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क्या कोरोना वायरस को हरा पाएगा लॉकडाउन-2 ? जानिए

क्या लॉकडाउन एक के खत्म होने के बाद लॉकडाउन से कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में मदद मिलेगी. जानिए

आज बैसाखी है, किताबों में लिखा होता है बैसाखी यानी वो त्योहार जो फसलों के पकने की खुशी का प्रतीक है इसकी असली खुशी उन किसानों के चेहरे पर होती है जिन्होंने पूरा वक्त लगा कर तमाम मुश्किलों का सामना कर फसल को तैयार किया होता है. उनकी उम्मीद पीएम मोदी से सबसे ज्यादा है. जगह-जगह से खबरें आ रही हैं कि गेंहू और सरसों जैसी फसल तैयार हैं लेकिन कटाई में दिक्कत आ रही है. 14 तारीख को लॉकडाउन-1 खत्म हो रहा है ऐसे में पीएम मोदी से ये उम्मीद बेमानी नहीं है कि अन्नदाता की इस उम्मीद पर वो खरा उतरें.

सुबह दस बजे पीएम मोदी देश के नाम संबोधन करने वाले हैं. आमतौर पर मुहावरों की भाषा में कहा जाता है कि उन पर पूरे देश की निगाहें होंगी. इस बार ये मुहावरा नहीं है, लोगों के कान, निगाहें उनके एक-एक शब्द पर लगी होगीं. क्या कल लॉकडाउन खत्म करने का ऐलान कर देंगे? क्या बोलेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी?

1-लॉकडाउन आगे बढ़ने वाला है

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पीएम की मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक से निकलते ही ऐलान कर दिया था कि लॉकडाउन आगे बढ़ने वाला है. पंजाब, महाराष्ट्र, बंगाल, तेलंगाना जैसे राज्य पहले ही लॉकडाउन को 30 अप्रैल तक बढ़ा चुके हैं. ऐसे में इस बात में शक नहीं कि पीएम मोदी भी ऐसा ही एलान देश भर के लिए करने वाले हैं.

दो आंकड़े इस तरफ इशारा करते हैं कि लॉकडाउन तो बढ़कर रहेगा. पहला आईसीएमआर की एक आंतरिक स्टडी जो बताती है कि अगर लॉकडाउन और रोकथाम के कदम ना उठते तो 15 अप्रैल तक देश में 8 लाख 20 हजार कोरोना केस होते. अगर लॉकडाउन ना होता और सिर्फ रोकथाम के कदम उठाए जाते 15 अप्रैल तक देश में कोरोना केस 1लाख 20 हजार तक पहुंच जाते. ऐसा हुआ नहीं. अब भी लॉकडाउन से पीछे हटे तो शायद अब तक मिले फायदे खत्म हो जाएंगे. इसलिए लॉकडाउन तो लागू होगा लेकिन कुछ नई शर्तों के साथ.

2-जान भी, जहान भी

बड़ी समस्या ये है कि लॉकडाउन से जान तो बचा लेंगे लेकिन रोजगार? बदलती अर्थव्यवस्था में पहले ही झटके लग रहे थे अब ये नया संकट करोड़ों लोगों को बेरोजगार बना देगा. यही वजह है कि पीएम जान भी, जहान भी के रास्ते आगे बढ़ेंगे.

मतलब ये कि लघु उद्योगों को लॉकइन के सहारे छूट दी जा सकती है. हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने संकेत दिया कि कंपनियां मजदूरों के खाने-पीने, सोने रहने और सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखे तो काम चलता रहेगा.

फसलों की कटाई के लिए किसानों को खास छूट मिल सकती है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संकेत दिया कि अब तैयारी किसानों की फसल सीधे घर से खरीदने की है.साथ ही निर्माण सेक्टर में बड़े पैमाने पर मजदूर लगे हैं. ऐसे में मजदूरों के हितों में निर्माण के कुछ सेक्टर खोले जा सकेंगे. मत्स्य पालन से जुड़े लोगों को भी लॉकडाउन से राहत दी जा सकती है.

लेकिन बड़ी समस्या बड़े उद्योगों के लिए है जो बंद पड़े हैं, जिन पर देश की अर्थव्यवस्था भी निर्भर करती है. देखना ये है कि इन उद्योगों के लिए पीएम मोदी क्या ऐलान करते हैं.

3-सोशल डिस्टेंसिंग का सहारा

कंपनियां बंद हैं और मजदूर परेशान हैं. ऐसे में लॉकडाउन स्थाई नहीं हो सकता. लॉकडाउन को चरणों में खोला जाएगा लेकिन उससे पहले सोशल डिस्टेंसिंग को सरकार बड़ा हथियार बनाने जा रही है जिसका संकेत देश के स्वास्थ्यमंत्री डॉ हर्षवर्धन दे चुके हैं. डॉ हर्षवर्धन के मुताबिक सोशल डिस्टेंसिंग जीवन का हिस्सा बनने जा रही है. ICMR की रिपोर्ट कहती है कि - एक कोरोना संक्रमित 30 दिन में 406 लोगों को संक्रमित कर सकता है. यही वजह है कि सरकार अभी चौकन्ना रहना चाहती है. इसलिए पूरी संभावना है कि पीएम मोदी इसका जिक्र जरूर करेंगे.

4-मास्क बनेगा हथियार

मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में पीएम मोदी मुंह पर गमछा रखे हुए नजर आए. अगर देखें तो पीएम को मास्क उपलब्ध हो सकता था. वीडियो कॉन्फ्रेंस में वो बिना गमछे के भी आ सकते थे. लेकिन पीएम मोदी ने मुंह पर गमछे का इस्तेमाल एक संदेश देने के लिए किया. ये संदेश उनके संबोधन में भी नजर आ सकता है. दिलचस्प ये कि भारत का मॉस्क के प्रति ये प्यार WHO के निर्देशों से अलग है. WHO कहता रहा है कि मास्क सिर्फ उनके लिए जरूरी है जो बीमार हैं ताकि उनसे संक्रमण दूसरों को ना फैले. लेकिन भारत में राज्य सरकारें पहले ही बिना मास्क पहने घर से निकलने को गैरकानूनी बना चुके हैं. चंडीगढ़ में तो इसे लेकर FIR तक दर्ज हो गई. वजह हैं वो स्टडी जो कहती है कि कोरोना का वायरस कुछ देर हवा में रह सकता है.

5-जोन में बंटेगा भारत

फिर क्या मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के सहारे लॉकडाउन खुल जाएगा? ऐसा लगता नहीं. सभी सरकारें रेड जोन और ओरेंज जोन की पहचान में लग गई हैं. लेकिन एक तीसरा जोन है ग्रीन जोन. जहां कोरोना फैला नहीं है. सवाल ये है कि ऐसे इलाकों में क्या काम काज बंद रखा जाए? सरकारों की कोशिश है कि ग्रीन जोन में काम-काज को शर्तों के साथ शुरू किया जाए. नई रणनीति के तहत उन रेड जोन इलाकों की पहचान शुरू हो गई है इऩ इलाकों में कर्फ्यू के सहारे कोरोना से निपटा जाएगा. ओरेंज जोन में निगरानी पर जोर रहेगा. पीएम मोदी के संबोधन में इसका जिक्र हो सकता है. मतलब ये कि छोटी-छोटी इकाइयां बनाकर हालात की समीक्षा की जाएगी. केसों को देखते हुए तुरंत फैसले लिए जाएंगे. लेकिन इन सबके बीच आर्थिक गतिविधियां धीरे-धीरे शुरू की जा सकती हैं.

6-आरोग्य सेतु एप पर जोर रहेगा

आरोग्य सेतू एप को सरकार प्रमोट कर रही है. इस ऐप से कोरोना संक्रमित लोगों के संपर्क में आने का पता लगता है. सूत्रों के मुताबिक आरोग्य सेतु एप ट्रेवल करने के लिए ई-पास की तरह इस्तेमाल हो सकती है. पीएम मोदी देश के नाम संबोधन में इसका जिक्र कर सकते हैं.

सवाल ये है कि क्या कोरोना को खत्म किया जा सकता है? मेरा मानना है कि बिना वैक्सीन के तो नहीं. दवाई बनने के बाद भी स्वाइन फ्लू खत्म नहीं हो पाया है. कोरोना का वायरस अभी दुनिया भर में घूम रहा है और घूमता रहेगा. ऐसे में ये वायरस कभी भी लौट कर आ सकता है. खतरा इस बात का भी है कि कोई दुश्मन इसे हथियार की तरह इस्तेमाल भी कर सकता है

खतरा ये भी है कि कोरोना कुछ मरीजों में लौट कर आ रहा है. मतलब जो पहले नेगेटिव थे वो बाद में पॉजिटिव हो गए. ऐसे में सावधानी ही एकमात्र जरिया है जिसके लिए कोरोना की स्पीड को रोक सकते हैं. मतलब सरकार को इतना वक्त मिलता रहे कि अगर कई संक्रमित निकले तो उसकी चेन की पहचान कर इलाज किया जा सके.

अर्थव्यवस्था को रोककर हम एक मुसीबत को टाल कर दूसरी को आमंत्रण दे रहे हैं. जाहिर है अब लॉकडाउन-2 अर्थव्यवस्था के खुलने का पहला चरण होगा और इसकी झलक प्रधानमंत्री के संबोधन में नजर आ सकता है.

(उपरोक्त दिए गए विचार व आंकड़े लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.)

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