बता सियासत के सुहेलदेव अध्याय की, जो उत्तर प्रदेश की राजनीति में पहली बार शुरू हुआ है. सियासत में इसके अपने-अपने माइने है, क्योंकि इस अध्याय को जिसने पढ़ लिया, वो पूर्वांचल में पास हो जाएगा. हालांकि इस अध्याय के दावेदारों की लिस्ट बहुत लंबी है और सबके अपने दावे हैं. वो अलग बात है कि एक हजार साल पुराने इस अध्याय को आजादी के 70 सालों में याद किसी ने नहीं किया और जब किया है तो सियासत गरम हो गई है. क्या है ये अध्याय और क्यों पूर्वांचल का गणित इस अध्याय के सूत्र से सुलझेगा. देखिए ये रिपोर्ट.
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