वक्फ कानून: बंगाल, ओडिशा और दिल्ली में प्रदर्शन, जमीयत उलेमा-ए-हिंद की बैठक1
आप प्रधानमंत्री ने कहा ये जो नुक्लेअर ब्लैकमेलिंग है ना, ये अब नहीं चलने वाली है और पाकिस्तान के साथ दुनिया सुन ले के अगर बातचीत होगी तो वो सिर्फ पी ओह के या फिर आतंकवाद के मु्द्दे पर ही होगी और अभी इसको ऑपरेशन सिंदूर को स्थगित किया गया है। होल्ड किया गया है। कोई ये नहीं समझे कि ये खत्म हो गया है। इसके जरिए भी क्या एक बड़ा संदेश पहुँच गया है पाकिस्तान? चित्रा बहुत बहुत शुक्रिया और जय हिन्द देखिए चित्रा आपका, मेरा और आपके दर्शकों का बहुत सौभाग्य है कि आपके चैनल पर आज एक्स एम्बेसेडर खुद हैं पार्थार्थार्थी जी जो पुराने फौजीबी हैं। और जैन, बख्शी और जैन पांडे बहुत अनुभव है इनका जम्मू एंड कश्मीर में और इनका जीवन गया पाकिस्तान को सबक सिखाने में और पाकिस्तान के बारे में जानने में तो मैं और आप तो आज सीखने के लिए हैं और बाकी लोग भी और ऑफ कोर्स हमारे पास ए फोर्स एक्स्पर्ट भी है तो? मेरा सिर्फ इतना कहना है कि देखिए लड़ाई अभी जारी है भी, मैं तो नहीं मानता लड़ाई जारी है क्योंकि देखिए दुश्मन बड़ा दुश्मन तो चाइना है राइट और वो वो रहेगा। ये सारा का सारा खेल कहीं ना कहीं चाइना पीछे से खेलता रहा है और वो इसका पूरा का पूरा। भागी है तो वो भी देख रहा है कि भाई हमने क्या इस्तेमाल किया, क्या नहीं इस्तेमाल किया, क्या हमारी कैपेबिलिटीज है, क्या हमारी खामियां हैं तो वो वो वो हमारा दुश्मन है। इसमें हमें कोई शक नहीं होना चाहिए और देखिए जो असली अभी जो जैसे मोहम्मद का चीफ लश्कर ए तैबा का चीफ हिजबुल मुजाहिदीन का चीफ अभी भी वो कहीं ना कहीं सांप की तरह घुसे हुए हैं तो ऐसा नहीं है कि हम हमारे हमारी लड़ाई जारी नहीं है। हमारी लड़ाई जारी है। मैं मु्द्दे पर आता हूँ कि अगर हमारी लड़ाई जारी है तो देश को बड़ा सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि प्रधानमंत्री ने कल बहुत अच्छी मैसेजिंग की कि ब्लैकमेल नहीं चलेगा। जो नुक्लेअर ब्लैकमेल है वो नहीं चलेगा और मेरे जैसे फौजी तो पिछले बहुत दिन से कह रहे हैं कि यह ब्लैकमेल नुक्लेअर जो है। यह एक एक बवंडर है जो जो। दुनिया में जो जो लोग है ना जो दुनिया में यूएन कह रहा हूँ, जो बड़े बड़े डिप्लोमैट है। हमारे यहाँ भी कुछ बुद्धिजीवी है जो बार बार इससे डराते हैं। इससे थियर मॉर्निंग करते हैं। हमारे देश में हमारे पॉलिसी मेकर्स में हमारे डिसीजन मेकर्स पे इफेक्ट पड़ता है लेकिन हम तो बहुत दिन से कह रहे हैं कि इसकी कोई अहमियत नहीं है। पाकिस्तान की कोई जो पाकिस्तान की जो जो कैपेबिलिटी है, वो भी कितनी है? वो किस तरह से यूज़ करेगा? हम उसको उससे पहले डिस्ट्रॉय कर देंगे। उसके मीन्स को? ट्रांसपोर्टेशन मीन्स को बहुत कुछ है। बहुत ऑप्शन से हमारी एक डिफेन्स इतनी स्ट्रांग है की पूछो मत जब से एस 400 फास्ट कर आया है। तो ये सब तो हमें पहले ही नहीं सोचना चाहिए। देखिए हमें तो ये सोचना चाहिए। अभी तो हमारा लिमिटेड एम था। पोलिटिकल लीडरशिप ने एक बहुत ही लिमिटेड साइन दिया था कि ये टेर्रोरिस्ट कैंप पे फायर करो ताकि मैक्सिमॅम टेर्रिस्ट की कैजुअल्टी हो जाए और देश को। जो देश के साथ उन्होंने किया है, जो हमारे साथ उन्होंने पहलगाम में किया है, उसका देश को एक बदला लगना चाहिए और हमारे लोगों को लगना चाहिए की हमने उनको तबाह किया है और हमने किया है। इसमें कोई शक की बात नहीं। हमने उससे ज्यादा किया है की भाई उसने नहीं माना तो हमने उसके कुछ उसके मिलिट्री एस्टाबलिशमेंट को भी डिग्रेड कर दिया, लेकिन जो मैं बात कहना चाह रहा हूँ वो एक यह तो देखिए एक मेसेजिंग है अक्चवली में तो जो जो हमारा मुहिम है वो तो अलटिमेटली ये है ना कि एक ही बात। डोनाल्ड ट्रंप के ट्वीट में मैंने देखी है कि यह जनरेशन्स वॉर है, जेनरेशन वॉर है, हमारी दो पीढ़ियां। जल बक्शी के कोब जल पांडे के सी और उनके कोब मेरे कमांडिंग ऑफिसर वह भी और इसी तरह हमारे पेरेंट्स और उनके पेरेंट्स इसको झेल चूके हैं। इस पाकिस्तान के दर्द को राइट? और जो इसकी न्युसेंस है उसको झेल चूके हैं। हमें इस अगली पीढ़ी को नहीं देना, मेरा मानना बहुत अगली पीढ़ी को देते हैं तो ये पीढ़ी जो है ये बड़ी अन्याय करेगी। अगली पीढ़ी पे अगर नहीं देना अगली पीढ़ी पे तो कहीं ना कहीं पाकिस्तान से जो असली मुद्दा है पीओके का। और जो बिल्कुल टेररिज्म समाप्त करने का है, उसे हमें एड्रेस करना पड़ेगा और मैं और मैं मिस्टर पार्थसारथी की बात से बिल्कुल सहमत हूँ कि ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान नॉन प्रोफेशनल आर्मी है, बिल्कुल यूज़लेस आर्मी है, उसके पास कुछ नहीं है और वो एक रैग टैग आर्मी है, नहीं रहने दो। लेकिन हमारे पास जो पावर एंड मिलिट्री पावर है वो बहुत स्ट्रांग है। अगर उसको ज्यूडिशसली ठीक टाइम पर अप्लाई किया जाए तो मैं नहीं समझता कि ये दिन दूर है जब हम अपनी अग्नि पीढ़ी को ये दुख नहीं देंगे। और का मुद्दा ये पीडी रेसोल्वे करेगी। हमारे लाइफटाइम में रेसोल्वे होगा, नहीं होगा तो फिर ये फिर फिर फिर ये चलता रहेगा और अगर नुक्लेअर का देश मानता है कि उसकी नुक्लेअर ब्लैक में नहीं चलेगी तो मेरा ये मानना है कि उसकी आर्म्ड फोर्सस की पावर को भी कुछ मत समझो। वो इकोनॉमिकली वीकेस्ट है हिस्टरी में। पाकिस्तान इकोनॉमिकली मिलिटरीली ऑर डिप्लोमेटिकली इतना वीक हिस्टरी में कभी भी नहीं था और ज और मिस्टर विल एग्री विथ मी कि वर्ल्ड भी इतना वीक कभी नहीं था। डिप्लोमेसी में और वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन में और वर्ल्ड ऑर्डर में आज वर्ल्ड में डिसऑर्डर है। किसी की नहीं चलती। कुछ भी बोल देता है की कैसी बात बोल देता है। हर पोलिटिकल कंट्री में हर लीडरशिप अपनी पापुलेशन को कंट्रोल करने में अपनी पापुलेशन को गवर्न करने में लगी है। किसी के पास किसी के लिए कोई टाइम नहीं है। चाइना के भी बहुत प्रोब्लम्स है वर्ल्ड इस इन दी वीकेस्ट स्टेट वर्ल्ड ऑर्डर व्हील डिप्लोमेसी इज़ एट दी वीकेस्ट वन ऑर्गनाइजेशन्स आर डिफंक पाकिस्तान इज़ वीक आई एम ऑफ दी ओपिनियन। दट टुडे ऑर टुमारो लेट फाइन्ड ए विंडो टु सॉर्ट आउट पाकिस्तान वॅन्स फॉर ऑल एक बार पाकिस्तान को वॅन्स फॉर ऑल सबक सिखाके पी ओह के का मुद्दा खत्म करो अगर हम पार्लियामेंट में कैच किया अगर नरसिम्हा राव की सरकार ने पार्लियामेंट में ये कहा कि हम और पास किया कि ये हमारी हमारा है और फिर प्रेसेंट वो मिनिस्टर ने बोला कि भाई हम पीओ के लेके रहेंगे तो नो यार अब नो लेने का टाइम ये है, इसके बाद टाइम नहीं आएगा मैं मैं आपको लिख देता हूँ। 2 साल बाद ये मौका फिर नहीं आएगा। जी पार्थसारथी जी, उन्होंने जो की आपसे ही ये कहा है कि आप उनकी बातों से एग्री होंगे, इस वजह से मैं ये सवाल ले लेती हूँ जी दीपाक्षी साहब इसके बाद में फ़ौरन आपके पास ही आ रही हूँ एक जल्दी से टिप्पणी पार्थसारथी जी से क्या यही समय है? सही समय है पी ओह के के लिए और इसके बाद अगर अभी आपने होल्ड किया या इसको टाला फिर आगे आने वाले वक्त में और मुश्किलों के लिए तैयार रही भारत देखिए एक चीज़ मैं कहता हूँ जो ये प्रेसिडेंट ट्रंप है, इन पर भरोसा भरोसा मत करो, ये किस दिशा में चलेंगे कोई नहीं जानता। और दूसरी बात ये। कि अमेरिका का सहयोग चाहिए तो आप अपनी जो रणनीति अपनाते हैं, हाँ उनको खुश रखो लेकिन उन पर भरोसा ना करो। अब भी शायद उनके मन में मध्यस्थता का इच्छा आ गया है। अपाध्यक्ष का हम कभी नहीं मानेंगे, ये हमारी और पाकिस्तान के बीच की बात है। हम तीसरी पार्टी नहीं जाते। कैसे आप संदेश इनको भेजेंगे? वो देखना पड़ेगा जो जयशंकर है, दूसरे हैं, दोबल हैं ये सब जानते हैं लेकिन। मेरी राय ये है और मैं अमेरिका में भी रह चुका हूँ। रूस में भी इन पर भरोसा करना कोई अमेरिकन भी नहीं करता। कुछ 1 दिन कुछ कहते हैं दूसरे दिन और कुछ करते हैं तो उनका मन ही ऐसा है तो जरूर उनके सिर्फ उनका रोल किस बातचीत में मत देना कुछ भी लेकिन उनको खुश रख के जो भी हमें मिले हथियार और। समर्थन वो स्टेट डिपार्टमेंट और और किसी से बात करके ले ले, लेकिन इनसे ज्यादा ध्यान से हमें रिश्ता रखना चाहिए। मैं इन पर भरोसा बिलकुल नहीं करता। और जिस तरह के बयान भी सामने आ रहे हैं। आपने जो बातें कही है उसको और ज्यादा। कर रहे है। अचानक से ट्रंप का कोई ट्वीट आता है? अचानक से उनका कोई बयान आता है जिसके कोई मतलब मायने नहीं है। लेकिन अपने आप को दूसरी चुनौतियों से बचाने और स्ट्रांग दिखाने के लिए क्या उनकी ओर से ये कदम उठाए जा रहे है, इस पर मैं आउंगी, लेकिन।
















