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Dilip Kumar's 98th Birthday: दिलीप कुमार के लिए दुआ करते हैं, दुआ करते रहेंगे

दिलीप कुमार यूं तो अक्सर सुर्खियों में बने रहते हैं. कभी अपनी तबीयत तो कभी अपनी पुरानी बातों और यादों के लिए. आज का दिन तो उनकी ज़िंदगी के लिए बेहद खास है क्योंकि आज वह 98 बरस की उस उम्र में पहुंच गए हैं, जहां पहुंचना हर किसी के नसीब में नहीं होता. उनके जन्म दिन पर पढ़िये वरिष्ठ पत्रकार और फिल्म समीक्षक प्रदीप सरदाना का ब्लॉग, जिसमें उन्होंने अपनी यादों और सायरा बानो की बातों से दिलीप साहब के जन्मदिन को लेकर भी बहुत कुछ साझा किया है.

दिलीप कुमार यूं तो अक्सर सुर्खियों में बने रहते हैं. कभी अपनी तबीयत तो कभी अपनी पुरानी बातों और यादों के लिए. आज का दिन तो उनकी ज़िंदगी के लिए बेहद खास है क्योंकि आज वह 98 बरस की उस उम्र में पहुंच गए हैं, जहां पहुंचना हर किसी के नसीब में नहीं होता. उनके जन्म दिन पर पढ़िये वरिष्ठ पत्रकार और फिल्म समीक्षक प्रदीप सरदाना का ब्लॉग, जिसमें उन्होंने अपनी यादों और सायरा बानो की बातों से दिलीप साहब के जन्मदिन को लेकर भी बहुत कुछ साझा किया है.

अभिनय के सरताज दिलीप कुमार आज अपना 98 वां जन्म दिन मना रहे हैं. दिलीप साहब साल दर साल ज्यों-ज्यों अपनी उम्र के नए पड़ाव पर पहुंचते हैं, उनके जन्म दिन को मनाने का जोश भी हर साल बढ़ता जाता है. सिनेमा की दुनिया के कई बड़े लोग दिलीप कुमार को बधाई देने के लिए उनके घर पहुंचते हैं. लेकिन इस साल दिलीप साहब के 98 बरस के होने पर भी उनके मुंबई के पाली हिल बंगले पर कोई समारोह नहीं हो रहा है. जबकि आज के समय में किसी फिल्म सितारे का 98 बरस का होना भी एक बड़ी बात है.

यूं दिलीप कुमार का यह 98 वां जन्म दिन भी काफी धूम धाम से मनाया जाता लेकिन हालात ऐसे बने कि आज कोई भी बड़ा समारोह नहीं हो पा रहा. उसका एक कारण तो कोरोना का कहर है, जिसके चलते अधिकतर समारोह सिमट कर रह गए हैं. लेकिन इसका एक कारण यह भी है कि कुछ महीने पहले दिलीप कुमार के दो भाइयों का भी इंतकाल हो गया है. इसलिए कोई ‘सेलिब्रेशन’ हो तो कैसे हो!

भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार ने अपनी ज़िंदगी में जो मुकाम बनाया है, वह अच्छे अच्छे लोगों के लिए एक सपना होता है. आज की नयी पीढ़ी के बहुत से लोग चाहे दिलीप कुमार के फिल्मों में महान योगदान और उनकी कई बड़ी उपलब्धियों को ना जानते हों, पर दिलीप कुमार सफलता के जिस शिखर पर पहुंचे, वहां आज तक कोई और नहीं पहुँच सका है. इसलिए आज कई दिग्गज कलाकार भी दिलीप कुमार का लोहा मानते हैं. आज सुबह से धर्मेन्द्र, कमल हासन, माधुरी दीक्षित से लेकर अजय देवगन और उर्मिला मतोंदकर तक कई सितारे दिलीप कुमार के जन्म दिन पर उन्हें अपने अपने अंदाज़ में बधाई दे रहे हैं.

आज गुमसुम है अभिनय का बादशाह दिलीप कुमार देखने में आज भी भले चंगे और खूबसूरत दिखते हैं. लेकिन उनकी तबीयत पिछले कुछ बरसों से कुछ ज्यादा ही खराब चल रही है. कुछ समस्याएं, कुछ परेशानियां बढ़ती उम्र की हैं तो कुछ रोग उन्हें ऐसे लगे कि हमेशा अपने अल्फ़ाज़ों से माहौल को खुशगवार बनाने वाला आज खामोश और गुमसुम सा रहता है. यह बात अलग है कि उनकी बेगम सायरा बानो अपनी कोशिशों से, उनकी खामोश सी ज़िंदगी में भी ऐसे रंग भर रही हैं कि जिससे तमाम खुशियां उनके इर्द गिर्द दिखने लगती हैं.

सायरा बानो अपने समय की खुद एक मशहूर अभिनेत्री रही हैं. जिनके खाते में जंगली, आई मिलन की बेला, शागिर्द, अप्रैल फूल, दीवाना, पड़ोसन, झुक गया आसमान, पूरब और पश्चिम, रेशम की डोरी, विक्टोरिया नंबर 203, सगीना, गोपी, हेरा फेरी और बैराग जैसी कई यादगार फिल्में हैं. लेकिन पिछले कई बरसों से उनकी पूरी दुनिया सिर्फ और सिर्फ दिलीप कुमार की होकर रह गयी है.

साल भर में विभिन्न मौकों पर मेरी सायरा बानो से कई बार बात होती रहती है. दिलीप साहब को लेकर उनके दिल में आज भी कई अरमान हैं. वह अपना हर लम्हा अपने इन्हीं ‘साहब’ के लिए जीती हैं. वह दिलीप साहब को कभी साहब कहती हैं तो कभी ‘जान’ और कभी ‘कोहेनूर’.

पिछले एक दो दिन से भी मेरी उनसे बात हो रही है. वह कहती हैं- हर साल साहब का जन्म दिन बहुत अच्छे से होता है. लेकिन यह साल पूरी दुनिया के लिए दुख भरा रहा है. फिर इस साल हमने दिलीप साहब के दो प्यारे भाई अहसास भाई और असलम भाई को खो दिया है. इसलिए इस साल बर्थडे का कोई जश्न नहीं कर रहे हैं. .

सायरा यह भी बताती हैं-‘’ हालांकि साहब के जन्म दिन पर हमने अपने घर में एक सकारात्मक वातावरण बनाया हुआ है. घर में चहल पहल है और परिवार के सदस्य पूरे जोश में हैं. इंशा अल्लाह हम दिलीप साहब की मनपसंद बिरयानी और उनके कुछ और पसंदीदा पकवान भी बना रहे हैं. लेकिन इस बार कोई मेहमान नहीं आ रहे और न ही कोई वैसा बड़ा जश्न होगा, जैसा पिछले बरसों में होता आ रहा है.‘’

दिलीप कुमार के जन्म दिन को पूरे हर्ष और उल्लास से मनाने की परंपरा यूं तो पुरानी है. कभी उनका जन्म दिन घर पर ज़ोर शोर से मनता था तो कभी परिवार के कुछ सदस्यों के साथ कहीं बाहर डिनर या बड़ी पार्टी का आयोजन होता था. मुझे याद है जब दिलीप कुमार का 89 वां जन्मदिन था तब तो उनके पाली हिल घर पर एक बड़ा जलसा हुआ था. जहां पूरा फिल्म उद्योग उन्हें बधाई देने के लिए पहुंचा हुआ था. तब कई बड़ी हस्तियों की मौजूदगी और देर रात तक चले डांस, म्यूजिक के प्रोग्राम ने उस शाम को एक यादगार शाम बना दिया था.

उससे पहले और बाद में भी कई बार ऐसा हुआ कि दिलीप कुमार के जन्म दिन पर उनके घर के दरवाजे सभी के लिए खुल जाते थे. इससे कभी कुछ दिक्कतें भी आ जाती थीं. लेकिन घर आए मेहमान का स्वागत होता था और उसके लिए खान-पान का भी प्रबंध रहता था. लेकिन दिलीप कुमार की तबीयत कुछ ज्यादा नासाज रहने के बाद उनका जन्म दिन घर-परिवार या कुछ करीबी दोस्तों तक सिमट कर रह गया.

सायरा बानो ने ही एक बार बताया था –“कुछ लोग तो दिलीप साहब को जन्म दिन की बधाई देने के लिए करीब करीब हर साल ही आते रहे हैं. फिर कुछ लोग किसी साल तो कुछ किसी और साल आते रहते हैं. अमिताभ बच्चन और धर्मेन्द्र भी कभी कभार आ जाते हैं. नहीं तो इनके फोन तो आते ही हैं. फिर शाहरुख, आमिर और प्रियंका चोपड़ा जो मेरे बच्चों की तरह ही हैं वे भी आ जाते हैं. आमिर तो कहते हैं कि पूरी दुनिया में दिलीप कुमार के वह ही सबसे बड़े फैन हैं. मुझे सभी की दिलीप साहब को लेकर उनकी बेपनाह मोहब्बत देख बहुत अच्छा लगता है.“

बुरहानी और खीर पसंद हैं दिलीप कुमार को यहाँ बता दें सायरा बानो अपने ‘कोहेनूर’ की सेहत, उनके खाने पीने और उनकी सुख सुविधाओं का दिल ओ जान से ख्याल रखती हैं. दो बरस पहले उन्होंने मुझे बताया था –“अब साहब की खराब तबीयत के चलते हमारे यहाँ पहले की तरह आए दिन पकवान नहीं बनते. बिरयानी भी अब कभी कभार कुछ खास मौकों पर बनती है. लेकिन उनके जन्म दिन पर मेरी कोशिश रहती है कि उनकी मनपसंद डिश जरूर बनाई जाएं. जैसे उन्हें पेशावरी डिश बुरहानी बहुत पसंद है. खड़ा मसाला और खीर भी हम उनके जन्मदिन पर अक्सर बनाते हैं. हालांकि दिलीप साहब अब खाने की किसी खास डिश की फरमायाश तो नहीं करते लेकिन जो भी हम बनाते हैं, वे शौक से खाते हैं.

सायरा बानो से अभी बात हुई तो वह बोलीं, कोरोना महामारी के कारण हम सब चिंतित हैं. इससे पहले इतने बुरे हालात मैंने पहले कभी नहीं देखे. आप जानते ही हैं साहब की तबीयत पिछले कुछ बरसों से काफी अप-डाउन चल रही है. मेरी तबीयत भी खास अच्छी नहीं. इसलिए डॉक्टर ने लॉकडाउन में हमको सोशल डिस्टेन्सिंग की सलाह देते हुए खुद को पूरी तरह आईसोलेशन में रहने की सलाह दी. हालांकि सोशल डिस्टेन्सिंग हमारे लिए इन दिनों ज्यादा मुश्किल नहीं है क्योंकि पिछले कुछ बरसों से हम ज्यादा सोशल हैं भी नहीं. बाहर भी नहीं जाते, हम पहले बहुत यात्राएं करते थे लेकिन अब वे सब बंद हैं. लेकिन साहब को कुछ लोग मिलने आते रहते हैं, इसके लिए मुझे कुछ अलग बंदोबस्त करने पड़े. अपने स्टाफ को भी सभी नियमों का सख़्ती से पालन करने के लिए कहा गया. हमने पूरी कोशिश की है कि खुद को भी महफूज रखें और बाकी सभी को भी.‘’

12 साल की उम्र में देखा था दिलीप से शादी का सपना मैं सायरा जी को जब भी कहता हूँ कि आप दिलीप साहब का जिस तरह ख्याल रखती हैं उसे देख बहुत खुशी होती है. इस पर वह कहती हैं-‘’अपने पति के लिए ऐसी दुआएं मांगने वाली मैं अकेली नहीं, मैं समझती हूं, सभी पत्नियां अपने पति के लिए यही सब करती हैं. मैं दिलीप साहब के साथ बिताए हर लम्हे को अपनी खुशकिस्मत मानती हूं. मैं चाहती हूं वह सभी दुख तकलीफ़ों से दूर रहें. दिलीप साहब मेरे पति ही नहीं मेरी ज़िंदगी हैं, मेरी मोहब्बत हैं.

दिलीप कुमार के प्रति सायरा बानो की यह मोहब्बत आज की नहीं है. सायरा जब सिर्फ 12 साल के थीं और तव वह लंदन के एक स्कूल में पढ़ रही थीं, तभी से उनका सपना था कि वह दिलीप कुमार के बेगम बनें. हालांकि तब उनकी मां, दादी और भाई समझते थे कि दिलीप कुमार के प्रति सायरा की यह दीवानगी किसी फिल्म सितारे के प्रति एक फैन के तरह है या फिर वह इस स्कूल गर्ल का ‘क्रश’ हैं, लगाव है. लेकिन जब सायरा लंदन से मुंबई वापस आयीं और शम्मी कपूर के साथ फिल्म ‘जंगली’ में बतौर हीरोइन बढ़िया मौका मिलने के बाद भी उनकी दिलीप कुमार के प्रति दीवानगी कम नहीं हुई तो सब कुछ साफ हो गया. सायरा दिल की गहराइयों से दिलीप कुमार को चाहती हैं.

सायरा की दिलीप कुमार के प्रति मोहब्बत तब रंग ले ही आई जब 11 अक्तूबर 1966 को दोनों ने निकाह कर लिया. तब से अब तक इनकी मोहब्बत भरी ज़िंदगी में एक बार 1980 के दशक के शुरुआती दो बरसों में एक तूफान जरूर आया वरना इनकी मोहब्बत आए दिन और खूबसूरत होती जा रही है.

सायरा से जब भी बात होती है वह एक बात हमेशा कहती हैं कि आप साहब के लिए दुआ करो वह ठीक रहें, सलामत रहें. मैं उनको कहता हूं मैं तो उनके लिए हमेशा दुआ करता ही हूँ. फिर मैं क्या दिलीप साहब के लिए दुनिया भर के कितने ही लोग दिन रात दुआ करते हैं और करते रहेंगे.

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और फिल्म समीक्षक हैं )

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(नोट- उपरोक्त दिए गए विचार व आंकड़े लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.)

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