श्रम अधिकार कार्यकर्ता नवदीप कौर जेल से निकलीं बाहर, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने दी जमानत

सोनीपत की एक अदालत के आदेश पर 25 जनवरी को सोनीपत के सिविल अस्पताल में कौर का मेडिकल परीक्षण किया गया था. 23 वर्षीय कार्यकर्ता ने अपनी जमानत याचिका में दावा किया था कि उन्हें 12 जनवरी को सोनीपत पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद एक पुलिस थाने में गंभीर रूप से पीटा गया था. हरियाणा पुलिस ने हालांकि आरोप को 'निराधार' बताया था.

Continues below advertisement

चंडीगढ़ः श्रम अधिकार कार्यकर्ता नवदीप कौर को जेल से रिहा कर दिया गया है. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी है. करीब छह सप्ताह पहले कौर को हत्या के प्रयास सहित कई आरोपों में एक आपराधिक मामला दर्ज किये जाने के बाद गिरफ्तार किया गया था. कौर को 12 जनवरी को हरियाणा के सोनीपत जिले में एक औद्योगिक इकाई का कथित तौर पर घेराव करने और एक कंपनी से धनराशि की मांग करने को लेकर गिरफ्तार किया गया था. पुलिस ने दावा किया था कि पुलिस की एक टीम पर कथित तौर पर डंडों से हमला किया गया था जिससे सात पुलिसकर्मियों को चोटें आयी थीं.

आईपीसी की धारा 307, 384, 148, 353 और 379 बी सहित कई धाराओं के तहत सोनीपत पुलिस द्वारा एक मामला दर्ज किया गया था. शुक्रवार को कौर की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति अवनीश झिंगन ने कहा कि आईपीसी की धारा 307, 332, 353 और 379-बी लागू करने का मुद्दा एक 'बहस का मुद्दा' होगा जिस पर सुनवायी के दौरान बाद में विचार किया जाएगा.

Continues below advertisement

जज ने अपने आदेश में कहा, ''कहना पर्याप्त होगा कि याचिकाकर्ता यह सुनिश्चित करने के लिए जमानत पर रहकर संयम बनाए रखेंगी कि उनके कार्यों के कारण कानून और व्यवस्था का कोई मुद्दा उत्पन्न नहीं हो.''

सिंगल बेंच ने कहा कि अनीता ठाकुर और अन्य बनाम जम्मू कश्मीर सरकार और अन्य के मामले 2016, में सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार एक अधिकार है जिसका पता मौलिक अधिकार से चलता है लेकिन यह अधिकार उचित पाबंदियों के अधीन है.

आदेश के अनुसार, ''इस अदालत के समक्ष रिकॉर्ड पर रखी गई सामग्री को देखते हुए, भारतीय दंड संहिता की धारा 307, 332, 353 और 379-बी लागू करने संबंधी मुद्दा एक बहस का मुद्दा होगा और इस पर सुनवायी के दौरान विचार किया जाएगा..''

कोर्ट ने कहा, ''याचिकाकर्ता 12 जनवरी से हिरासत में है. इस मामले की जांच चल रही है, लेकिन वह खुद याचिकाकर्ता को व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं होगा.'' कौर के वकील अर्शदीप सिंह चीमा ने कहा, ''अदालत ने नवदीव कौर की जमानत याचिका स्वीकार कर ली. हाई कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी है.''

इस बीच, एक मेडिकल जांच रिपोर्ट के अनुसार, जिसे शुक्रवार को हाई कोर्ट के समक्ष रखा गया था, कौर के शरीर पर चोट के निशान हैं. अदालत ने 24 फरवरी को हरियाणा राज्य को कौर की मेडिकल रिपोर्ट को रिकॉर्ड में रखने का निर्देश दिया था.

कौर ने यह भी दावा किया था कि उन्हें भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307 सहित विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज प्राथमिकी में आरोपी के तौर पर झूठे ही फंसाया गया. कार्यकर्ता ने यह भी दावा किया था कि उन्हें मामले में इसलिए झूठे ही फंसाया गया क्योंकि वह केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसानों के आंदोलन लिए भारी समर्थन जुटाने में सफल रही थी.

एथलीट हिमा दास बनीं DSP, बोलीं- जारी रहेगा एथलेटिक्स करियर 

Continues below advertisement
Sponsored Links by Taboola