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Shell Companies का महफूज ठिकाना क्यों बना है कोलकाता ? काले धन के 48 प्रतिशत हिस्से को ये कंपनियां बनाती है सफेद

कोलकाता की शैल कंपनियों का मायाजाल पूर्व से लेकर पश्चिम तक और उत्तर से लेकर दक्षिण तक फैला हुआ है. यही नहीं केंद्र मे उच्च पदों पर बैठे सत्तासीन से लेकर प्रदेशों के कई पूर्व और वर्तमान मुख्यमंत्रियों के खातों तक इनकी पहुंच रही है और दिल्ली सरकार भी इससे अछूती नही रही है.

नई दिल्ली: शैल कंपनियो के बारे ने केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के काले धन के 48 प्रतिशत हिस्से को शैल या कागजी कंपनियां सफेद बनाने का काम करती हैं और कोलकाता इन शैल कंपनियो के हब के तौर पर जाना जाता है. यहां लगभग 30 हजार शैल कंपनियां बताई जाती हैं. इन कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई इसलिए नहीं हो पाती है कि यहां की शैल कंपनियों का जाल दिल्ली से लेकर चारो दिशाओं मे बड़े बड़े राजनेताओं तक फैला हुआ है. कोलकाता मे जांच के दौरान एक ऐसा सीए भी पाया गया जो 800 कंपनियो की बैलेंस शीट पर एकसाथ साइन करता था.

कोलकाता को शैल कंपनियों के बड़े हब के तौर पर भी जाना जाता है. यहां के अनेक इलाके ऐसे हैं जो सरकारी दस्तावेजों मे शैल कंपनी के हब के तौर पर जाने जाते हैं. मसलन चाहे वो मशहूर मर्केटाइल बिल्डिंग हो या रविंद्रसारणी, बागडी मार्केट बिल्डिंग या फिर लेक डाऊन की कुछ इमारतें, सरकारी रिकार्ड के मुताबिक जांच के दौरान इन में से कुछ जगहों पर एक कमरे मे चार शैल कंपनियां पाई गई. इतना ही नहीं एक फ्लोर पर 20 शैल कंपनियों के तथाकथित दफ्तर मिले.

कोलकाता की शैल कंपनियों का मायाजाल पूर्व से लेकर पश्चिम तक और उत्तर से लेकर दक्षिण तक फैला हुआ है. यही नहीं केंद्र मे उच्च पदों पर बैठे सत्तासीन से लेकर प्रदेशों के कई पूर्व और वर्तमान मुख्यमंत्रियों के खातों तक इनकी पहुंच रही है और दिल्ली सरकार भी इससे अछूती नही रही है.

सरकारी दस्तावेजो में मौजूद रिकार्ड के मुताबिक देश के बड़े घोटालों के तार की बात करें तो वो कहीं ना कहीं कोलकाता से जुड़ ही जाते हैं. इन में हर घोटाला करोड़ों और सैकड़ों में है. मसलन लालू यादव परिजन घोटाला- पटना, मधु कोडा कांड - झारखंड, छगन भुजबल परिवार का मेडिकल कालेज- मुंबई, सोनिया गांधी परिवार का यंग इंडियन, 223 करोड़ का बीएसएनएल घोटाला, दिल्ली के मंत्री सतेंद्र जैन परिजन घोटाला, सारधा घोटाला, रोजवैली घोटाला, सूर्य विनायक कांड, जगन मोहन रेड्डी परिजन घोटाला आदि.

सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक इनमें से हर केस मे कोलकाता को लेकर पूछताछ हुई है और अनेक केसों मे तो गिरफ्तारियां और आरोपपत्र भी कोर्ट के सामने दायर किए जा चुके हैं, जिनमे शैल कंपनियो के बारे मे विस्तार से जानकारिया दी गई है.

आइए अब हम आपको बताते हैं कि ये शैल कंपनियां कैसे काम करती हैं. आपको यह जानकर हैरानी होगी कि सैकड़ों करोड़ रूपयों के काले धन को सफेद करने वाली इन कंपनियों के डायरेक्टर टैक्सी ड्राइवर भी हैं और किसी कंपनी मे काम करने वाले चपरासी और क्लर्क भी जिनकी सैलेरी मात्र कुछ हजार रुपये होती है. लेकिन इनसे साइन जिन दस्तावेजों पर कराए जाते हैं वो करोड़ों के होते हैं.

जानकारों के मुताबिक ज्यादातर शैल कंपनियां चार्टर्ड अकाउंटेंटों द्वारा बनाई जाती हैं. जो इस घोटाले में सबसे अहम रोल अदा करते हैं. जानकारो के मुताबिक इन शैल कंपनियो को बाकायदा सरकारी तौर पर दर्ज भी कराया जाता है और इनका पूरा रिकार्ड भी होता है कि कौन कौन कंपनी का डायरेक्टर है. कागजों मे यह भी दिखाया जाता है कि कंपनी क्या काम करती है और कई बार दस्तावेजों मे कंपनी को करोड़ों का मालिक शेयर होल्डर भी दिखाया जाता है. इस घोटाले के कई रूप होते है जैसे या तो कोई इन कंपनियो को काले धन से खरीद कर उसके कागजों में दिखाए धन के आधार पर करोड़ों का मालिक बन जाए या इन कंपनियो से अनसिक्‍योर्ड लोन या बोगस लोन ले ले या इनसे सलाह देने की फीस के नाम पर कमीशन लेकर काले धन को सफेद करता रहे. आपको याद होगा सोनिया गांधी की कंपनी को कोलकाता की ऐसी ही एक कंपनी से एक करोड़ रुपये का लोन मिला था.

ऐसा नही है कि सरकार ने इन शैल कंपनियो को बंद करने की कोशिश नही की. केंद्र सरकार का दावा रहा है कि उसने पूरे देश मे तीन लाख शैल कंपनियों पर ताला डाल दिया और सरकार ने शैल कंपनियों पर लगाम के लिए एक टास्क फोर्स बनाकर ऑपरेशन शैल कंपनी भी चलाया था.

केंद्र सरकार का ऑपरेशन शैल कंपनी

शैल कंपनियों को खत्म करने के लिए सरकार ने एक सॉफ्टवेयर बनाया. सॉफ्टवेयर में 16 रेडफ्लैग बनाए जिनके जरिए शैल कंपनी की जांच करने को कहा गया. दावा किया गया कि एमसीए जैसे ही कंपनियों की डिटेल इस सॉफ्टवेयर में डालेगा शैल कंपनियों का पता चल जायेगा. शैल कंपनी खत्म करने के लिए कंपनियों से उनके निदेशको को पैन नंबर के अलावा डीन नंबर, टीन नंबर और आधार कार्ड भी लिंक कराने की तैयारी की गई. क्योंकि इसके पहले साल 2010 तक केवल पैन नंबर के आधार पर कंपनी खुल जाती थी. इन तमाम कोशिशो के चलते कुछ लगाम तो लगी लेकिन अभी भी देश मे कोई बड़ी छापेमारी होती है तो कोलकाता की कंपनियो का नाम अमूमन सामने आ ही जाता है.

ऐसे मे सवाल उठता है कि क्या लगाम लगाने मे कोई कमी रह गई या अभी भी कई शैल कंपनिया फंदे से बाहर हैं या फंदेबाज इतने तेज हैं कि वो घोटाला करने का कोई ना कोई रास्ता निकाल ही लेते हैं. सरकार ने इस घोटाले को रोकने के लिए सीए पर भी लगाम लगाने के लिए कानून में बदलाव किया है और जांच एजेंसियां भी अब ऐसे मामलों में चार्टर्ड अकाउंटेंट को गिरफ्तार करने लगी हैं. ध्यान रहे कि लालू की बेटी मीसा यादव के मामले में ईडी ने मीसा के सीए को भी गिरफ्तार कर लिया था.

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