अब बात जिंदगी की उस जंग की. जिसे एक दिव्यांग लड़ रहा है. ये जंग है खुद को जिंदा साबित करने की. असल जिंदगी के इस काले सच को कई बार सिनेमाई पर्दे पर भी उकेरा गया है लेकिन जब पर्दे की कहानी असल रूप में सामने आती है तो डर लगने लगता है क्योंकि जो कन्नौज में एक दिव्यांग के साथ हुआ वो किसी के भी साथ हो सकता है.