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कभी मुहब्बत का दूसरा नाम था मधुबाला, लेकिन वो क्यों जिंदगी भर प्यार के लिए तरसती रहीं?

कभी प्यार का दूसरा नाम था मधुबाला. बड़े बड़े लोगों ने प्यार की इस मल्लिकाको पाने की हसरत रखी. उनकी जिंदगी में कई लोग आए फिर भी अपनी अंतिम सांसों तक प्यार के लिए तरसती रही मधुबाला.

जिंदगी भर प्यार के लिए तरसती रही प्यार की मल्लिका मधुबाला. इसे संयोग कहें या कुछ और जिस मधुबाला को प्यार की मल्लिका और भारतीय सिनेमा की वीनस कहा जाता रहा है. वह खुद अपनी असली जिंदगी में प्यार के लिए अंत तक तरसती रही. जबकि मधुबाला की सुंदरता ऐसी थी कि कोई बड़ी से बड़ी हस्ती भी उन्हें एक निगाह देख लेती तो उसका मन मधुबाला के लिए मचलने लगता था. इसीलिए मधुबाला की जिंदगी में कई लोग आए लेकिन मधुबाला किसी से भी वह प्यार ना पा सकीं जिसकी उन्हें चाहत थी. यह भी संयोग है कि मधुबाला का जन्म सन 1933 की उस 14 फरवरी को हुआ. जो प्रेम दिवस यानी वैलेंटाइन-डे के रूप में मनाया जाता है. लेकिन तब भी मधुबाला का मन प्यार के लिए प्यासा रहा.

अपनी 9 बरस की उम्र में ही बाल कलाकार के रूप में फिल्मों में अपना कदम रखने वाली मधुबाला का यूं तो असली नाम मुमताज जहां देहलवी था. अपने वालिद अताउल्लाह खान और वालिदा आयशा बेगम की 11 संतानों में वह पांचवीं संतान थीं. मुमताज का जन्म दिल्ली में हुआ लेकिन वह बचपन से ही इतनी खूबसूरत थीं कि उसकी चर्चा मुंबई तक पहुंच गयी. उस समय की दिग्गज फिल्मकार और अभिनेत्री देविका रानी ने मुमताज को देखा तो दिल्ली से मुंबई आकर रहने को कहा, साथ ही देविका रानी ने ही उन्हें नया नाम दिया मधुबाला. कौन जानता था कि यह मधुबाला नाम भारतीय फिल्म इतिहास के पन्नों पर स्वर्ण अक्षरों में अंकित होकर अमर हो जाएगा. बरसों बाद भी यदि हम हिंदी सिनेमा की बेहतरीन अभिनेत्रियों की बात करते हैं तो उसकी शुरुआत मधुबाला से होती है.

महल, अमर, मिस्टर एंड मिसेज 55, शीरीं फरहाद, यहूदी की लड़की, गेट वे ऑफ इंडिया, फाल्गुन, काला पानी, हावड़ा ब्रिज, चलती का नाम गाडी, जाली नोट, बरसात की रात, झुमरू, हाफ टिकट और मुग़ल-ए-आज़म से मधुबाला ने अपने शानदार अभिनय की जो बानगी पेश की वह आज भी बेमिसाल है. सबसे बेहतर अदाकारा को कोई पुरस्कार नहीं मिला यह भी एक क्रूर मजाक सा लगता है. साथ ही पुरस्कारों की दुनिया की व्यवस्था की कलई भी खोलता है कि जिसे पूरा भारतीय सिनेमा ही नहीं दुनिया के बड़े से बड़े फिल्मकार भी हिंदी सिनेमा की सबसे बेहतरीन अदाकारा मानते हैं, उसे जिंदगी में कभी कोई पुरस्कार नहीं मिला. जबकि ’मुग़ल-ए-आज़म’ में उनकी अनारकली की अमर भूमिका के लिए तो यह माना जा रहा था कि सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार मधुबाला को ही मिलेगा लेकिन उस बरस भी यह पुरस्कार उनकी जगह फिल्म ‘घूंघट’ के लिए अभिनेत्री बीना राय की झोली में चला गया.

कभी मुहब्बत का दूसरा नाम था मधुबाला, लेकिन वो क्यों जिंदगी भर प्यार के लिए तरसती रहीं?

उनका पहला प्यार भी बीना राय को ही मिला. यहां फिर एक संयोग है कि सन 1961 में जहां मधुबाला को मिलने वाला संभावित पुरस्कार उनकी जगह बीना राय को मिला, वहां दस बरस पहले मधुबाला का पहला प्यार भी बीना राय के पास चला गया. वैसे कहा जाता है कि मधुबाला की जिंदगी में कई पुरुष आए. जिनमें उनके निर्माता और नायक अधिक हैं. लेकिन उनके पहले प्यार के रूप में जिस व्यक्ति को माना जाता है वह थे अभिनेता प्रेमनाथ. यूं प्रेमनाथ से पहले मधुबाला को पहली बार अपनी फिल्म ‘नील कमल’ में नायिका के रूप में पेश करने वाले केदार शर्मा भी मधुबाला के दीवाने थे और मधुबाला को सबसे पहले मशहूर करने वाली फिल्म के निर्देशक कमाल अमरोही भी उनसे शादी करना चाहते थे. हालांकि मधुबाला से ये लोग तो मोहब्बत करते थे लेकिन मधुबाला खुद इनसे मोहब्बत नहीं करती थीं.

इस बात से खीझ कर कमाल अमरोही ने उस दौर की एक और बेहतरीन और सुंदर अभिनेत्री मीना कुमारी से शादी करके, यह साबित किया था कि तुमने मुझसे शादी नहीं की मगर मैं तुम्हारे टक्कर की ही अभिनेत्री से शादी करने का दम खम रखता हूं. हालांकि कमाल और मीना कुमारी की शादी असफल रही क्योंकि वह आवेश में आकर की गई शादी थी. इधर मधुबाला की सन 1951 में दो अभिनेताओं से मुलाकात हुई. एक दिलीप कुमार से, दूसरी प्रेमनाथ से. मधुबाला की दिलीप कुमार से मुलाकात तब हुई जब उन्हें उनके साथ फिल्म ‘तराना’ में नायिका लिया गया. साथ ही लगभग इसी समय प्रेमनाथ के साथ भी उन्हें फिल्म ‘बादल’ मिली. ‘तराना’ में मधु की तराना की ही भूमिका थी और ‘बादल’ में रत्ना की. दिलीप कुमार की उम्र उस समय 29 साल थी, प्रेमनाथ की 25 साल और मधुबाला की 18 साल. ऐसे में दिलीप कुमार मधुबाला के लिए उम्र में ज्यादा बड़े थे और प्रेमनाथ उनसे सिर्फ 7 साल बड़े थे.

कभी मुहब्बत का दूसरा नाम था मधुबाला, लेकिन वो क्यों जिंदगी भर प्यार के लिए तरसती रहीं?

जल्द ही प्रेमनाथ और मधुबाला का प्रेम परवान चढ़ने लगा. मधुबाला को प्रेमनाथ काफी पसंद थे. लेकिन मधुबाला के वालिद नहीं चाहते थे कि उनकी जिस बेटी की सिनेमा की दुनिया में धूम है वह अभी शादी करे. सच यह भी था कि मधुबाला का लम्बा चौड़ा परिवार अब उनकी कमाई पर ही आश्रित हो चुका था. इधर प्रेमनाथ का परिवार भी मधुबाला के मुस्लिम धर्म होने के कारण इस रिश्ते को शादी के लिए स्वीकारने में असहज था. फिर भी प्रेम और मधु दोनों एक दूसरे को दिल ओ जान से चाहते थे. पर तभी दिलीप कुमार की नजरों में भी मधुबाला इस कद्र बस गयीं कि वह उनकी नजरों से दिल में पहुंच गयीं. दिलीप कुमार का प्रेम तब कामिनी कौशल से चल रहा था लेकिन वह अब मधुबाला की तरफ ज्यादा आकर्षित होने लगे. दिलीप कुमार और प्रेमनाथ में अच्छी दोस्ती थी. अपने दोस्त का अपनी प्रेमिका की तरफ रिझान देख प्रेमनाथ ने अपने प्यार की कुर्बानी दे दी. मधुबाला पूरी तरह दिलीप कुमार की हो जाएं इसके लिए प्रेमनाथ ने सन 1952 में अभिनेत्री बीना राय से शादी कर ली. यह देख मधुबाला का दिल टूट गया. उनका पहला प्यार प्रेमनाथ अब बीना राय का हो गया था. दिलीप कुमार भी नहीं हो पाए.

मधुबाला के दिलीप कुमार की अब मधुबाला के प्रति दीवानगी काफी बढ़ चुकी थी. एक तो वह ‘तराना’ के बाद ‘संगदिल’ और ‘अमर’ फिल्म में काम कर चुके थे. दूसरा इसका एक कारण यह भी था कि सन 1955 में कामिनी कौशल ने भी दिलीप कुमार की जगह अपने जीजा बीएस सूद से शादी कर ली थी. क्योंकि कामिनी कौशल की बहन का निधन हो गया था. ऐसे में कामिनी ने अपनी बहन की दो बेटियों और उनकी गृहस्थी संभालने के लिए अपने प्यार दिलीप कुमार का त्याग कर दिया. लेकिन प्रेमनाथ और कामिनी कौशल जैसी दो हस्तियों के अपने अपने प्यार के त्याग के बाद भी दिलीप कुमार और मधुबाला की शादी नहीं हो सकी. यूं दिलीप कुमार और मधुबाला अब ‘मुग़ल ए आज़म’ में साथ काम कर रहे थे. ‘मुग़ल ए आज़म’ को पूरा होने में करीब 10 साल लग गए थे. इसलिए इसकी शूटिंग लम्बे समय तक होने से अब मधुबाला भी दिलीप कुमार के प्यार में पूरी तरह गिरफ्तार हो चुकी थीं. लेकिन मधुबाला के पिता को यह रिश्ता बिलकुल नहीं भाता था. अताउल्लाह खान को लगता था, दिलीप उम्र में मधुबाला से ज्यादा बड़े हैं. फिर तब तक मधुबाला की दिल की बीमारी का भी पता लग चुका था. लेकिन तब ऐसा नहीं था कि मधुबाला जल्द ही दुनिया को अलविदा कह देंगी. आसार यही थे कि अब जल्द ही ये दोनों शादी कर लेंगे. लेकिन तभी फिल्म ‘नया दौर’ ने आकर एक नयी कहानी लिख दी.

सन 1956 में एक ओर ‘मुग़ल ए आज़म’ की शूटिंग भी चल रही थी और तभी बीआर चोपड़ा ने दिलीप कुमार और मधुबाला को लेकर अपनी फिल्म ‘नया दौर’ शुरू करनी चाही. जिसकी शूटिंग मध्यप्रदेश में भी होनी थी. लेकिन अताउल्लाह खान को लगा कि यदि इसकी शूटिंग मध्यप्रदेश में होगी तो दिलीप और मधुबाला को उनकी गैर मौजूदगी में और करीब आने के मौके मिलेंगे. इसलिए उन्होंने चोपड़ा को कहा कि वह मुंबई में सेट लगाकर ही इसकी शूटिंग कर लें. लेकिन इसके लिए चोपड़ा तैयार नहीं हुए और उन्होंने मधुबाला की जगह वैजयंती माला को ले लिया. यह देख अताउल्लाह ने चोपड़ा पर मुकदमा कर दिया. मुकदमे में दिलीप कुमार अपने निर्माता के पक्ष में आए. यह देख मधुबाला भी दिलीप कुमार से खफा हो गयीं. लेकिन अताउल्लाह तो दिलीप के और भी खिलाफ हो गए. वह मुकदमा हार गए और चोपड़ा जीत गए.

कभी मुहब्बत का दूसरा नाम था मधुबाला, लेकिन वो क्यों जिंदगी भर प्यार के लिए तरसती रहीं?

इसके बाद भी दिलीप कुमार ने मधुबाला को एक दिन मुग़ल ए आज़म’ के सेट पर कहा, ''अब भी देर नहीं हुई हैं. आओ हम निकाह कर लेते हैं.'' इस पर मधुबाला ने कहा, ''ठीक है बस एक बार तुम हमारे घर आकर अब्बा से सॉरी बोल,उन्हें गले से लगा लो.'' लेकिन इस पर दिलीप ने मधु से कहा-ऐसा मुमकिन नहीं है, बेहतर होगा तुम अपने वालिद को छोड़ दो. इस पर मधुबाला राजी नहीं हुईं और दोनों में अलगाव हो गया. वह शादी शुदा होकर मरना चाहतीं थीं. मधुबाला दिलीप कुमार के अलगाव के बाद मधुबाला की जिंदगी में किशोर कुमार आए. किशोर से मधु की अच्छी जान पहचान 1958 -59 के दिनों में तब बढ़ी जब वे साथ में फिल्म ‘चलती का नाम गाडी’ और ‘महलों के ख्वाब’ की शूटिंग कर रहे थे. उन दिनों किशोर कुमार का अपनी पहली पत्नी रुमा से तलाक हुआ ही था.

उधर मधुबाला अपने दिलीप कुमार से ब्रेकअप से दुखी थीं. दोनों एक दूसरे का सहारा बने. हालांकि तब तक मधुबाला के दिल में छेद होने की समस्या बढ़ने लगी थी. उन्हें इसके चलते लंग्स में भी तकलीफ रहने लगी थी. कहते हैं मधुबाला को तब यह अहसास हो चला था कि वह अब ज्यादा दिन जिंदा नहीं रहेंगी. तब एक बार उन्होंने अपने वालिद से कहा था – मैं बिना शादी किये नहीं मरना चाहती. यह सुन अताउल्लाह फफक कर रो पड़े थे. ऐसे में जब मधुबाला ने किशोर कुमार से शादी करने के लिए कहा तो वह तैयार हो गए. लेकिन वह चाहते थे कि शादी से पहले मधुबाला को लन्दन में बड़े डॉक्टर्स को दिखाया जाए. इस पर किशोर ने कहा हम शादी करके हनीमून के लिए लन्दन चले जायेंगे. वहीं डॉक्टर्स को भी दिखा देंगे. सन 1960 में दोनों शादी करके लन्दन चले गए. जहां डॉक्टर्स ने कहा कि उनके दिल के छेद की बीमारी विकराल रूप ले चुकी है. उन्हें आराम करना चाहिए था. पर फिल्मों में दिन रात काम करने से हालात बिगड़ गए है इसलिए वह अब करीब दो साल ही जिंदा रह सकेंगी.

कभी मुहब्बत का दूसरा नाम था मधुबाला, लेकिन वो क्यों जिंदगी भर प्यार के लिए तरसती रहीं?

यह सुन दोनों सकते में आ गए. लेकिन मधुबाला वापस मुंबई आकर भी अपनी फिल्मों को पूरा करने में जुट गयीं. उधर किशोर कुमार ने मधुबाला की खराब हालात देख उन्हें अपने घर में साथ ना रखकर,उन्हें एक अलग फ्लेट में रहने के लिए भेज दिया. यूं उनकी तीमारदारी के लिए किशोर ने एक कार, ड्राईवर और दवाइयों का प्रबंध तो कर दिया. पर मधुबाला की गंभीर बीमारी के बाद, उनका मधुबाला से जल्द ही मोह भंग हो गया. वह खुद दो तीन महीने में कभी कभार ही मधुबाला से मिलने जाते थे. यह देख मधुबाला की अंतिम जिंदगी रो रो कर दुखों में ही कटी. वह यूं तो किशोर से शादी के 9 साल बाद इस दुनिया से गयीं. लेकिन इस दौरान मधुबाला का आकर्षक मद मद रुप हड्डियों का ढांचा बन गया. उनका खिलखिलाता चेहरा पूरी तरह उदास हो बुझ सा गया और 23 फरवरी 1969 को यह सौन्दर्य की देवी इस बेदर्दी जहां से कूच कर गयीं.

लेकिन आज 50 साल बाद भी ये कहा जाता है कि जिसकी एक झलक के लिए सभी के दिल बेताब रहते थे, जिसकी एक हंसी वीरानियों में भी रौशनी भर देती थी. अभिनय और सुंदरता में जिनका दूर-दूर तक कोई सानी नहीं था. जिसका प्रेम पाने के लिए लोग मुरादें मांगते थे, वह रूप –प्रेम की मल्लिका अपनी अंतिम सांसों तक प्यार पाने के लिए तरसती रही.

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(नोट- उपरोक्त दिए गए विचार व आंकड़े लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.)
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