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टी गार्डन लेबर पर क्यों भिड़े PM मोदी- प्रियंका गांधी, क्यों जरूरी है असम की चाय?
असम में कांग्रेस की दोबारा सत्ता वापसी कराने में जी-जान से जुटी प्रियंका गांधी वाड्रा का जादू किस हद तक चलेगा यह तो दो मई को ही पता चलेगा लेकिन इतना तय है कि वे मतदाताओं से संवाद स्थापित करने में अपने भाई से दो कदम आगे ही हैं. अपने दो दिन के चुनावी प्रचार में प्रियंका ने राजनीतिक मुद्दों के साथ ही धर्म, संस्कृति, लोक परंपरा जैसे तमाम पहलुओं को छूते हुए वहां के लोगों का दिल जीतने की भरसक कोशिश की है. सुरक्षा व शर्म की परवाह किये बगैर लोगों के बीच जाकर उनमें घुल-मिल जाने की उनकी अदा महिला व युवाओं को प्रभावित अवश्य ही करती है. अब यह अलग बात है कि प्रियंका का यह प्रभाव वोटों में कितना तब्दील हो पाता है. देखिए ये खास रिपोर्ट
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