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महाराष्ट्र में करीब 250 शिक्षक सिस्टम की लापरवाही की सजा भुगत रहे हैं. पहले उनका चयन बीएमसी के स्कूलों में पढ़ाने के लिए हो गया, फिर बीएमसी ने कह दिया कि वो स्कूलों में पढ़ाने के योग्य नहीं है क्योंकि उनकी प्राइमरी शिक्षा मराठी में हुई. सवाल है कि बीएमसी को ये तब क्यों नहीं पता चला जब उन्होंने इन शिक्षकों के आवेदन स्वीकार किए ?