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राजनीति में 'शैक्षिक योग्यता' तय होना जरूरी क्यों नहीं?

जयकुमार सिंह जैकी के मुताबिक राजनीति में शिक्षित होने की कोई जरूरत नहीं होती... क्योंकि नेता को कोई काम खुद नहीं करना होता बल्कि उसकी जिम्मेदारी नेताओं और मंत्रियों के मातहत काम करने वाले अफसरों की होती है...

नेता शब्द का मतलब होता है, नेतृत्व करने वाला व्यक्ति... जो किसी भी समाज के लिए एक पथप्रदर्शक की तरह होता है और नेता अगर पढ़ा-लिखा हो उससे लोगों की उम्मीदें और भी बढ़ जाती हैं... लेकिन अगर कोई नेता खुद कहे, कि राजनीति में नेताओं का शिक्षित होना कोई मायने नहीं रखता... तो जाहिर सी बात है कि उस नेता पर सवाल तो उठेंगे ही... ऐसे ही एक नेता हैं उत्तर प्रदेश के कारागार राज्यमंत्री जयकुमार सिंह 'जैकी'। जयकुमार सिंह जैकी के मुताबिक राजनीति में शिक्षित होने की कोई जरूरत नहीं होती... क्योंकि नेता को कोई काम खुद नहीं करना होता बल्कि उसकी जिम्मेदारी नेताओं और मंत्रियों के मातहत काम करने वाले अफसरों की होती है... राजनीति में शिक्षा पर अपने ये विचार भी मंत्री जयकुमार जैकी ने कहीं और नहीं बल्कि एक कॉलेज में प्रकट किये.. जब वहां सैकड़ों की संख्या में छात्र और छात्राएं मौजूद थी... लेकिन छात्रों को उच्च शिक्षा को लेकर प्रोत्साहित करने की बजाय मंत्री जी उन्हे ये समझा रहे थे... कि कैसे पढ़ा-लिखा ना होने के बावजूद एक नेता पढ़े लिखे और काबिल अफसरों के ऊपर बैठा होता है।

सियासत और तालीम के ताने-बाने पर मंत्री जयकुमार जैकी का ये बयान इस बात का सबूत है कि राजनीति आज रसालत में कैसे जा पहुंची है... क्योंकि शिक्षा को लेकर ये बयान एक चुने हुए जनप्रतिनिधि और मंत्रीपद पर बैठे शख्स ने दिया है... जो खुद छात्र राजनीति की नर्सरी से निकलकर राजनीति में आए हैं.. लेकिन आज राजनीति में कदम जमाने के बाद ऐसा लगता है... कि जयकुमार जैकी खुद तो शिक्षा की अहमियत भूल चुके हैं और युवाओं को भी राह से भटका रहे हैं... और उनके इस बयान के बाद अब विपक्ष सरकार ही नहीं बल्कि उनकी सहयोगी भाजपा पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

तो अब सवाल उठता है कि क्या जेल मंत्री जयकुमार जैकी का बयान राजनीति का 'कड़वा सच' है ?... सवाल ये भी है कि जब रहनुमा ही ऐसे होंगे तो वो युवाओं को क्या रास्ता दिखाएंगे ? और सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर राजनीति में 'शैक्षिक योग्यता' का होना जरूरी क्यों नहीं है ?

रोटी कपड़ा और घर के साथ शिक्षा और स्वास्थ्य भी देश के हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। ऐसे में शिक्षा को लेकर एक मंत्री का ऐसा गैरजिम्मेदाराना बयान, जनता के मौलिक अधिकारों का भी हनन है। क्योंकि हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए साथ ही सकारात्मक राजनीति में भी आज शिक्षा की अहमियत जरूरी है। हालांकि कुछ ऐसे चेहरे भी रहे हैं जिन्होने अपने आचरण से राजनीति को नई दिशा दी है।

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