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IAS Success Story: चार बार हुईं असफल पर थमने न दी रफ्तार, पांचवीं बार में रुचि ने कर ली UPSC परीक्षा पास

IAS Success Story: रुचि बिंदल को यूपीएससी सीएसई परीक्षा में पहली सफलता मिलने में पांच साल से ज्यादा का समय लग गया पर, वे पीछे नहीं हटी. जानते हैं उनसे इन सालों का अनुभव.

Success Story Of IAS Topper Ruchi Bindal: यूपीएससी का सफर हर किसी के लिए अलग होता है. कोई जल्दी मंजिल तक पहुंच जाता है तो किसी को समय लगता है. ऐसे में अगर आप एक महिला कैंडिडेट हैं और यह सफर लंबा खिंचता है तो और तमाम तरह की परेशानियां भी आती हैं. लेकिन जो इन परेशानियों से घबराए बिना धैर्य के साथ यह सफर पूरा करता है, वही विजेता कहलाता है. हमारी आज की टॉपर की संघर्ष की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. रुचि जिंदल ने साल 2019 में अपने पांचवें प्रयास में यूपीएससी सीएसई परीक्षा पास की. इसके पहले उन्हें किसी न किसी स्टेज पर चार बार असफलता मिली. पांच प्रयासों का मतलब है कम से कम सात साल का संघर्ष. इस दौरान रुचि का धैर्य बनाए रखना और हिम्मत न हारना काबिले-तारीफ है. दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में रुचि ने अपने इन सालों के सफर के बारे में बात की.

बार-बार हुईं फेल –

रुचि के पांच प्रयासों पर नजर डालें तो सामने आता है कि पांच में से तीन बार वे प्री स्टेज पर ही अटक गईं यानी प्री परीक्षा ही पास नहीं कर पाईं. कोई कैंडिडेट जब बार-बार पहले ही चरण में बाहर हो जाए तो दिमाग में यह विचार आना लाजिमी है कि कहीं गलत क्षेत्र में तो नहीं आ गए. लेकिन रुचि को अपने ऊपर कांफिडेंस था. आखिरकार उनका यह कांफिडेंस रंग लाया और चौथे प्रयास में रुचि ने तीनों चरण पास कर लिए. हालांकि उनका संघर्ष अभी बाकी था क्योंकि इसके बाद भी उनका चयन नहीं हुआ. बात निराश करने की थी पर रुचि ने साहस दिखाया और आसपास वालों के तानों से दिमाग हटाकर पांचवीं कोशिश की. अंततः यह कोशिश रंग लाई और साल 2019 में पांचवीं बार में रुचि ने न केवल परीक्षा पास की बल्कि 39वीं रैंक के साथ टॉपर भी बनीं जिससे उन्हें उनका मनचाहा आईएएस पद मिला.

यहां देखें रुचि बिंदल द्वारा दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिया गया इंटरव्यू -  

रुचि का अनुभव –

रुचि अपने अनुभव को साझा करते हुए कहती हैं कि सबसे पहले तो अपने सोर्स सीमित रखें और ध्यान रखें कि उन्हें ही बार-बार पढ़ना है न कि हर बार कुछ नया उठाना है. तैयारी के पहले सिलेबस बहुत अच्छे से देख लें और सिलेबस में दिया सबकुछ आपको तैयार करना है, यह दिमाग में बैठा लें. चाहें तो सिलेबस लिखकर कहीं टांग लें ताकि पता रहे कि  क्या-क्या पढ़ना है. अगर सिलेबस के अनुसार तैयारी करेंगे तो भटकेंगे भी नहीं और कुछ छूटेगा भी नहीं.

जब तैयारी एक स्तर पर पहुंच जाए तो मॉक टेस्ट दें. रुचि इन्हें सफलता के लिए बहुत जरूरी मानती हैं. वे कहती हैं मॉक बिलकुल परीक्षा वाले माहौल में उतनी ही गंभीरता से दें, इससे बहुत लाभ होता है.

मेन्स के लिए रुचि आंसर राइटिंग पर फोकस करने की सलाह देती हैं क्योंकि जो आप लिखते हैं, अंक उसी के आधार पर मिलते हैं. आपको कितना आता है इससे एग्जामिनर को कोई फर्क नहीं पड़ता. अंत में बस इतना ही कि अभ्यास खूब करें, हर विषय को बराबर महत्व दें और सफल होने में समय लगे तो परेशान न हों, हर किसी की जर्नी एक जैसी नहीं होती जैसे हर किसी के लिए एक स्ट्रेटजी काम नहीं करती. हर कोई अपनी वीकनेस और स्ट्रेंथ के हिसाब से योजना बनाता है, ठीक इसी प्रकार हर किसी को सफलता मिलने में भी अपना अलग समय लगता है. किसी से तुलना न करें बस ईमानदार प्रयास करते रहें, सफल जरूर होंगे.

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