दिल्ली : 'जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख: सातत्य और संबद्धता का ऐतिहासिक वृत्तांत' पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा - कश्मीर भारत का अविभाज्य अंग पहले भी था आज भी है और आगे भी रहेगा।
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दिल्ली : 'जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख: सातत्य और संबद्धता का ऐतिहासिक वृत्तांत' पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा - कश्मीर भारत का अविभाज्य अंग पहले भी था आज भी है और आगे भी रहेगा। भारत के हर कोने का हजारों साल पुराना इतिहास विश्व सभ्यता को समृद्ध करने वाला है, लेकिन गुलामी के दौर में इसे विस्मृत करने के कुत्सित प्रयास हुए। इतिहास बहुत व्यापक भी होता है और बहुत कटु भी होता है। 'जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख: सातत्य और संबद्धता का ऐतिहासिक वृत्तांत' पुस्तक ने देश में प्रचलित मिथकों को तोड़कर इतिहास को सत्य व प्रमाण के साथ प्रस्तुत किया है। यह एक बड़ी उपलब्धि है, इसके लिए ICHR और NBT की पूरी टीम को बधाई . 5 अगस्त 2019 को हमारी सरकार और नरेंद्र मोदी जी के दृढ संकल्प के नेतृत्व ने कश्मीर से धारा 370 को समाप्त कर दिया और हमारी आजादी के बाद के इतिहास का कलंकित अध्याय समाप्त कर दिया और कश्मीर को विकास की गति में शामिल किया। धारा 370 और 35 A कश्मीर को देश से जोड़ने में रूकावट बनी हुई थी। धारा 370 ने घाटी में युवाओं के मन में आतंकवाद और अलगाववाद का बीज बोया था ,मुस्लिम आबादी देश के कई हिस्सों में है लेकिन वहां आतंकवाद क्यों नहीं आया क्यूंकि वहां धारा 370 नहीं थी। घाटी में 40 हज़ार से अधिक लोग आतंकवाद की बलि चढ़ गए। धारा 370 की वजह से दशकों तक कश्मीर के अंदर आतंकवाद का नंगा नाच चलता रहा। दलील दी जाती है की यह पाकिस्तान से सटा हुआ है ,गुजरात भी पाकिस्तान से सटा हुआ है ,राजस्थान भी पाकिस्तान से सटा हुआ है क्यों वहां आतंकवाद नहीं आया। धारा 370 ने भारत और कश्मीर का जुड़ाव टेम्पररी है ऐसा भ्रांति फ़ैलाने का काम किया। धारा 370 के हटने के बाद से कश्मीर में आतंकवाद की घटनाओं 70 प्रतिशत से ज्यादा की कमी आई है। भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है, जो जियो-कल्चर है, जिसकी सीमाओं का निर्माण उसकी संस्कृति से हुआ है। भारत को जियो-पॉलिटिकल दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि भारतीय दृष्टिकोण से ही समझा जा सकता है। हमने घाटी में आतंकवाद का इको सिस्टम खत्म किया। 34 साल के बाद आज कश्मीर में ताजिए का जुलुस निकला है और आज लाल चौक पर श्री कृष्ण जन्माष्टमी की यात्रा भी देखने को मिली है यह केवल धारा 370 ख़त्म होने के बाद हुआ है। बिना नाम लिए POK पर अमित शाह ने कहा - जो हमने गंवाया है जल्द ही वह भी हासिल कर लेंगे। कश्मीर को लेकर अंतराष्ट्रीय नरेटिव तय करने का काम करेगी। भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के चेयरमेन राघवेन्द्र तंवर। धर्मेंद्र प्रधान- कश्मीर कि अलग पहचान बनाने कि नाकाम कोशिश कि गयी थी, उसकी पहचान को नुक्सान पहुंचाने कि कोशिश कि गयी। कुछ लोग हर बात में प्रमाण ढूंढते हैं तो ऐसे लोगों कों ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक आधार पर, कार्बन डेटिंग आधार पर प्रमाण जुटा कर किताब लिखी है। देश में ये वैकल्पिक नरेटिव पेश करेगी। अमित शाह - देश में एक झूठ चल रहा था उसको इस पुस्तक के द्वारा तथ्यों के आधार पर बेनक़ाब किया गया है। एक झूठ चलाया गया कि देश कभी एक था ही नहीं, अंग्रेज़ों के समय के लिखें गए इतिहास मे देश कि व्याख्या ही गलत थी। पूरी दुनिया में एक मात्र भारत ऐसा देश है जो संस्कृति से जुडा देश है। जम्मू कश्मीर और लद्दाख के शासन के साथ यही हुआ कि उसके इतिहास कों गलत तरीके से पेश किया गया। बौद्ध धर्म कि पूरी यात्रा का कश्मीर महत्वपूर्ण अंग है। शासकों कों खुश करने कों लेकर लिखें गए इतिहास कों नकारने का वक़्त आ चुका है। इतिहास करों को जो करना था कर दिया अब हमको तथ्यों और प्रमानों के साथ पेश करें। अनुच्छेद 370 और 35अ कश्मीर कों देश के साथ आने से रोकने वाले प्रावधान थे। संविधान मे भी इसको temporary प्रोविशन लिखा था। पीएम मोदी सरकार ने एक कलंकित अध्याय को समाप्त किया। धारा 370 कि वजह से अलगाववाद बढ़ा, 370 कि वजह से भारत और कश्मीर का जुड़ाव आस्थाई है ये narative बनाया गया। 370 के बाद आतंकी घटनाओं में 70% कमी आयी. 2024 में एक भी पथराव कि घटना नहीं हुई। पंचायत चुनाव हुआ, लोकसभा और विधानसभा चुनाव भी हुए। पीएम मोदी द्वारा 80,000 करोड़ का पैकेज कश्मीर कों दिया गया। आतंकवाद के इकोसिस्टम कों भी समाप्त किया। जो भी गँवाया है उसको भी जल्द प्राप्त कर लेंगे।
























