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बड़ी से बड़ी हीरोइन थीं जिनकी दीवानी, मेकअप की दुनिया के बेताज बादशाह थे पंढरी जुकर

पंढरी जुकर का काम और वह दौर कितना शानदार रहा होगा इस बात की कल्पना इससे ही की जा सकती है कि उन्होंने लगभग सभी बड़े हीरो के चेहरों को संवारा. उन्हें वह गेटअप दिया जिसमें उतरकर जब सितारे संवाद बोलते थे तो सिनेमा घर तालियों से गूंज उठते थे.

एक मेकअप आर्टिस्ट के सामने फिल्मी दुनिया के दिग्गज किस तरह नतमस्तक हो सकते हैं. बड़ी से बड़ी हीरोइन और बड़े बड़े हीरो किस तरह उनके दीवाने हो सकते हैं. इस बात की सबसे बड़ी मिसाल थे पंढरी जुकर, जिन्हें सभी पंढरी दादा के नाम से जानते थे. अफसोस भारतीय सिनेमा के यह एतिहासिक पुरुष और फिल्म मेकअप के पितामह अब इस दुनिया में नहीं रहे. हाल ही में मुंबई में उनका निधन हो गया.

पंढरी दादा फिल्मी दुनिया के अकेले ऐसे मेकअप मैन थे जिन्होंने इतनी लंबी पारी खेली. अपनी 88 की उम्र में 65 साल से अधिक उन्होंने उन सितारों को सजाने संवारने में गुजार दिये जिनके रूप सौन्दर्य के करोड़ों दीवाने रहते हैं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि मीना कुमारी से काजोल तक और मधुबाला से माधुरी तक के जिस सौन्दर्य की हम चर्चा करते नहीं थकते उसे वैसा बनाने में पंढरी दादा की भी बड़ी भूमिका रही. असल में उन्हीं की अंगुलियों और ब्रश ने साधारण सी दिखने वाली नायिकाओं को रूप की रानी, सौन्दर्य की देवी बना दिया.

आज के दौर में ज़्यादातर बड़े सितारे अपना पर्सनल मेकअप मैन रखते हैं. सन 1940 के दशक के अंत में जब पंढरी दादा ने फिल्म कलाकारों को मेकअप करना शुरू किया तब पर्सनल मेकअप जैसा तो बहुत ही कम होता था लेकिन एक फिल्म की शूटिंग के दौरान तीन चार मेकअप आर्टिस्ट रहते थे जिससे कोई किसी को तो कोई किसी को मेकअप करके जल्दी जल्दी तैयार कर सके, जिससे शूटिंग में विलंब न हो. लेकिन पंढरी जुकर के हाथों में कुछ ऐसा जादू था कि इनके मेकअप के बाद कलाकारों के चेहरों पर कुछ अलग ही निखार आ जाता था.

इससे फिल्म के नायक, नायिका ही नहीं खलनायक और अन्य मुख्य कलाकार भी पंढरी दादा से ही मेकअप कराने को प्राथमिकता देते थे. इस सबके चलते बड़े से बड़े स्टार भी दादा का घंटों इंतज़ार करने के लिए भी तैयार हो जाते थे.

यही कारण है कि सन 1950 से 1990 के दशक के 40 बरसों में तो पंढरी साहब को दम मारने की फुर्सत नहीं होती थी. वह सुबह 5 बजे घर से निकलते और रात एक बजे घर लौटते थे. उस दौर में शायद ही कोई बड़ा सितारा ऐसा रहा हो जिसका मेकअप पंढरी जुकर ने न किया हो. उस समय के अधिकतर बड़े प्रॉडक्शन हाउस के साथ पंढरी जी ने काम किया. जिनमें वी शांताराम, कमाल अमरोही, ख्वाजा अहमद अब्बास, राज कपूर, बी आर चोपड़ा, चेतन आनंद, यश चोपड़ा, मनोज कुमार, सुनील दत्त, गुलशन राय और सुभाष घई के प्रॉडक्शन हाउस शामिल हैं.

सभी दिग्गज सितारों का किया मेकअप पंढरी दादा का काम और वह दौर कितना शानदार रहा होगा इस बात की कल्पना इससे ही की जा सकती है कि उन्होंने लगभग सभी बड़े हीरो के चेहरों को संवारा. उन्हें वह गेटअप दिया जिसमें उतरकर जब सितारे संवाद बोलते थे तो सिनेमा घर तालियों से गूंज उठते थे. जिन बड़े और लोकप्रिय अभिनेताओं के दादा ने मेकअप किए उनकी एक लंबी लिस्ट है. इनमें यदि प्रमुख नाम गिनाए जाएं तब भी दिलीप कुमार,बलराज साहनी, राज कपूर, देव आनंद, प्रदीप कुमार, संजीव कुमार, शम्मी कपूर, शशि कपूर, प्राण, प्रेमनाथ, धर्मेन्द्र, मनोज कुमार, सुनील दत्त, राजेश खन्ना, फिरोज खान, संजय खान, अमिताभ बच्चन, विनोद खन्ना, रणधीर कपूर, ऋषि कपूर, अनिल कपूर, जैकी श्राफ, सनी देओल संजय दत्त, आमिर खान और शाहरुख खान जैसे कई नाम याद हो आते हैं.

उधर नायिकाओं की बात की जाये तो यह लिस्ट और भी लंबी हो जाती है. जिन बड़ी अभिनेत्रियों के मेकअप पंढरी दादा ने किए उनमें –मीना कुमारी, नर्गिस, मधुबाला, गीता बाली, वहीदा रेहमान, संध्या, जयश्री, राजश्री, नूतन, सायरा बानो, आशा पारिख, साधना, बबीता, तनूजा, मुमताज़, हेमा मालिनी, रेखा, डिम्पल कपाड़िया, राखी, परवीन बॉबी, रीना रॉय, स्मिता पाटील, अनीता राज और अमृता सिंह के नाम हैं. तो दूसरी ओर श्रीदेवी, माधुरी दीक्षित, जूही चावला, मीनाक्षी शेषाद्री, मनीषा कोइराला, करिश्मा कपूर, करीना कपूर, काजोल, फरहा, तब्बू, सुस्मिता सेन, ममता कुलकर्णी, मृणाल कुलकर्णी, रीमा लागू, वर्षा उसगांवकर, अश्विनी भावे, ग्रेसी सिंह, सुलभा देशपांडे, प्रिया तेंदुलकर, सुधा चंद्रन, स्मृति ईरानी और साक्षी तंवर तक और भी कई नाम हैं.

शांताराम के साथ की थी करियर की शुरुआत

यूं पंढरी जुकर मेकअप की दुनिया में नहीं आना चाहते थे. वह खुद और उनके घर वाले इस काम को अच्छा नहीं मानते थे. लेकिन घर के आर्थिक हालात खराब होने पर पंढरी जुकर को मेकअप की दुनिया में आने का फैसला मजबूरी में लेना पड़ा. उस समय राजकमल मंदिर स्टूडियो के साथ जुड़े एक मेकअप मैन बाबा वर्धन ने पंढरी जुकर को फ़िल्मकार वी शांताराम से मिलवाया तो उन्होंने दादा को 70 रुपए के मासिक वेतन पर अपने यहां जगह दे दी.

पंढरी जुकर के बड़े पुत्र तेजस जुकर से जब उनके पिता को लेकर हमने बात की तो वह बोले-–“दादा हम सबके साथ अपनी पुरानी यादों को अक्सर साझा करते रहते थे. सबसे पहले उन्होंने वी शांताराम जी का ही मेकअप किया था, वह तारीख थी 3 फरवरी 1948, शांताराम जी को उनका काम पसंद आया तभी उन्होंने दादा को सलेक्ट कर लिया. दादा ने जिस फिल्म में पहली बार मेकअप किया उसका नाम था-‘अमर भोपाली’. बस उसके बाद अपने हुनर से वह सभी का दिल जीतते रहे. अपने पूरे करियर में उन्होंने करीब 400 फिल्मों में काम किया. फिल्म ‘परदेस’ के लिए दादा रूस गए तो वहाँ इनके काम को देखकर वहाँ की सरकार ने अपनी ओर से ही मुफ्त में मेकअप का डिप्लोमा कराया, जिससे उन्हें मेकअप की बहुत सी नयी तकनीकों का ज्ञान हुआ और आगे चलकर उनके करियर में उस सबसे बहुत फायदा हुआ.‘’

मीना कुमारी भी आती थीं घर तेजस बताते हैं कि बहुत से कलाकारों के साथ दादा के इतने अच्छे रिश्ते थे कि उनमें से कुछ तो हमारे घर आते रहते थे. जिनमें मीना कुमारी तो हम लोगों के जन्म दिन पर भी हमारे यहां आती थीं और हमारे परिवार के अन्य शादी समारोह में भी. दिलीप कुमार और सुनील दत्त जी तो शूटिंग के लंच ब्रेक में अक्सर दादा के साथ ही लंच करते थे. हालांकि तब दादा इतने बिजी थे कि घर परिवार के लिए समय नहीं दे पाते थे. जिस बात का अफसोस उन्हें हमेशा रहता था. जब 1991 में हमारी दादी और फिर 1993 में हमारी माँ का निधन हो गया तो दादा काफी उदास रहने लगे और काफी हद तक टूट गए. तब उन्होंने धीरे धीरे अपना काम कम किया और परिवार के लिए ज्यादा समय देना शुरू कर दिया. बाद में उन्होंने अपने घर पर ही एक मेकअप अकादमी भी स्थापित की जिसमें उनसे मेकअप सीखने के लिए दूर दूर से लोग आते थे. यहाँ तक कुछ छात्र पाकिस्तान से भी आए. आज हमारी फिल्मी दुनिया में जितने मेकअप आर्टिस्ट हैं उनमें से आधे तो दादा के ही शिष्य हैं. जिनमें आज के चर्चित मेकअप मैन दीपक सावंत, मिकी कोंटरेकटर, भारत गोदम्बे, विध्याधर, भट्टे और बहादुर सिंह जैसे कई नाम हैं.

श्रीदेवी बनाना चाहती थीं पर्सनल मेकपमैन श्रीदेवी जैसी प्रख्यात अभिनेत्री पंढरी जुकर के काम से इतना प्रभावित थीं कि वह इन्हें अपना पर्सनल मेकअप मैन नियुक्त करना चाहती थीं. श्रीदेवी ने इसके लिए इन्हें कहा कि आप सब कुछ छोड़कर सिर्फ मेरे साथ ही काम कीजिये लेकिन दादा ने मना कर दिया. आज के दौर की ही नहीं पुराने दौर की भी ऐसी कई अभिनेत्रियाँ हैं जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत दादा के साथ ही की कुछ की तो अंतिम फिल्म भी दादा के साथ थी. माधुरी दीक्षित को भी दादा ने पहली बार तब मेकअप किया था जब सुभाष घई ने उन्हें अपनी फिल्म ‘कर्मा’ के एक गीत के लिए बुलाया था. तब माधुरी खास सुंदर नहीं लगती थीं. लेकिन पंढरी दा ने घई से कहा आप इस लड़की को हीरोइन ले लीजिये. तब घई ने माधुरी में खास दिलचस्पी नहीं ली. जब एन चंद्रा ने माधुरी को ‘तेजाब’ में लिया तो माधुरी का मेकअप दादा ने ही किया और उसके बाद जब माधुरी ‘एक दो तीन, चार पाँच छै सात आठ नौ दस ग्यारह’ करते हुए कैमरे के सामने उतरीं तो माधुरी का जादू सभी पर चल गया.

दादा अपने निधन से करीब दो साल पहले तक मेकअप का काम कभी कभार करते रहते थे. 85 की उम्र में भी मेकअप करते हुए उनके हाथ नहीं काँपते थे. कभी कोई पुराना कलाकार या फ़िल्मकार उन्हें अपनी फिल्म के लिए किसी बड़े काम के लिए बुलाता तो वह वहाँ चले जाते थे. यहाँ तक वहीदा रहमान और आशा पारिख जैसी दिग्गज अभिनेत्रियाँ भी अपने पर्सनल शो या किसी अन्य बड़े कार्यक्रम के दौरान मेकअप के लिए दादा को ही बुलाती थीं.

सीरियल के लिए भी किया मेकअप देश में सीरियल युग शुरू होने पर पंढरी जुकर ने सन 1985 से सीरियल आर्टिस्ट के लिए भी मेकअप करना शुरू कर दिया था. एकता कपूर के तो हम पाँच, क्योंकि सास भी कभी बहू थी, कहानी घर घर की, कहीं किसी रोज, कुसुम और कसौटी ज़िंदगी की जैसे कई बड़े सीरियल तो दादा ने किए ही. जिससे तुलसी, पार्वती, कोमोलिका, रमोला सिकंद, मिस्टर बजाज, अनुराग बसु और प्रेरणा जैसे कई चरित्रों को ऐसा गेटअप मिला जो आज भी भुलाए नहीं भूलता. एकता कपूर के इन मेगा सीरियल से पहले भी दादा ने मुजरिम हाजिर, चुनौती और कैम्पस जैसे चर्चित सीरियल किए.

अंतिम समय बॉलीवुड रहा नदारद हालांकि इस बात का दुख रहता है कि जब बॉलीवुड की किसी पुरानी हस्ती का निधन होता है तो उसके अंतिम संस्कार में उनके पुराने संगी साथी बहुत कम ही पहुँचते हैं. पंढरी दादा के अंतिम संस्कार में भी सिर्फ साक्षी तंवर, अश्विनी भावे, गौरी प्रधान, हितेन तेजवानी, वंदना गुप्ते और अनुभव सिन्हा जैसे गिने चुने लोग ही पहुंचे. यूं अमिताभ बच्चन ने अपने ट्विटर पर पंढरी दादा को काफी भावुकता से याद किया और बताया कि उनका पहला मेकअप ‘सात हिन्दुस्तानी’ के समय दादा ने ही किया था. साथ ही माधुरी दीक्षित, जूही चावला, मनीषा कोइराला सहित कई अन्य कलाकारों ने दादा को ट्विटर पर नमन करते हुए उनके साथ अपने फोटो शेयर किए. जूही चावला ने तो पंढरी दादा को याद करते हुए एक बयान भी दिया जिसमें उन्होंने कहा कि वह महसूस करती है कि दादा सभी मेकअप आर्टिस्ट के उस्ताद थे.

मिले कई सम्मान भी पंढरी साहब को मेकअप क्षेत्र में किए गए अपने असाधारण योगदान के लिए कई पुरस्कारों से नवाजा गया. जिसमें मुंबई की फाल्के अकादमी द्वारा दादा साहब फाल्के पुरस्कार, महाराष्ट्र राज्य सरकार द्वारा उनकी दो मराठी फिल्मों के लिए दो बार सर्वश्रेष्ठ मेकअप मैन का राजकीय पुरस्कार, मुंबई दूरदर्शन द्वारा मेकअप मैन ऑफ द मिलेमियम एवं जीवन गौरव अवार्ड और वी शांताराम अवार्ड जैसे पुरस्कार शामिल हैं.

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