कहते हैं कि मां-बाप जिंदगी भर औलाद की खुशियों के लिए जीते हैं. उनके भविष्य के लिए पूंजि बनाते हैं, लेकिन अगर चंद रुपयों के लिए मां-बाप ही अपनी औलाद का कत्ल कर दें, तो फिर बाकी रिश्तों की क्या अहमियत रह जाएगी. लखनऊ में कुछ ऐसा ही हुआ है.