एक्सप्लोरर

BLOG: 'हल्के' और 'नन्हे' की सफर की कहानी आपकी आंखें नम कर देगी

बातचीत के बीच नन्हे का फोन बजता है. वो थोड़ा किनारे जाकर धीरे से कहता है अम्मा हम आ जाएंगे. आज रात तक या कल सबेरे तक तुम चिंता मत करो.. अरे खाना भी खा लिया... बस अभी थोड़ी देर पहले खाया. ..

वो दोनों मुझे ऐसे मिलेंगे सोचा नहीं था. जब दफतर से रात में सड़कों पर चल रहे प्रवासी मजदूरों की कहानी करने को कहा गया तो सोचा कौन मिलेगा अंधेरी रातों में सड़कों पर चलते हुए. रात गहराते ही हम निकल पड़े भोपाल के बाहर विदिशा बाइपास की तरफ. दरअसल ये बाइपास पिछले कुछ दिनों से महाराप्ट्र की सीमा से आकर इंदौर से भोपाल, विदिशा, सागर और झांसी या फिर रीवा होकर इलाहाबाद जाने वाले प्रवासी मजदूरों का ही रास्ता बना हुआ था. महाराप्ट्र से लौटकर उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वाले प्रवासी श्रमिक इसी रास्ते से लगातार जा रहे थे. सुबह, दोपहर तो भोपाल से विदिशा जाने वाला ये मोड़ महाराप्ट्र खासकर मुंबई से आ रही छोटी बड़ी गाडियों से भरा ही रहता था. ये हम अच्छी तरह जानते थे मगर रात के अंधेरे में भी इस बाइपास पर जाते हुए लोग मिलेंगे इसका अंदाजा नहीं था. मगर ये क्या इस चौराहे पर देर रात में भी महाराप्ट्र वाली गाड़ियां लगातार आ रहीं थीं. ऑटो हो या पिकअप वाहन दोनों खचाखच भरे थे और यहां से निकल रहे थे. चौराहे पर हो रही चहल पहल को देख ये लंबा सफर करने वाले रूकते, रास्ता पूछते, साथ लाया हुआ या रास्ते में मिला हुआ कुछ खाते, नहीं तो पानी पीकर पेट भरते और निकल पड़ते उस सैकड़ों किलोमीटर के लंबे सफर पर.

इस मोड़ पर मुंबई से आ रहे आटो वालों से बात कर जब हम लौट रहे थे तो सुनसान सड़क पर किनारे की ओर सड़क पर बैठी कुछ आकृतियां हमें दिखीं. डाईवर संजय को हमने गाड़ी धीरे करने को कहा और उनके पास पहुंचते ही वो तीन आकृतियां हमारी गाड़ी की खिडकी के पास चिपक कर खड़ी हो गयीं. मुंह पर बंधा कपड़ा और पीठ पर लटके बैग से ही लग गया कि ये सब भी वक्त के मारे प्रवासी श्रमिक हैं जो यहां सड़क किनारे गिट्टी के ढेर पर बैठे हुए थे. गाड़ी रूकते ही वो हाथ जोड़कर बोलने लगे- भाइ साहब हमें मंडीदीप तक पहुंचा दो. हम कई दिनों से चल रहे हैं.

इस बीच में, मैं गाड़ी से बाहर निकल आया था और उनसे थोड़ी दूरी बनाकर बातचीत करने की कोशिश करने लगा. तब तक हमारे साथी होमेंद्र का कैमरा भी चालू हो गया था. हमको हमारी कहानी के किरदार मिल गये थे. क्या नाम है तुम्हारा एक ने कहा हल्के तो दूसरे ने बताया नन्हे. मुझे हल्की हंसी आयी कि दोनों नामों का मतलब भी एक और दोनों की परेशानी भी एक जैसी ही है. मैंने पूछा यहां पत्थरों पर क्यों बैठे हो. वहां पास में पेट्रोल पंप है वहां क्यों नहीं रूके हल्के ने कहा भाई साहब पेट्रोल पंप वाले ने डांट कर भगा दिया, कहा कि यहां क्यों भीड़ कर रहे हो. ये बात सुनकर मैं हैरान रह गया क्योंकि एक दिन पहले ही बीजेपी के बड़े नेता ने उनके मित्र पेट्रोलियम मंत्री धर्मेद्र प्रधान की उदारता का किस्सा सुनाते हुए बताया था कि अब देश के सारे पेट्रोल पंपों पर इन प्रवासी श्रमिकों के रूकने और ठहरने का इंतजाम के आदेश मंत्री जी ने कर दिए हैं. मगर यहां तो उल्टी ही गंगा बह रही थी. थोड़ी बातचीत से साफ हुआ कि हल्के और नन्हे दो तारीख को अमहदाबाद से रवाना हुए थे और 14 तारीख को मुझे मिले. मतलब बारह दिनों से लगातार चल रहे थे. भोपाल अहमदाबाद का छह सौ किलोमीटर का जो रास्ता किसी भी गाड़ी से दस से बारह घंटे का है उस पर इनको पैदल चलते हुए बारह दिन मतलब 288 घंटे लग गए. इनके पैरों की तरफ जब मैंने देखा तो वहां जूता की जगह घिसी और टूटी हुई चप्पलें थीं. कैमरे की लाइट में भी इनके पैरों के पंजों पर सूजन दिख रही थी. मैंने कहा अरे ये तो तुम्हारे पंजे सूजे हुए हैं तो हल्के ने अपना पैंट घुटने तक उठाया और कहा भाईसाहब ये देखिये पूरे पैर में किस कदर सूजन हैं. दिन भर बस चलते हैं. खाना पानी की बात क्या करें. रास्ते किनारे छांव तक नहीं मिलती. पैसे तो खत्म हो गए हैं. रास्ते में कभी जो मिल गया खा लिया. नहीं तो पुलिस वालों की गालियों से ही पेट भर जाता है. पैदल चलते में कभी कोई गाड़ी वाला थोड़ी देर के लिए बैठा देता है तो ऐसा लगता है सब कुछ मिल गया.

तो कब से खाना नहीं खाया तुमने.. भैया दो दिन हो गए.. भोजन क्या होता है देखा नहीं. इस बीच में नन्हे का फोन बजता है. वो थोड़ा किनारे जाकर धीरे से कहता है हम अम्मा आ जाएंगे आज रात तक या कल सबेरे चिंता मत करो.. अरे खाना भी खा लिया. बस अभी थोड़ी देर पहले खाया. अब चढाई करने की बारी मेरी थी तो यार तुम तो गजब झूठ बोलते हो. अभी कहा खाना नहीं खाया तो इस पर आंखे भरकर नन्हे कहता है भाईसाहब घर वालों से ऐसे ही बातें करनी पड़ती है. उनको क्यों टेंशन दें, फिर अचानक वो अपनी शर्ट उठाकर पेट दिखाते हुए बोला ये देखिये हमारा पेट ये क्या आपको खाया पिया दिख रहा है. पिचके पेट वाले इस कम उमर के मेहनतकश युवक की समझदारी ने अब मुझे शर्मिंदा कर दिया. अहमदाबाद की किसी कंपनी में सेरेमिक का काम करने गए ये युवक रायसेन जिले के उदयपुरा के अच्छे परिवारों से थे. मंडीदीप में इनके रिश्तेदार रहते थे मगर उनको भी मोटरसाइकिल से यहां लाने को मना कर रहे थे. ये अपने घर पैदल या अपनी सामर्थ से ही जाना चाहते थे. नन्हे ने कहा कि भाईसाब अपनी मुसीबत में किसी दूसरे को क्यों परेशानी दें.

अब ढांढस बंधाने की बारी हमारी थी. उनके हाथ में कुछ पैसे देकर कहा चिंता नहीं करो. अब अपने घर के पास हो तुम. कुछ कदम की दूरी पर ही चौराहा है. वहां खाने का इंतजाम भी है और वहां पुलिस तुमको किसी गाड़ी में बैठाकर घर तक भेज देंगे. थोड़ी देर बाद हमने हल्के और नन्हे को अपने साथी के साथ विदिशा चौराहे पर खाना खाते देखा. अब उनके चेहरे पर सुकून था. वहां खडे हैड कांस्टेबल ने भी हमसे वायदा किया आप चिंता नहीं करिये इन तीन लड़कों को हम किसी गाड़ी में बैठा कर मंडीदीप छुडवा देंगे.

IPL

ABP Shorts

View More

Before You Go

Sponsored Links by Taboola

Live Tv

ABP न्यूज़
ABP Majha
ABP Asmita
ABP Sanjha
ABP Ananda
ABP Live
POWERED BY
sponsor
Hello Guest

व्यक्तिगत

टॉप स्टोरीज
रील्स
ईरान के साथ समझौते पर बातचीत के बीच डोनाल्ड ट्रंप का हुआ हेल्थ चेकअप, जानें क्या आई रिपोर्ट
ईरान के साथ समझौते पर बातचीत के बीच डोनाल्ड ट्रंप का हुआ हेल्थ चेकअप, जानें क्या आई रिपोर्ट
TMC सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले को लेकर तेजस्वी यादव बोले- 'दुर्भाग्य है कि सत्ता में...'
TMC सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले को लेकर तेजस्वी यादव बोले- 'दुर्भाग्य है कि सत्ता में...'
बारिश के कारण रद्द हुआ IPL 2026 का फाइनल, तो RCB या GT में किसे मिलेगी ट्रॉफी? जानें नियम
बारिश के कारण रद्द हुआ IPL 2026 का फाइनल, तो RCB या GT में किसे मिलेगी ट्रॉफी? जानें नियम
राम चरण ही नहीं, सलमान-शाहरुख खान तक बॉडीगार्ड पर पानी की तरह पैसा बहाते हैं स्टार्स, करोड़ों में है सैलरी
राम चरण ही नहीं, सलमान-शाहरुख खान तक बॉडीगार्ड पर पानी की तरह पैसा बहाते हैं स्टार्स, करोड़ों में है सैलरी
राजस्थान से दिल्ली तक अचानक वाइब्रेट करने लगे मोबाइल, किस लिए आया ये अलर्ट?
राजस्थान से दिल्ली तक अचानक वाइब्रेट करने लगे मोबाइल, किस लिए आया ये अलर्ट?
Karnataka: डीके शिवकुमार चुने गए विधायक दल के नेता, पूर्व CM सिद्धारमैया की आई पहली प्रतिक्रिया, जानें क्या कहा
डीके शिवकुमार चुने गए विधायक दल के नेता, पूर्व CM सिद्धारमैया की आई पहली प्रतिक्रिया, जानें क्या कहा
बेकार पड़ी बंजर जमीन भी बना देगी अमीर,  बाजार में 1000 रुपये किलो बिकता है इसका गोंद
बेकार पड़ी बंजर जमीन भी बना देगी अमीर, बाजार में 1000 रुपये किलो बिकता है इसका गोंद
Bikaner: दिन में छाया अंधेरा! बीकानेर में धूल के तूफान की ‘दीवार’ ने मचाई दहशत, वीडियो देख सहमे लोग
दिन में छाया अंधेरा! बीकानेर में धूल के तूफान की ‘दीवार’ ने मचाई दहशत, वीडियो देख सहमे लोग
Embed widget