ममता बनर्जी पर हुए कथित हमले की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. कैसे कुछ मुट्ठी भर लोग सीएम के काफ़िले में घुस सकते हैं? कैसे हज़ारों की भीड़ में मुख्यमंत्री को चोट पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं? सवाल ये भी है कि हमला करते वक़्त का कोई वीडियो या तस्वीर क्यों नहीं है? अगर साज़िश की बात वाकई सही है तो क्या इस घटना से बंगाल की क़ानून-व्यवस्था पर जो आरोप लग रहे थे, क्या वो सही साबित नहीं होते? सवाल ये भी है कि जो तृणमूल कांग्रेस 8 चरणों में चुनाव पर सवाल उठा रही थी, वो क्या अब इस बात को मानेगी कि बंगाल में इतने चरणों में चुनाव कराने का फैसला सही था?