चीन ने पूरे 9 महीने बाद ये तो कबूल किया कि गलवान में हुई झड़प में उसके सैनिक मारे गए थे.. लेकिन कितने सैनिक मारे गए और उन्हें गुमनाम क्यों बना दिया गया, इसका कोई जवाब नहीं दिया है. बस इतना ही बताया कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अध्यक्षता वाली चीन की सेना की सबसे बड़ी कमेटी ने गलवान में मारे गए चार सैनिकों को तमगे दिए हैं. अब जरा सोचिए कि जिन सैनिकों का अंतिम संस्कार भी गुपचुप ढंग से किया गया, उन्हें अब मेडल और तमगे देने की जरुरत क्यों हुई? आखिर क्यों LAC पर डिसइंगेजमेंट शुरू होते ही चीन सरकार को गलवान में मारे गए सैनिकों की याद आ गई.
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