंने पीड़ितों को ये भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि सरकार पूरी तरह उनके साथ हैं. उन्हें जो भी जरूरत होगी, वो मुहैया कराई जाएगी.

सियासी मरहम लगाने की कोशिश हालांकि, गांव के लोग सरकारी नुमाइंदों के वायदों से बहुत ज्यादा संतुष्ट नहीं हुए और सवाल पर सवाल उठाते रहे. माना जा रहा है कि प्रियंका गांधी की तरफ से इस गांव में आकर चौपाल लगाने और सपा मुखिया अखिलेश यादव के जरिए पीड़ित नाविकों को सरकार आने पर नई नावें मुहैया कराने के एलान के बाद सरकार बैकफुट पर आ गई है. उसने डैमेज कंट्रोल के लिए तीन हफ्ते बाद रविवार को सियासी मरहम लगाने की कोशिश की है.

विपक्षी पार्टियों पर साधा निशाना सिद्धार्थनाथ सिंह और रीता जोशी ने इस मौके पर विपक्षी पार्टियों पर भी जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि एनजीटी के नियम वाकई ठीक नहीं हैं, लेकिन इसके लिए पिछली यूपीए सरकार जिम्मेदार है. प्रियंका गांधी की मां सोनिया गांधी के दखल पर ही मनमोहन सरकार ने एनजीटी के कानून बनाए थे. नेताओं ने विपक्षी पार्टियों की हमदर्दी को सियासी नौटंकी बताने की कोशिश की.

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