वो एक गलती जिसने अमेरिका और इजराइल से न सिर्फ 'जीत' छीन ली, बल्कि दानव बना दिया

जब अमेरिका और इजरायल ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत ईरान पर अपने सबसे बड़े और घातक संयुक्त हमले की शुरुआत की, तो उनका लक्ष्य स्पष्ट था—ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई का खात्मा. खामनेई इस हमले में मारे गए. रणनीतिक और सैन्य दृष्टिकोण से, वाशिंगटन और तेल अवीव में इसे एक 'ऐतिहासिक जीत' माना जा रहा था. डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे दुनिया के सामने एक बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया.
लेकिन यह 'जीत' चंद घंटों में ही एक ऐसे रणनीतिक और कूटनीतिक दुःस्वप्न में बदल गई, जिसने न केवल अमेरिका और इजरायल को पूरी दुनिया में अलग-थलग कर दिया, बल्कि उन्हें एक 'दानवी' स्वरूप में भी स्थापित कर दिया. वह गलती खामनेई की हत्या नहीं थी, बल्कि दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर में 'शजरेह तैयबेह' (Shajareh Tayyebeh) प्राथमिक विद्यालय की उन 165 मासूम बच्चियों की सामूहिक हत्या थी, जिनका इस युद्ध से कोई लेना-देना नहीं था.

















