जहां दिखे त्रासदी के सबसे गहरे जख्म, उसी गांव से शुरू हुआ था Chipko Andolan | Uttarakhand Glacier Burst

तपोवन से करीब 10 कीलोमीटर आगे रैणी गांव है, जहां पर उत्तराखंड ग्लेशियर त्रासदी ने बहुत भयंकर रूप दिखाया है. यहां त्रासदी के जख्म अब भी ताजा हैं. ये रैणी गांव गौरा देवी का है, जो एक आम महिला थीं. जब यहां पर पेड़ काटे जाने लगें, तो इसके विरोध में उन्होंने चिपको आंदोलन की शुरुआत की. यहां की महिलाएं पेड़ों से चिपक गईं, जिस कारण पेड़ों को काटने का फैसला स्थगित करना पड़ा था. 

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