पीएम मोदी की ग्रेजुएशन डिग्री से जुड़ी जानकारी
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M Modi Graduation Degree Case: दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार पीएम मोदी के शैक्षणिक रिकॉर्ड और डिग्री का खुलासा क
यूनिवर्सिटी ने तीसरे पक्ष से संबंधित जानकारी साझा न करने के नियमों का हवाला देते हुए इसे अस्वीकार कर दिया. हालांकि मुख्य सूचना आयोग (सीआईसी) ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और दिसंबर 2016 में डीयू को निरीक्षण की अनुमति देने का आदेश दिया. सीआईसी ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति खासकर प्रधानमंत्री की शैक्षिक योग्यताएं पारदर्शी होनी चाहिए. सीआईसी ने यह भी कहा कि इस जानकारी वाले रजिस्टर को एक सार्वजनिक दस्तावेज माना जाएगा.
इसी आदेश के खिलाफ यूनिवर्सिटी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां उसका प्रतिनिधित्व भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और उनकी कानूनी टीम ने किया. तुषार मेहता ने तर्क दिया कि डेटा जारी करने से एक खतरनाक मिसाल कायम होगी, जिससे सरकारी अ
यूनिवर्सिटी ने तीसरे पक्ष से संबंधित जानकारी साझा न करने के नियमों का हवाला देते हुए इसे अस्वीकार कर दिया. हालांकि मुख्य सूचना आयोग (सीआईसी) ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और दिसंबर 2016 में डीयू को निरीक्षण की अनुमति देने का आदेश दिया. सीआईसी ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति खासकर प्रधानमंत्री की शैक्षिक योग्यताएं पारदर्शी होनी चाहिए. सीआईसी ने यह भी कहा कि इस जानकारी वाले रजिस्टर को एक सार्वजनिक दस्तावेज माना जाएगा.
इसी आदेश के खिलाफ यूनिवर्सिटी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां उसका प्रतिनिधित्व भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और उनकी कानूनी टीम ने किया. तुषार मेहता ने तर्क दिया कि डेटा जारी करने से एक खतरनाक मिसाल कायम होगी, जिससे सरकारी अ
यूनिवर्सिटी ने तीसरे पक्ष से संबंधित जानकारी साझा न करने के नियमों का हवाला देते हुए इसे अस्वीकार कर दिया. हालांकि मुख्य सूचना आयोग (सीआईसी) ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और दिसंबर 2016 में डीयू को निरीक्षण की अनुमति देने का आदेश दिया. सीआईसी ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति खासकर प्रधानमंत्री की शैक्षिक योग्यताएं पारदर्शी होनी चाहिए. सीआईसी ने यह भी कहा कि इस जानकारी वाले रजिस्टर को एक सार्वजनिक दस्तावेज माना जाएगा.
इसी आदेश के खिलाफ यूनिवर्सिटी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां उसका प्रतिनिधित्व भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और उनकी कानूनी टीम ने किया. तुषार मेहता ने तर्क दिया कि डेटा जारी करने से एक खतरनाक मिसाल कायम होगी, जिससे सरकारी अ
यूनिवर्सिटी ने तीसरे पक्ष से संबंधित जानकारी साझा न करने के नियमों का हवाला देते हुए इसे अस्वीकार कर दिया. हालांकि मुख्य सूचना आयोग (सीआईसी) ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और दिसंबर 2016 में डीयू को निरीक्षण की अनुमति देने का आदेश दिया. सीआईसी ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति खासकर प्रधानमंत्री की शैक्षिक योग्यताएं पारदर्शी होनी चाहिए. सीआईसी ने यह भी कहा कि इस जानकारी वाले रजिस्टर को एक सार्वजनिक दस्तावेज माना जाएगा.
इसी आदेश के खिलाफ यूनिवर्सिटी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां उसका प्रतिनिधित्व भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और उनकी कानूनी टीम ने किया. तुषार मेहता ने तर्क दिया कि डेटा जारी करने से एक खतरनाक मिसाल कायम होगी, जिससे सरकारी अ
यूनिवर्सिटी ने तीसरे पक्ष से संबंधित जानकारी साझा न करने के नियमों का हवाला देते हुए इसे अस्वीकार कर दिया. हालांकि मुख्य सूचना आयोग (सीआईसी) ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और दिसंबर 2016 में डीयू को निरीक्षण की अनुमति देने का आदेश दिया. सीआईसी ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति खासकर प्रधानमंत्री की शैक्षिक योग्यताएं पारदर्शी होनी चाहिए. सीआईसी ने यह भी कहा कि इस जानकारी वाले रजिस्टर को एक सार्वजनिक दस्तावेज माना जाएगा.
इसी आदेश के खिलाफ यूनिवर्सिटी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां उसका प्रतिनिधित्व भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और उनकी कानूनी टीम ने किया. तुषार मेहता ने तर्क दिया कि डेटा जारी करने से एक खतरनाक मिसाल कायम होगी, जिससे सरकारी अ
यूनिवर्सिटी ने तीसरे पक्ष से संबंधित जानकारी साझा न करने के नियमों का हवाला देते हुए इसे अस्वीकार कर दिया. हालांकि मुख्य सूचना आयोग (सीआईसी) ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और दिसंबर 2016 में डीयू को निरीक्षण की अनुमति देने का आदेश दिया. सीआईसी ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति खासकर प्रधानमंत्री की शैक्षिक योग्यताएं पारदर्शी होनी चाहिए. सीआईसी ने यह भी कहा कि इस जानकारी वाले रजिस्टर को एक सार्वजनिक दस्तावेज माना जाएगा.
इसी आदेश के खिलाफ यूनिवर्सिटी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां उसका प्रतिनिधित्व भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और उनकी कानूनी टीम ने किया. तुषार मेहता ने तर्क दिया कि डेटा जारी करने से एक खतरनाक मिसाल कायम होगी, जिससे सरकारी अ
यूनिवर्सिटी ने तीसरे पक्ष से संबंधित जानकारी साझा न करने के नियमों का हवाला देते हुए इसे अस्वीकार कर दिया. हालांकि मुख्य सूचना आयोग (सीआईसी) ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और दिसंबर 2016 में डीयू को निरीक्षण की अनुमति देने का आदेश दिया. सीआईसी ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति खासकर प्रधानमंत्री की शैक्षिक योग्यताएं पारदर्शी होनी चाहिए. सीआईसी ने यह भी कहा कि इस जानकारी वाले रजिस्टर को एक सार्वजनिक दस्तावेज माना जाएगा.
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यूनिवर्सिटी ने तीसरे पक्ष से संबंधित जानकारी साझा न करने के नियमों का हवाला देते हुए इसे अस्वीकार कर दिया. हालांकि मुख्य सूचना आयोग (सीआईसी) ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और दिसंबर 2016 में डीयू को निरीक्षण की अनुमति देने का आदेश दिया. सीआईसी ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति खासकर प्रधानमंत्री की शैक्षिक योग्यताएं पारदर्शी होनी चाहिए. सीआईसी ने यह भी कहा कि इस जानकारी वाले रजिस्टर को एक सार्वजनिक दस्तावेज माना जाएगा.
इसी आदेश के खिलाफ यूनिवर्सिटी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां उसका प्रतिनिधित्व भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और उनकी कानूनी टीम ने किया. तुषार मेहता ने तर्क दिया कि डेटा जारी करने से एक खतरनाक मिसाल कायम होगी, जिससे सरकारी अ
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इसी आदेश के खिलाफ यूनिवर्सिटी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां उसका प्रतिनिधित्व भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और उनकी कानूनी टीम ने किया. तुषार मेहता ने तर्क दिया कि डेटा जारी करने से एक खतरनाक मिसाल कायम होगी, जिससे सरकारी अ
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यूनिवर्सिटी ने तीसरे पक्ष से संबंधित जानकारी साझा न करने के नियमों का हवाला देते हुए इसे अस्वीकार कर दिया. हालांकि मुख्य सूचना आयोग (सीआईसी) ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और दिसंबर 2016 में डीयू को निरीक्षण की अनुमति देने का आदेश दिया. सीआईसी ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति खासकर प्रधानमंत्री की शैक्षिक योग्यताएं पारदर्शी होनी चाहिए. सीआईसी ने यह भी कहा कि इस जानकारी वाले रजिस्टर को एक सार्वजनिक दस्तावेज माना जाएगा.
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यूनिवर्सिटी ने तीसरे पक्ष से संबंधित जानकारी साझा न करने के नियमों का हवाला देते हुए इसे अस्वीकार कर दिया. हालांकि मुख्य सूचना आयोग (सीआईसी) ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और दिसंबर 2016 में डीयू को निरीक्षण की अनुमति देने का आदेश दिया. सीआईसी ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति खासकर प्रधानमंत्री की शैक्षिक योग्यताएं पारदर्शी होनी चाहिए. सीआईसी ने यह भी कहा कि इस जानकारी वाले रजिस्टर को एक सार्वजनिक दस्तावेज माना जाएगा.
इसी आदेश के खिलाफ यूनिवर्सिटी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां उसका प्रतिनिधित्व भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और उनकी कानूनी टीम ने किया. तुषार मेहता ने तर्क दिया कि डेटा जारी करने से एक खतरनाक मिसाल कायम होगी, जिससे सरकारी अ
यूनिवर्सिटी ने तीसरे पक्ष से संबंधित जानकारी साझा न करने के नियमों का हवाला देते हुए इसे अस्वीकार कर दिया. हालांकि मुख्य सूचना आयोग (सीआईसी) ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और दिसंबर 2016 में डीयू को निरीक्षण की अनुमति देने का आदेश दिया. सीआईसी ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति खासकर प्रधानमंत्री की शैक्षिक योग्यताएं पारदर्शी होनी चाहिए. सीआईसी ने यह भी कहा कि इस जानकारी वाले रजिस्टर को एक सार्वजनिक दस्तावेज माना जाएगा.
इसी आदेश के खिलाफ यूनिवर्सिटी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां उसका प्रतिनिधित्व भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और उनकी कानूनी टीम ने किया. तुषार मेहता ने तर्क दिया कि डेटा जारी करने से एक खतरनाक मिसाल कायम होगी, जिससे सरकारी अ
यूनिवर्सिटी ने तीसरे पक्ष से संबंधित जानकारी साझा न करने के नियमों का हवाला देते हुए इसे अस्वीकार कर दिया. हालांकि मुख्य सूचना आयोग (सीआईसी) ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और दिसंबर 2016 में डीयू को निरीक्षण की अनुमति देने का आदेश दिया. सीआईसी ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति खासकर प्रधानमंत्री की शैक्षिक योग्यताएं पारदर्शी होनी चाहिए. सीआईसी ने यह भी कहा कि इस जानकारी वाले रजिस्टर को एक सार्वजनिक दस्तावेज माना जाएगा.
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यूनिवर्सिटी ने तीसरे पक्ष से संबंधित जानकारी साझा न करने के नियमों का हवाला देते हुए इसे अस्वीकार कर दिया. हालांकि मुख्य सूचना आयोग (सीआईसी) ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और दिसंबर 2016 में डीयू को निरीक्षण की अनुमति देने का आदेश दिया. सीआईसी ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति खासकर प्रधानमंत्री की शैक्षिक योग्यताएं पारदर्शी होनी चाहिए. सीआईसी ने यह भी कहा कि इस जानकारी वाले रजिस्टर को एक सार्वजनिक दस्तावेज माना जाएगा.
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यूनिवर्सिटी ने तीसरे पक्ष से संबंधित जानकारी साझा न करने के नियमों का हवाला देते हुए इसे अस्वीकार कर दिया. हालांकि मुख्य सूचना आयोग (सीआईसी) ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और दिसंबर 2016 में डीयू को निरीक्षण की अनुमति देने का आदेश दिया. सीआईसी ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति खासकर प्रधानमंत्री की शैक्षिक योग्यताएं पारदर्शी होनी चाहिए. सीआईसी ने यह भी कहा कि इस जानकारी वाले रजिस्टर को एक सार्वजनिक दस्तावेज माना जाएगा.
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इसी आदेश के खिलाफ यूनिवर्सिटी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां उसका प्रतिनिधित्व भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और उनकी कानूनी टीम ने किया. तुषार मेहता ने तर्क दिया कि डेटा जारी करने से एक खतरनाक मिसाल कायम होगी, जिससे सरकारी अ
यूनिवर्सिटी ने तीसरे पक्ष से संबंधित जानकारी साझा न करने के नियमों का हवाला देते हुए इसे अस्वीकार कर दिया. हालांकि मुख्य सूचना आयोग (सीआईसी) ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और दिसंबर 2016 में डीयू को निरीक्षण की अनुमति देने का आदेश दिया. सीआईसी ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति खासकर प्रधानमंत्री की शैक्षिक योग्यताएं पारदर्शी होनी चाहिए. सीआईसी ने यह भी कहा कि इस जानकारी वाले रजिस्टर को एक सार्वजनिक दस्तावेज माना जाएगा.
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