नेहरू के बनाए 'मंदिरों' में से एक IIM को लेकर मोदी सरकार के बिल में क्या है चिंता की बात?
आईआईएम के संशोधित बिल के प्रस्ताव को लेकर संस्थान की चिंता ये है कि कहींं यह संशोधित विधेयक जवाबदेही तय करने के नाम पर उनकी स्वायत्तता को छीन न लें.

मणिपुर मुद्दे पर हंगामे के बीच केंद्र सरकार ने 28 जुलाई को लोकसभा में भारतीय प्रबंध संस्थानों (आईआईएम) संशोधन बिल पेश किया है. जिसके अनुसार राष्ट्रपति आईआईएम के विजिटर होंगे और उन्हें उनके कामकाज का ऑडिट करने का अधिकार होगा.
इसके अलावा इस बिल में आईआईएम के डायरेक्टर की नियुक्ति करने और उन्हें पद से हटाने को लेकर सरकार को ज्यादा अधिकार दिए गए हैं, जिससे इस प्रतिष्ठित संस्थान की ‘स्वायत्तता’ को लेकर बहस शुरू हो गई है.
कांग्रेस ने की आलोचना
कांग्रेस महासचिव और सांसद जयराम रमेश ने केंद्र सरकार और इस बिल की आलोचना करते हुए उन पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा, ‘आईआईएम को साल 2017 में अधिक स्वायत्तता दी गई थी और इस कानून को संसद में भारी समर्थन मिला भी था.




















