आज किसान आंदोलन को 100 दिन हो गए हैं, लेकिन बात वहीं अटकी है जहां पहले दिन थी और किसानों की तैयारी देखकर इतना तो तय है कि किसान आंदोलन की पिच पर जिद का ये मैच काफी लंबा चलने वाला है. इन 100 दिनों में किसान आंदोलन के कई रंग देखने को मिले, ना तो किसान मानने को तैयार हुए और ना ही सरकार झुकी, लेकिन सियासतदानों की सियासी फसल की बंपर पैदावार देखने को मिली और इस पैदावार को जनता को बेचकर राजनेता वोट की शक्ल में 2022 में सत्ता का मुनाफा कमाने की कोशिश में जुटे हुए हैं. ऐसे में उत्तर मांग रहा है प्रदेश कि 100 दिन के आंदोलन में फायदे में कौन रहा किसान या नेता.
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