DSP को डिमोट कर बनाया इंस्पेक्टर, इस गलती की वजह से पुलिस अधिकारी पर गिरी गाज

जांच में ये बात सामने आई कि नरकटियागंज एसडीपीओ ने महिला का मेडिकल जांच कराए बिना ही जरार शेरखर को गिरफ्तार कर लिया था. ऐसे में उनपर विभागीय कार्रवाई करते हुए उन्हें डिमोट कर दिया गया.

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पटना: बिहार सरकार ने एक डीएसपी को डिमोट करते हुए इंस्पेक्टर बना दिया है. दरसअल, बलात्कार के झूठे मामले को बिना जांच किए ही सही करार देना नरकटियागंज के एसडीपीओ निसार अहमद को महंगा पड़ा गया. इस गलती की वजह से सरकार ने उन्हें डीएसपी से डिमोट करते हुए इंस्पेक्टर बनाने की सजा दी है. अब वह स्थाई रूप से इसी पद पर रहेंगे. इस मामले में बिहार सरकार के गृह विभाग ने शुक्रवार को आदेश जारी कर दिया है.

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एसडीपीओ ने पुणे से किया था गिरफ्तार

बता दें कि वादिनी चिंता नामक महिला ने साल 2018 में नरकटियागंज के साठी थाना में पुणे के जरार शेरखर पर परिवाद दर्ज कराया था. महिला ने जरार शेरखर पर शादी के झांसा देकर यौन शोषण करने का आरोप लगाया था. इसके बाद मामले में कार्रवाई करते हुए नरकटियागंज एसडीपीओ निसार अहमद ने जरार शेरखर को पुणे से हिरासत में लेकर जेल भेज दिया. बता दें कि जरार के पिता का एक मित्र बेतिया का रहने वाला था, उसी ने एक महिला से झूठा केस दर्ज कराया था.

ऐसे में जरार शेरखर की मां मामले की जांच फिर से कराने को लेकर बिहार पहुंची. नुसरत एजाज शेरखर ने बेतिया एसपी को जांच के लिए आवेदन दिया. उनका कहना था कि उनका बेटा कभी बिहार आया ही नहीं है. इस मामले में एसपी ने पूरे गंभीरता से जांच की, जिसमें यह पाया गया कि जरार शेरखर निर्दोष है.

जांच में सामने आई सारी सच्चाई

जांच में ये बात सामने आई कि नरकटियागंज एसडीपीओ ने महिला का मेडिकल जांच कराए बिना ही जरार शेरखर को गिरफ्तार कर लिया था. नरकटियागंज एसडीपीओ द्वारा इस कांड में बनाये गए प्राथिमिकी के नामजद अभियुक्त जरार शेरखर की संलिप्तता के बिन्दु पर गंभीरता से जांच नहीं किया गया और न ही इस कांड में कथित पीड़िता की चिकित्सीय जांच कराई गई. ऐसे में इस मामले में एसपी ने न्यायिक हिरासत में रह रहे जरार शेरखर को मुक्त करने के लिए फिर से कोर्ट मे रिपोर्ट समर्पित करने का आदेश दिया.

स्थायी रूप से बनाया गया इंस्पेक्टर

वहीं, बेतिया SP ने एसडीपीओ निसार अहमद को गैरकानूनी ढंग से निर्दोष युवक को बलात्कार जैसे गंभीर मामले में बैगर सुमचित साक्ष्य के दोषी करार दिया जाने के लिए जिम्मेदार भी ठहराया. इसके बाद गृह विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीपीओ को डिमोट करने का आदेश जारी कर दिया. एसडीपीओ गृह विभाग ने एसडीपीओ निसार अहमद को निलंबित कर दिया, जिसके बाद डीएसपी से डिमोट करते हुए स्थायी रूप से इंस्पेक्टर बनाने का आदेश कर दिया गया.

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