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जानें- क्यों एक बार फिर सुर्खियों में है जमरानी बांध का मुद्दा, 46 साल से लोग कर रहे हैं इंतजार

जमरानी बांध का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है. 61 करोड़ में बनने वाली परियोजना 2700 करोड़ तक पहुंच गई है. जमरानी बांध का काम एक इंच भी आगे नहीं बढ़ पाया है.

हल्द्वानी: उत्तराखंड में 2022 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं. लिहाजा चुनाव से पहले जमरानी बांध का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है. पिछले हफ्ते हल्द्वानी के दौरे पर आए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उम्मीद जताई है कि अगले कुछ महीनों में जमरानी बांध का काम शुरू हो जाएगा, जिसके लिए केंद्र सरकार ने 2700 करोड़ की स्वीकृति भी दे दी है. सवाल ये है कि जिस बांध को करीब 46 साल पहले 61 करोड़ में बनना था आज उसी परियोजन की लागत 2700 करोड़ के आसपास पहुंच गई है.

एक नजर में जमरानी बांध परियोजना

- 1975 में बांध निर्माण की स्वीकृति. - करीब 9 किलोमीटर की लंबाई में 130 मीटर ऊंचा और 480 मीटर चौड़ा बांध. - 46 साल पहले बांध की लागत 61 करोड़. - वर्तमान में बांध परियोजना की लागत 2700 करोड़ के आसपास, यानी 46 सालों में लागत 39 गुना बढ़ गई.

61 करोड़ में बनने वाली परियोजना 2700 करोड़ तक पहुंच गई 46 साल का वक्त कम नहीं होता. 61 करोड़ में बनने वाली परियोजना 2700 करोड़ तक पहुंच गई है. जमरानी बांध का काम एक इंच भी आगे नहीं बढ़ पाया है. इतने सालों से जमरानी बांध केवल कागजों पर बनता जा रहा है. हर लोकसभा, विधानसभा चुनावों के दौरान एक ही मुद्दा की जमरानी बांध बनेगा, अब तक नेताओं के इस बयान में भी कोई कमी नहीं आई है.

जमरानी बांध बना चुनावी मुद्दा जमरानी बांध परियोजना से जुड़े लोग रिटायर हो गए लेकिन योजना कागजों तक ही सीमित रही. हालांकि, अब इस परियोजना के लिए पर्यावरण विभाग से स्वीकृति मिल गई है. अब सरकार को वित्तीय संसाधन जुटाने होंगें, आम जनता के मुताबिक जमरानी बांध केवल चुनावी वायदा बनकर रह गया है. क्योंकि, उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री रहते हुए जितनी भी घोषणाएं की हैं उसमें से सारी कोरी साबित हो रही हैं.

पर्यटन के क्षेत्र में होगा लाभ जमरानी बांध के निर्माण से उत्तराखंड को करीब 9458 हेक्टेयर और उत्तर प्रदेश को 47607 हेक्टेयर में अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा मिलेगी. इस बांध से 14 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी प्रस्तावित है, जबकि उत्तराखंड को 52 क्यूबिक मीटर पानी भी पेयजल के लिए मिल सकेगा. वहीं, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को 57 और 43 के अनुपात में पानी बंटेगा. उम्मीद है की इस परियोजना से पर्यटन गतिविधियों में भी तेजी आएगी, लेकिन इन सब के बीच देखने वाली बात ये है इतने लंबे इंतजार के बाद जमरानी बांध कागजों से उतरकर जमीन पर कब बनना शुरू होगा.

जल्द शुरू हो सकता है काम पिछले दिनों जब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हल्द्वानी के दौरे पर आए थे तो उन्होंने कई योजनाओं की घोषणा की थी. इस दौरान सीएम ने परियाजनाओं की प्रोग्रेस रिपोर्ट के बारे में भी जानकारी दी थी. जिसमें, जमरानी बांध के बारे में सबसे पहले बताया गया कि केंद्र सरकार ने 2700 करोड़ की स्वीकृति दे दी है, काम जल्द शुरू हो सकता है. इसके अलावा अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं को भी जल्द पंख लगने की उम्मीद हैं.

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