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आजम के लिये नेता जी खुद सामने आये हैं..आखिर कुछ तो वजह होगी

नेता जी ने आजम खान के लिये जिस तरह का अंदाज दिखाया है, उसके सियासी मायने समझे जा सकते हैं। आजम सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव से उस वक्त से जुड़े हैं, जब पार्टी अपने शेैशव काल में थी..

कहा जाता है कि भ्रष्टाचार नीचे से ऊपर की ओर बढ़ता है और नैतिकता ऊपर से नीचे की ओर बढ़ती है..इसका मतलब ये हुआ कि भ्रष्टाचार की शुरुआत सिस्टम के निचले पायदान से होती है..और धीरे-धीरे आला अफसरों तक जाती है...इसके ठीक उलट नैतिकता के मापदंड ऊपरी पायदान पर बैठे लोग पेश करते हैं और उनके नीचे के लोग उसका पालन करते हैं...आज का हमारा विषय सियासत की इसी नैतिकता और भ्रष्टाचार से जुड़ा है..जिसमें आरोपी नेता की पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता ने आज जो कहा वो कई सवाल खड़े करता है...समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और उत्तर प्रदेश की रामपुर सीट से सांसद आजम खां एक दो नहीं 78 मुकदमों में आरोपी हैं..लेकिन पार्टी के स्तर पर उनपर कोई कार्रवाई नहीं हुई..उलटे मौके-मौके पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव या दूसरे नेताओं ने आजम का समर्थन ही किया...आज सपा के सबसे बुजुर्ग नेता...सपा को खड़ा करने वाले और देश के दिग्गज नेता मुलायम सिंह यादव ने मीडिया के सामने खुलेतौर पर आज़म खां का समर्थन किया..इतना ही नहीं मुलायम ने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से आजम खां के अपमान का बदला लेने की बात भी कही...मुलायम जैसे मंझे और कद्दावर नेता का 78 मुकदमों में फंसे..महिलाओं पर बेहूदा बयान देने के लिए बदनाम आजम खां जैसे नेता के हक में ये एलान करना बड़े सियासी मायने रखता है।

कानून की किसी जांच-पड़ताल...या अदालत के किसी फैसले से पहले ही मुलायम सिंह यादव ने आज़म खां को पूरी तरह पाक-साफ मानते हुए अपने कार्यकर्ताओं के सामने उन्हें क्लीनचिट दे दी। इतना ही नहीं कई दशकों से सत्ता सुख भोग रहे आज़म खां को मुलायम ने गरीब और बेहद काबिल नेता बताया।

जिन आजम खां को मुलायम सिंह गरीब और बेहद काबिल बता रहे हैं..उन्हें पाक-साफ बताकर यूपी की योगी सरकार और भाजपा पर निशाना साधा रहे हैं...उन आजम खां पर उनकी उम्र से भी ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं...करीब 71 साल के आज़म खां ने सियासत में शिखर की ओर कदम बढ़ाते हुए जो -जो किय़ा...उसकी बानगी उन पर दर्ज 78 मुकदमों से भी समझी जा सकती है।

रामपुर से लोकसभा सदस्य आजम खान पर शत्रु संपत्ति को वफ्फ संपत्ति में दर्ज करने और उसे हड़पने का आरोप है...यहां सिर्फ आजम ही नहीं उनकी पत्नी तजीम फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है...इसके अलावा उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल बोर्ड लखनऊ के अध्यक्ष वसीम रिजवी और सुन्नी वफ्फ बोर्ड के अध्यक्ष जफर फारुखी समेत वफ्फ बोर्ड के अधिकारियों सहित कुल नौ लोगों पर केस दर्ज हुआ है...आजम की जौहर यूनिवर्सिटी की मुमताज सेंट्रल लाइब्रेरी से चोरी की पुरानी और महंगी किताबें बरामद की गई और इस दौरान रियासतकालीन रामपुर क्लब से चुराई गई शेरों की मूर्तियां रखी मिलीं...इसे लेकर भी आजम पर केस दर्ज किया गया है... 29 अगस्त को आजम खान पर पांच मुकदमे दर्ज हुए जिनमें से दो मामले भैंस चोरी के भी हैं...इसके अलावा लूट, डकैती और जबरन मकान तुड़वा कर अपने स्कूल बनवाने जैसे आरोप भी उन पर हैं...आजम खान पर सरकारी ज़मीन पर खड़े कत्थे के 2,173 पेड़ कटवाने का इल्जाम लगा है...मुकदमों की बात की जाए तो जौहर यूनिवर्सिटी के लिए किसानों की जमीन हड़पने के मामले में आजम खान पर 23 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए हैं।

आजम खां पर मुकदमों की संख्या 78 को भी पार कर जाए...सेंचुरी मार दे तो भी हैरानी की कोई बात नहीं होगी...क्योंकि सुर्खियों में रहने के आदी आजम बात-बात पर बेतुकी बातें करने के भी आदी हैं...लोकसभा चुनाव के दौरान आजम के बयान लगातार सुर्खियों में रहे...खासतौर से अपनी प्रतिद्वंदी और भाजपा प्रत्याशी जयाप्रदा को लेकर उन्होंने सबसे ज्यादा बयानबाजी की हैं..जबकि जयाप्रदा किसी जमाने में उन्हीं की पार्टी से उन्हीं के गढ़ रामपुर की सांसद रह चुकी हैं...आजम को लेकर जयाप्रदा की ओर से भी कई केस दर्ज हैं।

कई और मुकदमों में सबसे ताज़ा और सबसे ज्यादा विवादत मामला है रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी का है, इसमें भी स्थानीय लोगों ने आजम खां पर सीधे-सीधे आरोप जड़े हैं।

ये सारे मुकदमे कानून और संविधान के मुताबिक दर्ज हैं। इनकी पड़ताल अभी चल रही है...आजम खां बेदाग़ साबित होंगे तो अदालत से यकीनन ये सारे आरोप खारिज हो जाएंगे लेकिन क्या ये मुमकिन है कि बगैर किसी आग के ही आज़म के चारों और इतना धुआं फैल गया है। अगर आरोप झूठें हैं तो ये धुआं जल्द ही छंट भी जाएगा...लेकिन सपा के बिग कमांडर मुलायम सिंह ने तो उन्हें पहले ही दूध का धुला साबित कर दिया तो इसके पीछे वजह भी है...वजह सियासी भी है...निजी भी है...दिल से भी जुड़ी है...दिमाग से भी जुड़ी है...आजम खां सपा के शुरुआती दौर के सिपाही हैं...यानी मुलायम के साथ उस दौर से जुड़े हैं, जब समाजवादी पार्टी ने जन्म लिया...और घुटनों के बल चलते हुए अपने पैरों पर खड़ी हुई...इस पूरे सफर में एक बड़ा वोटबैंक भी आजम के साथ-साथ समाजवादी पार्टी के हक में चलता रहा है..आज़म खां के चारों ओर आरोपों का जितना धुआं हैं...मुलायम की नज़र में आज़म के लिए उससे कहीं बड़ा मकड़जाल दिल और दिमाग के इसी रिश्ते से बुना है।

वैसे तो आजम छात्र जीवन से सियासत में आए...लेकिन जनता पार्टी से सियासत शुरू कर वो 1992 में जब मुलायम सिंह ने समाजवादी पार्टी बनाई तो उनके साथ हो लिए...1993 में पार्टी से मिले टिकट पर आजम ने जीत दर्ज की...सबकुछ ठीकठाक चलता रहा...लेकिन 2009 लोकसभा चुनाव में जया प्रदा के रामपुर से मैदान में उतरने का आजम ने विरोध किया...नतीजा 16 साल पुराने रिश्ते पटरी से उतर गए..और आजम को पार्टी से बाहर कर दिया गया...लेकिन एक साल के भीतर समीकरण बदले...आजम की 2010 में सपा में वापसी हुई..और अमर सिंह को बाहर जाना पड़ा...वैसे पार्टी के संस्थापक सदस्य होते हुए आजम सपा का बड़ा मुस्लिम चेहरा रहे...यही वजह है कि वो अखिलेश और मुलायम दोनों सरकार में कद्दावर मंत्री रहे।

तो ऐसा क्या है कि सबकुछ अनदेखा कर राजनीति का इतना बड़ा खिलाड़ी आजम खां पर दांव लगा रहा है..बात राजनीति के दिग्गज की है तो सियासत से इतर तो हो नहीं सकती...इस सियासत में छिपी राजनीति को ही आज हम आपके सामने रखने की कोशिश करेंगे...मुलायम के इस दांव को समझने के लिए उनका आज का एक और बयान आपको सुनाते हैं...ये बयान उन्होंने अपने छोटे भाई शिवपाल यादव के लिए दिया है, जो अखिलेश यादव से तकरार के बाद सपा से अलग हो चुके हैं और अपनी अलग पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी बना चुके हैं..दिलचस्प ये है कि जिस तरह बेटा अखिलेश ये दावा करता है कि पिता मुलायम ही सपा के संरक्षक है, उसी तरह शिवपाल भी दावा करता है कि मुलायम सिंह उनकी पार्टी के संरक्षक हैं।

मामले तो कानूनी हैं लेकिन सियासत के इस खेल को और बारीकी से समझने के लिए आपको याद दिलाते हैं चुनावों की...यूपी में 11 सीटों पर चुनाव होने वाले हैं... लोकसभा चुनावों से पहले हुआ सपा और बसपा का गठबंधन टूट चुका है...अब दोनों ही पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ने का फैसला कर चुकी हैं...सपा और बसपा अकेले ही मैदान में उतरेंगी और आमने-सामने होंगी...लेकिन जिन 11 सीटों की बात हो रही है...उसमें बीजेपी के खाते में 9 सीटें दर्ज हैं...एक सीट सपा और एक सीट बसपा के खाते हैं...जिन 11 सीटों पर उपचुनाव होना है...उनमें कानपुर की गोविंदनगर..लखनऊ कैंट, टुंडला, बाराबंकी की जैदपुर, मानिकपुर, बहराइच की बलहा, शामली की गंगोह, अलीगढ़ की इगलास, प्रतापगढ़, रामपुर और अंबेडकरनगर की जलालपुर सीट हैं।

इस चर्चा के निष्कर्ष की बात मैं आज़म खां के अँदाज़ में ही शुरू करता हूं...बेहद सलीके और मीठी जुबां से जहर उगलने में माहिर आजम खां पर ये शेर बिल्कुल मुफीद नज़र आता है कि...इनसे मिलिए, सलीके के लोग हैं..कत्ल भी करेंगे तो एहतराम से...एहतराम यानी पूरे सम्मान के साथ।

आज़म खां पर चोरी, डकैती, जमीन हड़पने जैसे गंभीर आरोप हैं, लेकिन आजम की बदजुबानी उससे भी गंभीर हैं। जाहिर है इसे लेकर मुलायम ने कभी आजम पर अंकुश लगाने की जरूरत नहीं समझी । आजम की हरकतों, उनके खिलाफ उठती आवाजों पर मुलायम या अखिलेश ने विरोध में दो शब्द कहना तो दूर उनका बचाव ही किया । जया प्रदा पर जब जुबान से जहर उगलते वक्त आजम ने लक्ष्मण रेखा लांघी तो भी मुलायम चुप रहे । अब जब आजम के गुनाहों की सेंचुरी होने वाली है तो सपा के वरिष्ठ नेता मुलायम सिंह इसे सियासी दायरे में घसीटने पर आमादा हैं । ये जानते हुए भी कि आजम की ये लड़ाई कानूनी ज्यादा है भले ही सियासी हवा उनके पक्ष में न हो, मगर मुलायम का ये रुख निश्चित तौर पर तुष्टिकरण की सियासत की अगली किश्त है ।

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