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राज्य के IPS को अपने पास बुलाने के केंद्र के अधिकार को चुनौती पर SC में आज सुनवाई, ममता सरकार से हो चुका है विवाद

इंडियन पुलिस सर्विस (कैडर) रूल्स, 1954 के नियम 6 के मुताबिक केंद्र सरकार, राज्य की सहमति से किसी IPS अधिकारी को प्रतिनियुक्ति पर बुला सकती है. यानी राज्य सरकार की सहमति को महत्व दिया गया है.

IPS अधिकारियों को अपने पास प्रतिनियुक्ति पर बुलाने के केंद्र के अधिकार को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा. IPS के ट्रांसफर से जुड़े नियम के मुताबिक केंद्र राज्य सरकार की मर्ज़ी न होने पर भी किसी अधिकारी को अपने पास डेप्यूटेशन पर बुला सकता है. पश्चिम बंगाल के रहने वाले वकील अबु सोहेल ने इस नियम को गलत बताते हुए याचिका दाखिल की है.

हाल ही में हुआ है विवाद

पिछले दिनों बंगाल के 3 IPS को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर बुलाए जाने को लेकर केंद्र और राज्य सरकार में तनातनी हुई है. दिसंबर में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के कार्यक्रम पर हुए हमले के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल कैडर के 3 आईपीएस अधिकारियों- भोलानाथ पांडे, प्रवीण त्रिपाठी और राजीव मिश्रा को दिल्ली तलब किया था. ऐसा करने का केंद्र को अधिकार है.

जानिए क्या है नियम

दरअसल, भारतीय पुलिस सेवा (IPS) एक अखिल भारतीय सेवा है. इनमें अधिकारियों की नियुक्ति केंद्र सरकार करती है. IPS अधिकारियों का कैडर आवंटन केंद्रीय गृह मंत्रालय करता है. उसका इन अधिकारियों पर नियंत्रण होता है. हालांकि, एक बार किसी राज्य कैडर में आवंटित हो जाने के बाद IPS अधिकारी उस राज्य सरकार के तहत काम करता है. राज्य सरकार उसे किसी पद पर नियुक्त करती है. जब ज़रूरी हो उसका ट्रांसफर करती है.

केंद्र सरकार ज़रूरी पड़ने पर किसी IPS अधिकारी को सेंट्रल डेप्यूटेशन यानी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर अपने पास बुला सकती है. ऐसा एक निश्चित समय तक के लिए किया जा सकता है. बाद में वह अधिकारी अपने मूल कैडर में लौट जाता है. केंद्र सरकार एक सीमित समय के लिए किसी IPS अधिकारी को दूसरे राज्य में भी भेज सकती है.

इंडियन पुलिस सर्विस (कैडर) रूल्स, 1954 के नियम 6 के मुताबिक केंद्र सरकार, राज्य की सहमति से किसी IPS अधिकारी को प्रतिनियुक्ति पर बुला सकती है. यानी राज्य सरकार की सहमति को महत्व दिया गया है. लेकिन यह अनिवार्य नहीं है. इसी नियम में यह लिखा गया है कि अगर राज्य सरकार केंद्र से सहमत न हो तब भी अंतिम फैसला केंद्र का ही होगा. राज्य सरकार को उसका पालन करना होगा.

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