एबीपी गंगा के खास शो 'माहौल क्या है' में आज बात, उस ऐतिहासिक घटना की. जिसे इतिहास में याद तो रखा गया है, लेकिन उस घटना में जान न्यौछावर करने वाले आजादी के परवानों को भुला दिया गया. ये घटना थी 4 फरवरी 1922 को हुई चौरी-चौरा की. चौरी चौरा की घटना को 100 साल पूरे हो चुके हैं और अब सरकार ने उन शहीदों को याद किया है. जिनके लहू से देश में क्रांति की नई मिसाल जली थी, लेकिन आजादी के बाद उन शहीदों को भुला दिया गया था.
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