Explained: जस्टिस एस मुरलीधरन कौन हैं? भारत में समलैंगिकता को अपराधमुक्त करने से लेकर गाजा तक... क्या-क्या कमाल किए
S Muralidharan: जस्टिस श्रीनिवासन मुरलीधर वही हैं, जिन्होंने भारत में समलैंगिकता को अपराधमुक्त करने, सिख विरोधी दंगों में सज्जन कुमार को दोषी ठहराने और दिल्ली दंगों में सुनवाई करने जैसे फैसले दिए.

23 जून 2026 को यूनाइटेड नेशंस के जांच आयोग ने 100 पेज की एक रिपोर्ट जारी की जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा. इस रिपोर्ट में इजरायल पर गाजा में फिलिस्तीनी बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाने, नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराध और युद्ध अपराध करने के गंभीर आरोप लगाए गए. इस रिपोर्ट के पीछे जो शख्स था, वह कोई और नहीं बल्कि भारत के एक पूर्व जस्टिस जस्टिस श्रीनिवासन मुरलीधर हैं, जो इस आयोग के अध्यक्ष हैं. सवाल यह है कि आखिर जस्टिस मुरलीधर कौन हैं? उनका न्यायिक करियर कैसा रहा है और जिस रिपोर्ट ने इजरायल को इतना नाराज कर दिया है, उसमें आखिर क्या-क्या है?
कौन हैं जस्टिस एस मुरलीधर?
जस्टिस श्रीनिवासन मुरलीधर एक भारतीय न्यायविद हैं, जिन्हें भारत के सबसे आजाद ख्यालों वाले जजों में गिना जाता है. उनका जन्म 8 अगस्त 1961 को हुआ था. उन्होंने चेन्नई के विवेकानंद कॉलेज से केमिस्ट्री में ग्रेजुएशन किया और फिर मद्रास यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री हासिल की. बाद में उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से PhD भी की.
- कानूनी करियर की शुरुआत: उन्होंने 1984 में चेन्नई में वकालत शुरू की. तीन साल बाद 1987 में वे दिल्ली आ गए और दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने लगे. 1990 में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड एग्जाम में टॉप किया. वे भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के लिए वकील भी रहे और कई जनहित याचिकाओं में अमिकस क्यूरी के रूप में कोर्ट की मदद की.
- बतौर जस्टिस कार्यकाल: मई 2006 में उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया. 14 साल तक दिल्ली हाईकोर्ट में रहने के बाद उन्हें पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया. जनवरी 2021 में वे उड़ीसा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने. अगस्त 2023 में रिटायर होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सीनियर एडवोकेट के तौर पर नियुक्त किया.
जस्टिस मुरलीधर के इतिहास रच देने वाले फैसले
जस्टिस मुरलीधर के कुछ फैसलों ने देश की न्यायिक व्यवस्था में मिसाल कायम की:
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23 जून 2026 को यूनाइटेड नेशंस के जांच आयोग ने 100 पेज की एक रिपोर्ट जारी की जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा. इस रिपोर्ट में इजरायल पर गाजा में फिलिस्तीनी बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाने, नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराध और युद्ध अपराध करने के गंभीर आरोप लगाए गए. इस रिपोर्ट के पीछे जो शख्स था, वह कोई और नहीं बल्कि भारत के एक पूर्व जस्टिस जस्टिस श्रीनिवासन मुरलीधर हैं, जो इस आयोग के अध्यक्ष हैं. सवाल यह है कि आखिर जस्टिस मुरलीधर कौन हैं? उनका न्यायिक करियर कैसा रहा है और जिस रिपोर्ट ने इजरायल को इतना नाराज कर दिया है, उसमें आखिर क्या-क्या है?
कौन हैं जस्टिस एस मुरलीधर?
जस्टिस श्रीनिवासन मुरलीधर एक भारतीय न्यायविद हैं, जिन्हें भारत के सबसे आजाद ख्यालों वाले जजों में गिना जाता है. उनका जन्म 8 अगस्त 1961 को हुआ था. उन्होंने चेन्नई के विवेकानंद कॉलेज से केमिस्ट्री में ग्रेजुएशन किया और फिर मद्रास यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री हासिल की. बाद में उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से PhD भी की.
- कानूनी करियर की शुरुआत: उन्होंने 1984 में चेन्नई में वकालत शुरू की. तीन साल बाद 1987 में वे दिल्ली आ गए और दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने लगे. 1990 में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड एग्जाम में टॉप किया. वे भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के लिए वकील भी रहे और कई जनहित याचिकाओं में अमिकस क्यूरी के रूप में कोर्ट की मदद की.
- बतौर जस्टिस कार्यकाल: मई 2006 में उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया. 14 साल तक दिल्ली हाईकोर्ट में रहने के बाद उन्हें पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया. जनवरी 2021 में वे उड़ीसा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने. अगस्त 2023 में रिटायर होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सीनियर एडवोकेट के तौर पर नियुक्त किया.
जस्टिस मुरलीधर के इतिहास रच देने वाले फैसले
जस्टिस मुरलीधर के कुछ फैसलों ने देश की न्यायिक व्यवस्था में मिसाल कायम की:





















