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करीब 84 दिनों से हज़ारों-लाखों किसान दिल्ली के बॉर्डर पर जमे हुए हैं...उनकी मांग है तीन कृषि क़ानूनों को रद्द करने की...किसानों का नेतृत्व जो लोग कर रहे हैं, वो कहते हैं कि ये आंदोलन गैर-राजनीतिक है यानी राजनीति से इसका कोई लेना-देना नहीं है...राकेश टिकैत तो ये भी कहते हैं कि हमारा विरोध बीजेपी नहीं बल्कि सरकार से है...लेकिन ख़ुद को राजनीति से दूर बताते-बताते यही किसान नेता अब राजनीति में भी उतरने की तैयारी कर रहे हैं...